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ईरान युद्ध से इंडो-पैसिफिक की सप्लाई चेन पर हुआ असर, तो होर्मुज पर QUAD ने खींच दी लकीर; बैठक से क्या निकला?

Quad Meeting Outcome: नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मंचों पर हमेशा अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' को लेकर काफी सतर्क रही है, अब क्वाड के इस संकट प्रबंधन तंत्र के एक मुख्य स्तंभ के तौर पर आगे आई है.

ईरान युद्ध से इंडो-पैसिफिक की सप्लाई चेन पर हुआ असर, तो होर्मुज पर QUAD ने खींच दी लकीर; बैठक से क्या निकला?
अब क्वाड होर्मुज संकट प्रबंधन तंत्र के एक मुख्य स्तंभ के तौर पर आगे आई है.
AFP

Quad FM Meeting 2026: होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों की आवाजाही पर बढ़ते खतरों और एशिया भर में ईंधन की कीमतों के कई सालों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच बड़ा फैसला लिया गया है. भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका (क्वाड) के विदेश मंत्रियों ने मंगलवार (26 मई 2026) को नई दिल्ली में एक बैठक की. इस बैठक से उन्होंने साफ और कड़ा संदेश दिया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली इस ऊर्जा अस्थिरता के सामने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को बंधक नहीं बनने दिया जाएगा.

बैठक के बाद 'इंडो-पैसिफिक एनर्जी सिक्योरिटी' पर जारी क्वाड के साझा बयान में सीधे तौर पर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का जिक्र किया गया है. राजनयिक मोर्चे पर इसे एक बेहद सीधा और बड़ा इशारा माना जा रहा है. बयान में व्यावसायिक जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही की वकालत की गई है और जहाजों के रास्ते में रुकावट डालने वाले किसी भी कदम का विरोध किया गया है. यह सख्त रुख मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संघर्ष की वजह से पैदा हुई गहरी चिंताओं को दिखाता है.

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सही वक्त पर बड़ा कदम

यह फैसला बेहद नाजुक और अहम वक्त पर आया है. हाल के महीनों में मिडिल ईस्ट में दोबारा भड़के तनाव की वजह से ब्रेंट क्रूड (कच्चे तेल) की कीमतों में भारी उछाल आया है. इसका सीधा असर टोक्यो, मुंबई से लेकर सिडनी तक आम जनता के बिजली-ईंधन के बिलों, खाद की कीमतों और पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन पर पड़ रहा है. इंडो-पैसिफिक के वो देश जो खाड़ी देशों के तेल पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं, उनके लिए इस संकट ने उस कमजोरी को बेपर्दा कर दिया है, जिसे नीति-निर्माता जानते तो थे लेकिन इसका कोई हल नहीं निकाल पा रहे थे.

आज यानी 26 मई 2026 को जारी इस साझा बयान में भारत का किरदार बेहद अहम रहा. भारत लंबे वक्त से मल्टीलेटरल एनर्जी फोरम में अपनी स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी का बचाव करती रहा है. नई दिल्ली क्वाड के रिस्पॉन्स आर्किटेक्चर के एक अहम पिलर के तौर पर आगे आई है. यह बयान साउथ एशिया में एनर्जी सिक्योरिटी के लिए भारत के लगातार सपोर्ट को दिखाता है और इसे ऑस्ट्रेलिया के साउथईस्ट एशिया और पैसिफिक एंगेजमेंट के साथ एक रीजनल स्टेबिलाइजिंग फोर्स के तौर पर रखता है.

एक ऐसे देश के लिए जो एक ही समय में दुनिया के सबसे बड़े क्रूड इंपोर्टर में से एक है और एक उभरता हुआ क्लीन एनर्जी हब भी है. भारत का इस फ्रेमवर्क को अपनाना इस बात में एक बड़ा बदलाव दिखाता है कि वह विदेशों में अपने इकोनॉमिक हितों को कैसे प्रोजेक्ट करता है.

'क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम' की शुरुआत

इस बैठक में चारों देशों ने मिलकर 'क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम' बनाने का ऐलान किया है. यह एक उच्च स्तरीय समन्वय संस्था होगी, जो ऊर्जा संकट के दौर में देशों के बीच तालमेल बिठाने, नीतियों को एक जैसा बनाने और बाजार का विश्लेषण करने का काम करेगी. इसके साथ ही 'क्वाड इनिशिएटिव ऑन इंडो-पैसिफिक एनर्जी सिक्योरिटी' की शुरुआत भी की गई है, जिसके तहत तकनीक, आपातकालीन अभ्यास और सामरिक पेट्रोलियम प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक कार्ययोजना तैयार की जाएगी.

इस पहल में ऑस्ट्रेलिया ने बड़ी आर्थिक प्रतिबद्धता दिखाई है. उसने दक्षिण-पूर्व एशिया निवेश वित्तपोषण सुविधा के लिए 2 अरब डॉलर और फिजी को बजट सहायता के रूप में 3 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर देने का जिक्र किया. इस पहल से यह दिखता है कि वह प्रशांत क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कितना गंभीर है. वहीं, जापान ने इस क्षेत्र में ऊर्जा के स्रोतों को विविधता देने के लिए अपने 'POWERR Asia' (पार्टनरशिप ऑन वाइड एनर्जी एंड रिसोर्सेज रेजिलिएंस) पहल को हाइलाइट किया है.

इस साझा बयान में ऊर्जा संकट की वजह से पैदा होने वाली असमानता पर भी ध्यान दिया गया है. बयान में माना गया है कि इस संकट का सबसे ज्यादा नुकसान प्रशांत क्षेत्र के विकासशील और छोटे द्वीपीय देशों को उठाना पड़ता है, जिनके लिए छोटे से छोटा संकट भी बड़ी आर्थिक तबाही ला सकता है.

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आर्थिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार

इस बैठक पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि अब तक क्वाड का आपसी सहयोग सिर्फ समुद्री सुरक्षा और तकनीकी सप्लाई चेन तक ही सीमित माना जाता था. लेकिन मंगलवार (26 मई 2026) को आया यह बयान दिखाता है कि इस समूह के आर्थिक सुरक्षा के दायरे का काफी विस्तार हुआ है और मौजूदा संकट ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है.

नई दिल्ली से रवाना होते हुए चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने बिल्कुल साफ संदेश दिया कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों से ऊर्जा की बेरोकटोक आवाजाही सिर्फ व्यापार का मसला नहीं है. चारों देशों ने पुरजोर तरीके से कहा कि यह वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है और वे मिलकर इसकी हिफाजत करने का पूरा इरादा रखते हैं.

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