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पुतिन का 'परमाणु चक्रव्यूह'; NATO के समुद्री रास्ते पर तैनात किया अपना सबसे ताकतवर युद्धपोत

रूस के अंदर तक यूक्रेन हमले कर रहा है. पुतिन पर कुछ बड़ा करने का दबाव भी है. ऐसे में 'एडमिरल नखिमोव' को आर्कटिक में तैनात कर पुतिन ने नाटो को बेहद सख्त मैसेज दिया है.

पुतिन का 'परमाणु चक्रव्यूह'; NATO के समुद्री रास्ते पर तैनात किया अपना सबसे ताकतवर युद्धपोत
'एडमिरल नखिमोव' के बैरेंट्स सागर में रूस के "बैस्टियन" डिफेंस जोन की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने की उम्मीद है.
  • रूस ने अपने परमाणु संचालित युद्धपोत एडमिरल नखिमोव को सेवेरोमोर्स्क नौसैनिक अड्डे पर तैनात किया है
  • यूक्रेन ने रूस पर लंबी दूरी के ड्रोन हमलों का 40 दिन का ऑपरेशन शुरू कर युद्ध में सैन्य दबाव बढ़ाया है
  • एडमिरल नखिमोव क्रूजर में उन्नत एयर-डिफेंस, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और एंटी-शिप क्षमताएं मौजूद हैं

रूस ने अपने सबसे ताकतवर परमाणु संचालित युद्धपोत 'एडमिरल नखिमोव' को आर्कटिक में तैनात कर दिया है. इसे मॉस्को ने अपने सेवेरोमोर्स्क नौसैनिक अड्डे पर तैनात किया है. इस कदम को पुतिन की तरफ से नाटो को सीधा और क्लियर मैसेज माना जा रहा है. मैसेज कि अब चीजें बर्दाश्त से बाहर हैं.

रूस ने ये युद्धपोत क्यों तैनात किया

हाल के दिनों में यूक्रेन से रूस का युद्ध एक नये चरण में प्रवेश कर गया है. यूक्रेन ने रूस पर सैन्य दबाव बढ़ाने के मकसद से लंबी दूरी के ड्रोन हमलों का 40 दिन का ऑपरेशन शुरू किया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि उन्होंने मॉस्को को युद्ध खत्म करने के लिए मजबूर करने के मकसद से इस ऑपरेशन को मंजूरी दी है. यूक्रेन ने इस ऑपरेशन की शुरुआत युद्ध शुरू होने के बाद से अपने सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक के साथ की. रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने कब्जे वाले क्रीमिया समेत कई इलाकों को निशाना बनाने वाले 660 यूक्रेनी ड्रोनों को रोका. मॉस्को ने बताया कि इससे पहले मई में सबसे बड़ा ड्रोन हमला हुआ था, जिसमें 556 ड्रोन शामिल थे. रूसी अधिकारियों ने रविवार को बताया कि यूक्रेन ने रूस पर ज़बरदस्त ड्रोन हमले जारी रखे हैं, जिससे दक्षिण में एक बड़ी तेल रिफाइनरी में आग लग गई और कम से कम दो लोगों की मौत हो गई. 

रूस का एडमिरल नखिमोव युद्धपोत

रूस का एडमिरल नखिमोव युद्धपोत

सेवेरोमोर्स्क क्यों अहम है?

आर्कटिक सर्कल के ऊपर स्थित सेवेरोमोर्स्क रूस के नॉर्दर्न फ्लीट का हेडक्वार्टर है. यह रूस के सबसे सुरक्षित मिलिट्री बेस में से एक है. इस बेस पर रूस की कई न्यूक्लियर-हथियार वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों की कमान मौजूद हैं, जो इसे मॉस्को की समुद्र-आधारित न्यूक्लियर सुरक्षा रणनीति के लिए अहम बनाती है. आर्कटिक इलाके में होने के बावजूद, गर्म 'नॉर्थ अटलांटिक ड्रिफ्ट' की वजह से पास की कोला खाड़ी साल भर बर्फ-मुक्त रहती है. इससे रूसी युद्धपोत आसानी से और तेजी से बैरेंट्स सागर और नॉर्थ अटलांटिक तक पहुंच सकते हैं.

