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This Article is From Oct 11, 2011

जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा नहीं : पाक

संयुक्त राष्ट्र: भारत के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी में पाकिस्तान ने मंगलवार को दावा किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का कभी भी अभिन्न हिस्सा नहीं रहा और कश्मीरी लोगों की इच्छा जानने के लिए संयुक्त राष्ट्र की अगुवाई में जनमत संग्रह की मांग की। पाकिस्तान के बयान से गुस्साए भारत ने इसे गैरजरूरी बताया। संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक चर्चा के दौरान पाकिस्तान के स्थायी मिशन के राजनयिक ताहिर हुसैन अंद्राबी ने कहा, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा नहीं है और यह कभी था भी नहीं। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के उप स्थायी प्रतिनिधि रजा बशीर तरार ने कहा, दक्षिण एशिया में जम्मू-कश्मीर के लोगों के खुद फैसला करने के अनन्य अधिकार को सुरक्षा परिषद के कई प्रस्तावों में स्वीकार किया गया है। उपनिवेश खत्म करने का संयुक्त राष्ट्र का एजेंडा जम्मू-कश्मीर विवाद के निपटारे के बिना अधूरा है। बहरहाल, उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर विवाद के शांतिपूर्ण हल के लिए प्रतिबद्ध है जिससे दक्षिण एशिया में चिर शांति और स्थिरता आएगी। पाकिस्तान के वक्तव्य के जवाब में भारतीय राजनयिक आर रविंद्रन (प्रथम सचिव) ने कहा कि जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तानी अधिकारी का दिया बयान गैरजरूरी है और समिति के काम में बिल्कुल अप्रासंगिक है। भारतीय राजनयिक आर रविंद्रन ने कहा, मैं पाकिस्तान के सम्मानित प्रतिनिधि को यह याद दिलाना चाहूंगा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। भारतीय संविधान अपने सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार देता है। नियमित अंतराल पर होने वाले स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों में भाग लेकर जम्मू कश्मीर के लोगों ने अपनी इच्छा जाहिर की है। अंद्राबी ने कहा कि भारतीय राजनयिक ने अपनी प्रतिक्रिया में कुछ अतर्कसंगत दावे किए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद के कई प्रस्ताव हैं जिसमें जम्मू कश्मीर को विवादित क्षेत्र माना गया है। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों में कहा गया कि जम्मू कश्मीर का अंतिम हल संयुक्त राष्ट्र की मौजूदगी में लोगों द्वारा स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह के मुताबिक होगा। अंद्राबी ने कहा कि इन प्रस्तावों में साफ तौर पर कहा गया है कि जम्मू कश्मीर में भारत द्वारा कराए जाने वाला कोई भी चुनाव संयुक्त राष्ट्र की मौजूदगी में होने वाले स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह का स्थान नहीं ले सकते। पाकिस्तानी राजनयिक ने कहा, सुरक्षा परिषद के कई प्रस्तावों में जम्मू कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को स्वीकार किया गया । पिछले 63 सालों से जम्मू कश्मीर के लोगों को आत्मनिर्णय से रोकना हमारी चर्चा में बहुत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर पर सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव भारत और पाकिस्तान दोनों पर बाध्यकारी है।

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