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गैस की किल्लत से नहीं, महंगाई की वजह से करोड़ों रसोइयों में खाली पड़े हैं सिलेंडर, RTI के आंकड़े देखकर रह जाएंगे दंग!

Increasing Poverty Due to Inflation: ईरान-अमेरिका और इजरायल युद्ध से पैदा हुए वैश्विक संकट के बीच भारत में एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है. गैस बुकिंग केंद्रों के बाहर लगी लंबी कतारें, घबराहट में हो रही खरीदारी और ब्लैक मार्केट में आसमान छूती कीमतें इस संकट की गवाह हैं. लेकिन लोगों की रसोई से गायब हुए गैस के पीछे एक ऐसा कड़वा सच छिपा है, जो देश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

गैस की किल्लत से नहीं, महंगाई की वजह से करोड़ों रसोइयों में खाली पड़े हैं सिलेंडर, RTI के आंकड़े देखकर रह जाएंगे दंग!
गैस की किलल्त से नहीं, महंगाई की वजह से करोड़ों रसोई में खाली पड़े हैं सिलेंडर, RTI से हुआ चौंकाने वाला खुलासा
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Truth of LPG Crisis: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नीमच (Neemuch) के आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौर की ओर से हासिल किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश की तीन प्रमुख तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के रिकॉर्ड से पता चला है कि वर्ष 2025-26 में 5.56 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं ने या तो पूरे साल में एक भी रिफिल नहीं लिया, या सिर्फ एक ही सिलेंडर बुक कराया.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 3.30 करोड़ उपभोक्ताओं ने सालभर में 'शून्य' रिफिल कराया, जबकि 2.26 करोड़ लोग सिर्फ एक सिलेंडर ही ले पाए. ये आंकड़े बताते हैं कि देश के करोड़ों घरों में गैस की किल्लत की वजह से रसोई गैस गायब नहीं हुई है, बल्कि इतनी महंगी हो गई है कि लोग इसे बेहद मजबूरी में ही इस्तेमाल कर पा रहे हैं.

रसोई से गायब होती गैस और चूल्हे की वापसी

भोपाल के बाणगंगा इलाके में रहने वाली सलमा बी सात सदस्यों के परिवार के साथ रहती हैं. उनके घर में एलपीजी कनेक्शन तो है, लेकिन सिलेंडर का इस्तेमाल कभी-कभी ही होता है. पिछले चार महीनों से उनका परिवार पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे पर ही खाना बना रहा है. सलमा बताती हैं कि हम कभी-कभार बीच में सिलेंडर ले लेते हैं, लेकिन ज्यादा इस्तेमाल चूल्हे का ही करते हैं, ताकि खर्च को कम किया जा सके. श्यामला हिल्स के पास रहने वाली शहजादी बी की कहानी भी अलग नहीं है. उनके चार सदस्यों के परिवार ने पिछले तीन महीनों से सिलेंडर नहीं लिया है. उनका कहना है कि पहले मिलने वाली सब्सिडी अब नाम मात्र की रह गई है और करीब ₹920 का सिलेंडर उनके बजट से बाहर हो चुका है. शहजादी के घर में भी अब चूल्हा ही खाना पकाने का मुख्य जरिया बन चुका है.

उज्ज्वला और सामान्य वर्ग दोनों श्रेणियों पर महंगाई की मार

आरटीआई से मिले आंकड़े यह साफ करते हैं कि सिलेंडर न ले पाने की यह लाचारी केवल प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामान्य उपभोक्ताओं का भी यही हाल है. आंकड़े बताते हैं कि उज्ज्वला योजना (PMUY) श्रेणी के 1.67 करोड़ लाभार्थियों ने एक भी रिफिल नहीं लिया. वहीं, 1.12 करोड़ ने केवल एक ही बार रिफिल कराया. इसके साथ ही सामान्य श्रेणी के 1.63 करोड़ उपभोक्ताओं ने शून्य रिफिल कराया, जबकि 1.13 करोड़ ने सिर्फ एक ही बार रिफिल कराया.

कंपनियों के अनुसार आंकड़े (वित्तीय वर्ष 2025-26)

तेल विपणन कंपनीशून्य रिफिल वाले उपभोक्तासिर्फ एक रिफिल वाले उपभोक्ता
IOCL2.03 करोड़1.01 करोड़
BPCL70.96 लाख53.99 लाख
HPCL55.93 लाख70.48 लाख

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उज्ज्वला योजना की शुरुआत इस उद्देश्य से की गई थी कि गरीब महिलाओं को धुएं से भरे Kitchen से मुक्ति मिले और वे स्वच्छ ईंधन की तरफ बढ़े, लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि कागजों पर कनेक्शन और घरों में सिलेंडर होने के बावजूद, लोग महंगाई के आगे बेबस हैं. आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ का कहना है कि सरकार की ओर से उज्ज्वला उपभोक्ताओं को सब्सिडी दिए जाने के बावजूद ये आंकड़े सामने आए हैं. वहीं, सामान्य उपभोक्ताओं की इतनी बड़ी संख्या का रिफिल न लेना यह दिखाता है कि महंगाई ने आम परिवारों को किस कदर प्रभावित किया है. लिहाजा, सरकार को इस मामले में तुरंत दखल देना चाहिए, ताकि जिस उद्देश्य से उज्ज्वला योजना शुरू की गई थी, उसे बचाया जा सके. सलमा और शहजादी जैसे करोड़ों परिवारों के लिए आज मुद्दा यह नहीं है कि उनके पास एलपीजी कनेक्शन है या नहीं; बड़ा सवाल यह है कि क्या वे इसे दोबारा भराने की हैसियत रखते हैं?

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