इसकी लोकेशन से ग्रीनलैंड-आइसलैंड-यूनाइटेड किंगडम (GIUK) गैप तक सीधी पहुंच भी मिलती है. यह एक रणनीतिक समुद्री 'चोकपॉइंट' है, जिसे रूस और NATO के बीच किसी भी संभावित टकराव की स्थिति में लंबे समय से बहुत अहम माना जाता रहा है.

रूस की न्यूक्लियर रणनीति में अहम भूमिका

रिपोर्ट के अनुसार, 'एडमिरल नखिमोव' के बैरेंट्स सागर में रूस के "बैस्टियन" डिफेंस जोन की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने की उम्मीद है. यह मजबूत सुरक्षा वाला इलाका रूस की बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है, ताकि वे किसी भी हमले से बच सकें और जरूरत पड़ने पर देश की जवाबी न्यूक्लियर हमले की क्षमता बनाए रख सकें. यह क्रूजर एडवांस्ड एयर-डिफेंस, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और एंटी-शिप क्षमताओं से लैस है, जो इसे दुनिया के सबसे ज्यादा हथियारों से लैस सरफेस वॉरशिप में से एक बनाता है. कोल्ड वॉर के दौरान, किरोव-क्लास क्रूजर का मकसद नाटो के एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप्स का शिकार करना, सोवियत नौसेना के बेड़ों को सुरक्षा देना और न्यूक्लियर पनडुब्बी पेट्रोलिंग वाले इलाकों की रक्षा करना था. हालांकि, रूस अब उसी भूमिका में एयरक्राफ्ट कैरियर का इस्तेमाल नहीं करता है, लेकिन अपने पनडुब्बी बेड़े की सुरक्षा करना अभी भी सेना की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है.

 सेवेरोमोर्स्क रूस के नॉर्दर्न फ्लीट का हेडक्वार्टर है.

सेवेरोमोर्स्क रूस के नॉर्दर्न फ्लीट का हेडक्वार्टर है.

मगर आखिरी कारण अमेरिका

एडमिरल नखिमोव हाल ही में मरम्मत और बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण के काम के बाद सेवेरोमोर्स्क लौटा है. इसकी तैनाती से पता चलता है कि रूस अपनी रणनीतिक परमाणु ताकतों को मजबूत करने पर लगातार ध्यान दे रहा है, भले ही यूक्रेन संघर्ष एक और साल तक खिंच गया है. अभी कुछ दिन पहले ही रूस ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह पिछले साल अगस्त में अलास्का में हुई समिट के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बनी "समझ" को पूरा करने में नाकाम रहा है. यह बदलाव मॉस्को में बढ़ती निराशा को दिखाता है. ऑस्ट्रिया के एनालिस्ट और पुतिन पर लंबे समय से नजर रखने वाले गेरहार्ड मैंगॉट ने कहा कि यह बदलाव रूस के अंदर यूक्रेनी हमलों में तेजी के कारण "रूसी अर्थव्यवस्था और सेना के लिए बहुत गंभीर स्थिति" को लेकर मॉस्को की घबराहट को दिखाता है. उन्होंने कहा कि मॉस्को का मानना ​​है कि इन हमलों में अमेरिका मदद कर रहा है. 

क्या यही कर रहे पुतिन?

मैंगॉट ने कहा, "पुतिन को ऐसा जवाब देने की जरूरत है जो जनता को दिखे और जिससे यह साबित हो सके कि उनके पास अभी भी आगे की चाल चलने के लिए विकल्प मौजूद हैं." उन्होंने आगे और सैन्य तनाव बढ़ने और ट्रंप को फिर से अपने पक्ष में करने की रूस की कोशिशों का अनुमान लगाया. हाल ही में हुए यूक्रेनी हमलों के बारे में बात करते हुए पुतिन ने मंगलवार को कहा कि "पूरा पश्चिम" कीव के लिए काम कर रहा है. 'एडमिरल नखिमोव' शायद पुतिन का पहला आक्रामक कदम है.

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