- पैराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को महाभियोग के जरिए पद से हटा कर नजरबंद कर दिया गया है.
- उपराष्ट्रपति पेड्रो अलियाना को देश का नया राष्ट्रपति घोषित कर 2028 तक के लिए शपथ दिलाई गई है.
- यूएनो नामक डिजिटल बैंक के डूबने से देश में वित्तीय संकट पैदा हुआ और बैंक के ग्राहक परेशान हुए.
पैराग्वे में राष्ट्रपति को सैंटियागो पेना को महाभियोग के जरिए हटा दिया गया है. पिछले पांच दिनों में यह सत्ता परिवर्तन हुआ है. इस घटनाक्रम ने पूरी दुनिया को एकदम से चौंका दिया है. क्योंकि पेना की कुर्सी एक बैंक के डूबने की वजह से चली गई है. उन्हें घर में नजर बंद कर दिया गया है, जिसकी वजह से इस घटन को तख्तापलट भी कहा जा रहा है. हालांकि सैंटियागो पेना को संसद में सीनेट ने महाभियोग के जरिए पद से हटाया है. यह पूरा घटनाक्रम शुक्रवार को हुआ है, जिसके बाद उन्हें नजरबंद कर दिया गया. जबकि उनकी जगह उपराष्ट्रपति पेड्रो अलियाना ने देश के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली है. वह देश के 53वें राष्ट्रपति बन गए हैं, उनका कार्यकाल 2028 तक रहेगा.
यूएनो बैंक डूबने से गई कुर्सी
पैराग्वे में यह पूरा सियासी घटनाक्रम यूएनो बैंक के डूबने की वजह से हुआ है. यह एक डिजिटल बैंक था, जो कुछ ही सालों में देश की एक छोटी सी कंपनी से बड़ा बैंक बन गया था. इसको ऐसे समझा जा सकता है कि पैराग्वे की कुल आबादी 65 लाख है, जबकि इस बैंक में 30 लाख ग्राहक थे, यानि देश की आधी जनता इस बैंक की ग्राहक थी, जिसकी वजह से पैराग्वे में बैंक का महत्व ज्यादा था. कई लोगों ने इस बैंक में पहली बार खाता खुलवाया था. लेकिन मंगलवार सुबह केंद्रीय बैंक ने अचानक यूएनो बैंक को अपने कब्जे में ले लिया, जिसका कारण बताया गया कि बैंक की सॉल्वेंसी यानी पूंजी की स्थिति कानूनी न्यूनतम स्तर से भी आधी रह गई थी. बैंक के पास अपने कर्ज और देनदारियों को चुकाने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं थी.
इसकी वजह से 30 लाख से ज्यादा ग्राहकों के खाते फ्रीज हो गए, लोग न तो पैसा निकाल पा रहे थे और नहीं अपना कार्ड चला पा रहे थे. ऐसे में सब परेशान हो गए. इस घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग पैराग्वे की राजधानी असुनसियोन में बनी संसद के बाहर जमा हो गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी.
कैसे हट गए पैराग्वे के राष्ट्रपति
बैंक का संकट बढ़ने की वजह से राष्ट्रपति सैंटियागो पेना ने सोशल मीडिया के जरिए इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया. लेकिन देश की संसद ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया. क्योंकि माना जा रहा है कि अगर पेना इस्तीफा देकर जाते तो उन्हें पूर्व राष्ट्रपति के तौर पर आजीवन सीनेट सदस्यता मिलती और उसके साथ संसदीय इम्युनिटी भी मिलती, जिससे उन पर आपराधिक मुकदमा नहीं चल पाता. ऐसे में संसद ने उनके इस्तीफे की जगह महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की गई, जहां गुरुवार को निचले सदन चैंबर ऑफ डेप्युटीज ने 78-0 से महाभियोग प्रस्ताव पास कर दिया. इसके बाद शुक्रवार के दिन सीनेट में सुनवाई हुई, जहां 44 सीनेटरों में सभी ने उनके खिलाफ वोट किया था, महाभियोग उनके खिलाफ पास हुआ, जिसके बाद विश्वासघात के शक में घर में नजरबंद करने का आदेश भी दे दिया. राजधानी में उनके घर पर पुलिस का घेरा लगा दिया गया, उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी भी जमा हैं.
