- इजरायली सैनिक ने लेबनान के एक ईसाई गांव में ईसा मसीह की मूर्ति को हथौड़े से तोड़ दिया था
- वायरल फोटो की पुष्टि के बाद इजरायली सेना ने दोषी सैनिकों को ड्यूटी से हटाकर सैन्य हिरासत में रखा
- अब पीएम नेतन्याहू ने ईसाई सैनिकों से मुलाकात कर मिडिल ईस्ट में ईसाइयों के अधिकारों की रक्षा का संदेश दिया
Israel Hezbollah War in Lebanon: इजरायल के दो सैनिकों ने हाल ही में लेबनान के अंदर ऐसी गिरी हुई हरकत की थी अब खुद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को एकता का संदेश देने आगे आने पड़ा है. पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार, 26 अप्रैल को इजरायली रक्षा बलों (IDF) में सेवा दे रहे तमाम ईसाई सैनिकों से मुलाकात की. उन्होंने इस मुलाकत का एक वीडियो भी शेयर किया और कहा कि इजरायल पूरे मिडिल ईस्ट में ईसाइयों के अधिकारों के लिए लड़ रहा है. सवाल है कि आखिर नेतन्याहू को खुद सामने आकर यह बात क्यों कहनी पड़ी है. चलिए आपको यह पूरा विवाद बताते हैं.
विवाद का कारण क्या है?
जंग के बीच दक्षिण लेबनान के एक ईसाई गांव (डेबेल) में एक इजरायली सैनिक द्वारा ईसा मसीह (जीसस क्राइस्ट) की मूर्ति को हथौड़े से तोड़ने का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. इससे पूरी दुनिया के ईसाइयों में भारी नाराजगी फैल गई थी. फोटो में एक इजराइली सैनिक हथौड़े से सूली पर चढ़े ईसा मसीह की मूर्ति के सिर पर वार करता दिख रहा था. विवाद शुरू होने के बाद जांच बैठी तो इस फोटो को सही पाया गया. आखिर में जांच के नतीजे जारी करते हुए इजरायली सेना ने कहा कि “जिस सैनिक ने ईसाई प्रतीक को नुकसान पहुंचाया और जिसने उसकी फोटो ली, दोनों को लड़ाई की ड्यूटी से हटाया जाएगा और 30 दिन की सैन्य हिरासत दी जाएगी.” सेना ने यह भी कहा कि छह अन्य सैनिक, जो मौके पर मौजूद थे और जिन्होंने न तो इसे रोका और न ही रिपोर्ट किया, उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया है.
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अब नेतन्याहू ने क्या कहा?
नेतन्याहू ने पीएम ऑफिस से ईसाई सैनिकों के एक समूह के साथ बयान दिया है. उन्होंने कहा कि जो बाहर दिखाया जा रहा है, सच्चाई उससे बिल्कुल उलट है. "इजरायल न केवल पूरे मिडिल ईस्ट में ईसाइयों के अधिकारों के लिए लड़ रहा है, बल्कि उसके पास ईसाई सैनिक भी हैं जो पूरे क्षेत्र और उसके बाहर इजरायल और हमारे ईसाई भाइयों की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं." उन्होंने कहा कि "इजरायल मिडिल ईस्ट में एकमात्र देश है जहां ईसाई समुदाय फल-फूल रहा है, बढ़ रहा है और विस्तार कर रहा है. और यह अद्भुत पुरुषों और महिलाओं के साथ बहुत सफल है."
Prime Minister Netanyahu met today with Christian soldiers and commanders from a multitude of IDF units:
— Prime Minister of Israel (@IsraeliPM) April 26, 2026
"I'm here in the Prime Minister's Office with an extraordinary group of young men and women. These are Christian soldiers, men and women, in the Israeli Defense Forces.
1/5 pic.twitter.com/KCBhL2yGFO
खुद एकबार दे चुके हैं विवादास्पद बयान
मार्च 2026 में ही नेतन्याहू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईसा मसीह की तुलना चंगेज खान से कर दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर समाज खुद की रक्षा नहीं कर सकता, तो "ईसा मसीह को चंगेज खान पर कोई बढ़त हासिल नहीं है". अब उन्होंने ईसाई सैनिकों से मिलकर यह संदेश देने की कोशिश की कि इजरायल में सभी धर्मों के लोग सुरक्षित हैं और ईसाई समुदाय इजरायल की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
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