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This Article is From Sep 01, 2025

इतिहास के बड़े बाढ़ संकट से जूझ रहा पाकिस्तान का पंजाब प्रांत, 20 लाख लोगों पर आफत

पंजाब प्रांत की वरिष्ठ मंत्री मरियम औरंगजेब ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'यह पंजाब के इतिहास की सबसे बड़ी बाढ़ है. करीब 20 लाख लोग प्रभावित हुए हैं.

इतिहास के बड़े बाढ़ संकट से जूझ रहा पाकिस्तान का पंजाब प्रांत, 20 लाख लोगों पर आफत
  • पाकिस्तान के पूर्वी पंजाब प्रांत में नदियों का जलस्तर सबसे भयानक बाढ़ के कारण उच्च स्तर पर पहुंच गया है.
  • बाढ़ से लगभग 20 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. प्रशासन स्कूलोंऔर पुलिस-स्टेशनों को राहत शिविरों में बदल रहा है.
  • मुल्तान में बांधों को तोड़ने के लिए विस्फोटक लगाए गए हैं. लोगों को राहत शिविरों में जाने को कहा गया है.

पाकिस्तान का पूर्वी पंजाब प्रांत इन दिनों अपनी इतिहास की सबसे बड़ी बाढ़ से जूझ रहा है. नदियों का जलस्तर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. एक स्‍टडी बताती है कि इस साल पाकिस्तान में ग्लोबल वार्मिंग की वजह से माॅनसून की बारिश और ज्यादा तेज हुई है. पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश और बादल फटने से अचानक बाढ़ और भूस्खलन हुए. पूर्वी पंजाब में सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश हुई और हालात और बिगड़ गए, जब भारत ने अपनी भरी हुई नदियों और बाँधों से पानी छोड़ा, जो पाकिस्तान के निचले इलाकों में घुस गया.

इतिहास की सबसे भयानक बाढ़

पंजाब प्रांत की वरिष्ठ मंत्री मरियम औरंगजेब ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'यह पंजाब के इतिहास की सबसे बड़ी बाढ़ है. करीब 20 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. पहली बार ऐसा हुआ है कि तीनों नदियां- सतलुज, चिनाब और रावी, इतने ऊंचे स्तर पर बह रही हैं.' उन्होंने बताया कि प्रशासन लोगों को निकाल रहा है और स्कूलों, पुलिस-स्टेशनों और सुरक्षा ठिकानों को राहत शिविरों में बदला जा रहा है. टीवी चैनलों पर लोग नावों में बैठकर डूबे खेतों से गुजरते दिखे, तो कहीं लोग टूटे घरों से सामान बचाकर नाव में भरते नजर आए.

भारत ने दी थी पहले ही चेतावनी

मरियम औरंगजेब ने कहा कि विदेश मंत्रालय यह डेटा इकट्ठा कर रहा है कि भारत ने जानबूझकर पानी छोड़ा या नहीं. भारत की ओर से इस पर कोई बयान नहीं आया है. हालांकि, पिछले हफ्ते भारत ने पाकिस्तान को संभावित बाढ़ की चेतावनी दी थी. यह दोनों देशों के बीच मई के युद्ध जैसे हालात के बाद पहली सीधी राजनयिक बातचीत थी.

इकोनॉमी में पंजाब का अहम रोल

पंजाब प्रांत में करीब 15 करोड़ लोग रहते हैं. यह इलाका पाकिस्तान की खेती-किसानी का मुख्य केंद्र है और गेहूं उत्पादन का सबसे बड़ा जरिया है. 2022 की बाढ़ ने यहां फसलें तबाह कर दी थीं, जिसके बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को खाद्य संकट की चेतावनी देनी पड़ी थी. इस बार भी मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 1 जुलाई से 27 अगस्त के बीच पंजाब में पिछले साल से 26.5% ज्यादा बारिश हुई है.

प्रशासन की क्‍या है तैयारी

मुल्तान में अधिकारियों ने पांच जगहों पर बांध तोड़ने के लिए विस्फोटक लगा दिए हैं ताकि पानी को शहर से दूर मोड़ा जा सके. ड्रोन से निचले इलाकों की निगरानी हो रही है और लोगों से कहा जा रहा है कि वे राहत शिविरों में चले जाएं. मुल्तान के डिप्टी कमिश्नर ने कहा-'पानी इतनी बड़ी मात्रा में आ रहा है कि हम न उसे रोक सकते हैं, न उससे लड़ सकते हैं. लोग तुरंत सुरक्षित शिविरों में पहुंचें.'

लोगों की हालत

स्थानीय निवासी ईमान फातिमा ने बताया, 'हमारे जानवर भूखे हैं, हमें भी खाने को कुछ नहीं मिल रहा. हमारी मर्जी से हम यहां नहीं बैठे, हमारे घर डूबने के खतरे में हैं. हम बहुत परेशान हैं.' आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 26 जून से अब तक बारिश से जुड़ी घटनाओं में पूरे पाकिस्तान में 849 लोगों की मौत और 1,130 लोग घायल हुए हैं.

'सुपर फ्लड' की आशंका

सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने कहा कि सिंचाई विभाग को "सुपर फ्लड" के लिए तैयार रहने को कहा गया है. उन्होंने बताया, 'जब पानी का स्तर 9 लाख क्यूसेक से ऊपर जाता है तो हम उसे सुपर फ्लड कहते हैं. उम्मीद है कि पानी इतना नहीं बढ़ेगा, लेकिन हमें तैयार रहना होगा. हमारी पहली प्राथमिकता है इंसानों और पशुओं की जान बचाना.' बता दें कि पाकिस्तान का माॅनसून सीजन आमतौर पर सितंबर के आखिर तक चलता है.

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