पेड्रो अलियाना बने नए राष्ट्रपति
सैंटियागो पेना की जगह 52 साल के पेड्रो अलियाना पैराग्वे के नए राष्ट्रपति बन गए हैं. वह 2023 से पेना के साथ उपराष्ट्रपति थे. पैराग्वे में लंबे समय से सत्ता पर काबिज कोलोराडो पार्टी में उनकी भूमिका भी अहम मानी जाती है. हालांकि अलियाना की राह भी आसान नहीं है. क्योंकि यूएनो बैंक की पूरी जांच चल रही है. जिसमें 30 लाख लोगों का पैसा लौटाना उनकी बड़ी चुनौती होगी.
सैंटियागो पेना पर क्या आरोप लगे हैं
राष्ट्रपति पद से हटाए गए सैंटियागो पेना पर आरोप है कि उनका यूएनो बैंक से पुराना कारोबारी रिश्ता था. पेना ग्रुपो वाज़क्वेज नाम के उस समूह के शेयरधारक थे, जिसका यूएनो बैंक पर नियंत्रण माना जाता था. सैंटियागो पेना ने दावा किया था कि मार्च 2025 में उन्होंने सारे शेयर बेच दिए थे और बैंक के काम में उनका किसी तरह से कोई दखल नहीं था. लेकिन उन पर मौजूदा सांसदों ने आरोप लगाया है कि पेना ने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए सरकारी धन का बड़ा हिस्सा यूएनो बैंक में जमा कराया था. जांच में सामने आया कि बैंक में करीब 800 से 850 मिलियन डॉलर सरकारी और पेंशन संस्थाओं का पैसा जमा था, जिसमें सोशल सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट के पेंशन और हेल्थ फंड का पैसा भी शामिल था. एक आरोप यह भी था कि केंद्रीय बैंक ने बैंक के अंदरूनी कर्ज में भी गड़बड़ियों को नजर अंदाज किया था. फिलहाल ने बैंक के संस्थापक मिगुएल वाज़क्वेज समेत 27 लोगों पर विश्वासघात और धोखाधड़ी के प्रयास जैसे आरोप लगे हैं. जबकि 6 पूर्व निदेशकों को हिरासत में भेजा गया है.
ये वीडियो भी देखिए
क्यों अहम है पैराग्वे की यह घटना
पैराग्वे की यह घटना अहम मानी जा रही है. 1989 में इस देश में लोकतंत्र लौटा था, जिसके बाद से सैंटियागो पेना देश के ऐसे दूसरे राष्ट्रपति हैं, जिन्हें महाभियोग के जरिए हटा दिया गया है. ऐसे में यह घटना देश में बड़ी राजनीतिक उठापठक भी मानी जा रही है. क्योंकि इससे सरकार के बॉन्ड की कीमतें गिर गई हैं और देश की मुद्रा गुआरानी की कीमत करीब 5 प्रतिशत तक टूट गई है. वहीं इस घटना पर अमेरिका का कहना है कि पैराग्वे के साथ उनके द्विपक्षीय संबंध बने रहेंगे. खास बात यह है कि पेना को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का करीबी भी माना जाता है, लेकिन फिलहाल वह सत्ता से बाहर हो गए हैं. राजनीतिक जानकारों मानना है कि भले ही पेना पद से हट गए हैं. लेकिन पैराग्वे में राजनीतिक संकट फिलहाल खत्म नहीं हुआ है. क्योंकि नए राष्ट्रपति अलियाना के सामने भी कई तरह की चुनौतियां रहेगी.
ये भी पढे़ंः अगर मैं ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से नहीं रोकता, तो इजरायल का वजूद नहीं होता: डोनाल्ड ट्रंप
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं