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पाकिस्तान में बहुमत नहीं, सेना के टुकड़ों पर पल रही सरकार, कोरम पूरा करने लायक सांसद भी नहीं जुटा पाए शहबाज

PPP शहबाज सरकार को संख्याबल से सरकार में बने रहने में सपोर्ट करने है लेकिन उसके हाल में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) के चुनावों में कथित धांधली के विरोध में सदन की कार्यवाही से दूरी बनाए रखी.

पाकिस्तान में बहुमत नहीं, सेना के टुकड़ों पर पल रही सरकार, कोरम पूरा करने लायक सांसद भी नहीं जुटा पाए शहबाज
पाकिस्तान में शहबाज सरकार मुशकिल में दिख रही है (फोटो- AFP)
  • पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार संसद में आवश्यक कोरम भी पूरा करने में असमर्थ हो गई है
  • पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने PoK चुनावों में कथित धांधली के विरोध में सदन की कार्यवाही से दूरी बनाई है
  • शहबाज सरकार को सत्ता में बने रहने के लिए पीपीपी के समर्थन की जरूरत है, पर वह विपक्षी की तरह व्यवहार कर रही है

पाकिस्तान में शहबाज शरीफ सरकार की हालत खराब है, जनता का भरोसा न्यूनतम स्तर पर है, लोकतंत्र का दिखावा करने की कोशिश भी छोड़ दी गई है. यह सरकार बहुमत तो दूर, संसद में कोरम पूरा करने लायक भी सांसद जुटा नहीं कर पा रही है. शहबाज की सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज यानी PML-N को सोमवार, 24 अगस्त को नेशनल असेंबली में बड़ा झटका लगा. निचले सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद रोकनी पड़ी, क्योंकि सदन में जरूरी संख्या में सांसद मौजूद नहीं थे.

वजह है कि शहबाज की पार्टी की सहयोगी रही पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी यानी PPP ने हाल में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में हुए चुनावों में कथित धांधली के विरोध में सदन की कार्यवाही से दूरी बनाए रखी. PPP बिलावल भुट्टो की पार्टी है. लोकतंत्र का तकाजा तो यही है कि शहबाज सरकार PPP के सपोर्ट से ही सत्ता में बनी रहे. लेकिन अभी पाकिस्तान में PPP ही विरोधी पार्टी की तरह व्यवहार कर रही है और शहबाज सरकार पाक सेना के सपोर्ट पर चल रही है.

84 सांसद नहीं जुटा पाए शहबाज 

पाकिस्तान अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार 336 सदस्यों वाली नेशनल असेंबली में सरकार जरूरी 84 सांसदों की संख्या नहीं जुटा पाई. इमरान खान की विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के एक सांसद ने जब सदन में जरूरी संख्या पूरी न होने यानी कोरम पूरा न होने की बात उठाई, तो अध्यक्ष को बिना कोई एजेंडा उठाए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

रिपोर्ट के अनुसार कार्यवाही स्थगित होने के तुरंत बाद पीपीपी की शर्मिला फारूकी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक अकाउंट से लिखा, “पीपीपी नहीं है, तो कोरम नहीं है, बस.”

बाद में शर्मिला फारूकी ने डॉन से कहा कि पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी पहले ही साफ कर चुके हैं कि जब तक PoK चुनावों में कथित धांधली और मिसमैनेजमेंट को लेकर उनकी शिकायतों का समाधान नहीं होता, तब तक पार्टी संसद में कोरम पूरा कराने और कानून बनाने के मामलों में PML-N का आगे सहयोग नहीं करेगी.

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