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आखिर चंपत राय को 'चंपत बंसल' क्यों बताया जा रहा है? समझिए नाम की पूरी कहानी

राम मंदिर चंदा विवाद के बाद विपक्ष और सोशल मीडिया पर चंपत राय को लोग 'चंपत बंसल' कह रहे हैं. लोग उनकी पहचान और बैकग्राउंड को उजागर कर घेरने की कोशिश कर रहे हैं.

आखिर चंपत राय को 'चंपत बंसल' क्यों बताया जा रहा है? समझिए नाम की पूरी कहानी
राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर चंपत राय विवादों में
NDTV
  • चंपत राय उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से हैं और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े
  • उनका पूरा नाम चंपत राय बंसल था, लेकिन संघ में शामिल होने के बाद उन्होंने अपने नाम से बंसल हटाया था
  • चंपत राय के पिता रामेश्वर प्रसाद बंसल भी आरएसएस से जुड़े थे और इमरजेंसी के दौरान जेल भी गए थे

अयोध्या के राम मंदिर मामले में सबसे चर्चित नाम ट्रस्ट के महामंत्री चंपत रात का है. वो चंपत राय जिनको ‘बड़ी मछली' बताकर बचाने का आरोप लगाते हुए विपक्ष सरकार को घेर रहा है. विवाद बढ़ा तो चंपत राय को लोगों में 'चंपत बंसल' कहना शुरू कर दिया. आखिर चंपत राय को चंपत बंसल बताये जाने के पीछे क्या कारण है, आइए समझते हैं.

बिजनौर के रहने वाले हैं चंपत राय?

विश्व हिंदू परिषद के नेता और राम मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय यूपी के बिजनौर जिले के रहने वाले हैं. कुल दस भाई बहनों में चंपत राय दूसरे नंबर के हैं. पढ़ाई करने के बाद वो प्रोफेसर बन गए. हालांकि नौकरी करते हुए इमरजेंसी में सरकार के खिलाफ बने माहौल से उनका मन नौकरी में नहीं लगा तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए. संघ और विश्व हिंदू परिषद में सक्रिय होकर काम करते-करते चंपत राय का ओहदा लगातार बढ़ता गया.

चंपत राय बंसल से कैसे बने चंपत राय?

अब बात करते हैं असल मुद्दे यानी चंपत राय को चंपत बंसल बताए जाने की. तो चंपत राय का टाइटल बंसल है. उनका पूरा नाम चंपत राय बंसल था. हालांकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस में जुड़ने के बाद लोग अपने नाम से टाइटल हटा देते हैं. कुछ यही काम चंपत राय बंसल ने किया और वो चंपत राय बंसल से चंपत राय बन गए. इसी वजह से उनके संगठन में जुड़ने के बाद लोग उन्हें बिना टाइटल लगाए बुलाने लगे और धीरे-धीरे चंपत राय बंसल के नाम से बंसल टाइटल हट गया.

साल 1946 में जन्मे चंपत राय के पिता का नाम रामेश्वर प्रसाद बंसल था. रामेश्वर प्रसाद बंसल भी आरएसएस से जुड़े थे. इमरजेंसी में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने को लेकर उनकी गिरफ्तारी हो गई. लगभग डेढ़ साल जेल में बिताने के बाद जब वो लौटे तो नौकरी छोड़ पूरी तरह संघ और विहिप से जुड़ गए और बिना शादी किए संगठन के काम में लग गए. परिवार से संपर्क जरूर रहा लेकिन बहुत ज्यादा जुड़ाव कभी नहीं रह पाया.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दो पक्ष

अयोध्या के राम मंदिर के चंदा विवाद में चंपत राय को लेकर दो पक्ष बन गए हैं. एक पक्ष उन्हें इस पूरे विवाद के सबसे बड़ा विलेन मान कर हमला कर रहा है वहीं एक पक्ष का दावा है कि चंपत राय चोरी नहीं कर सकते. चंपत राय के पक्ष के खड़े लोगों का कहना है कि दो कुर्ता धोती रखने वाले चंपत राय खुद विहिप के दफ्तर में रहते हैं. आजतक ना कोई संपत्ति बनाई ना उनके घर की स्थिति देखकर कोई उन पर परिवार को आर्थिक मदद करने का आरोप लगा सकता है.

अगर विरोध करने वालों की बात करें तो चंपत राय को पूरा विपक्ष निशाने पर लेकर उन पर कार्रवाई करने की मांग कर रहा है. 15 सदस्यीय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (राम जन्मभूमि ट्रस्ट) में महामंत्री चंपत राय पूरे ट्रस्ट के सबसे ताकतवर सदस्य रहे हैं. विवाद शुरू हुआ तो निशाने पर चंपत राय आ गए. फिलहाल उन्होंने इस्तीफा दे दिया है लेकिन उनका इस्तीफा स्वीकार होगा या नहीं, इस पर ट्रस्ट की बैठक में फैसला होगा. हालांकि इन सबके बीच हर तरफ जो एक नाम चर्चा में है वो है चंपत राय का.

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