पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के हालिया बयानों ने देश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. नकवी ने पहले पाकिस्तान की शासन व्यवस्था को 'पूरी तरह ध्वस्त' बताया और फिर ऐसे संकेत दिए जिनसे सत्ता प्रतिष्ठान, नौकरशाही और राजनीतिक वर्ग के भीतर बेचैनी बढ़ गई है.
विपक्षी नेताओं से लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के वरिष्ठ चेहरों तक, लगभग हर तरफ से उनके बयानों पर प्रतिक्रिया सामने आई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था के लिए वास्तव में 'टिक-टॉक' शुरू हो चुका है? क्या आर्मी एक बार फिर पाकिस्तान के सत्ता की कमान अपने हाथों में ले ली.
सिस्टम फेल हो चुका है- नकवी का दावा
30 जुलाई को पाकिस्तान इकोनॉमिक समिट में बोलते हुए मोहसिन नकवी ने कहा कि पाकिस्तान जिस प्रशासनिक ढांचे के तहत चल रहा है, वह अब देश की समस्याओं का समाधान करने में सक्षम नहीं है.
उन्होंने कहा, "हम जिस सिस्टम में रह रहे हैं, वह ध्वस्त हो चुका है. इसके जरिए समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता."
नकवी ने नए प्रशासनिक यूनिट्स बनाने और व्यापक संस्थागत सुधारों की वकालत करते हुए कहा कि यदि बुनियादी बदलाव नहीं किए गए, तो देश अगले दस वर्षों तक उन्हीं चुनौतियों में फंसा रहेगा.
'टिक-टॉक' संदेश क्या है?
नकवी के आलोचकों और राजनीतिक विरोधियों का मानना है कि उनके बयान केवल प्रशासनिक सुधारों तक सीमित नहीं हैं. इसी बीच सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में एक तीखा संदेश चर्चा में है.
बिलावल भुट्टो."ने कहा कि "PML-N में मौजूद मेरे दोस्तों के लिए बस एक छोटा सा संदेश है: जो आवाज़ आप सुन सकते हैं, उसे ध्यान से सुनें. टिक-टॉक, टिक-टॉक, आपकी उल्टी गिनती शुरू हो गई है इस तरह के राजनीतिक संदेशों ने अटकलों को और तेज कर दिया है कि पाकिस्तान के सत्ता ढांचे में किसी बड़े पुनर्गठन या टकराव की भूमिका तैयार हो रही है.
राणा सनाउल्लाह ने किया किनारा
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के राजनीतिक मामलों के सलाहकार और PML-N के वरिष्ठ नेता राणा सनाउल्लाह ने मोहसिन नकवी की टिप्पणियों से लगभग दूरी बना ली. जियो न्यूज़ से बातचीत में उन्होंने कहा कि नकवी की बातें उनकी 'व्यक्तिगत राय' हैं और वह खुद ही बेहतर तरीके से समझा सकते हैं कि उनका मतलब क्या था.
सनाउल्लाह ने कहा, "मैंने उनका भाषण सुना, लेकिन मैं समझ नहीं पाया कि वह आखिर कहना क्या चाहते थे. ऐसा लगा कि वह कोई बड़ी बात कहना चाहते थे लेकिन उसे स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं कर पाए."
क्या किसी बड़े बदलाव का संकेत?
मोहसिन नकवी के बयान ऐसे समय आए हैं जब पाकिस्तान आर्थिक संकट, राजनीतिक ध्रुवीकरण और प्रशासनिक अक्षमताओं की चुनौतियों से जूझ रहा है. नकवी की ओर से बार-बार सिस्टम की विफलता और संरचनात्मक सुधारों की बात किए जाने को कई राजनीतिक पर्यवेक्षक सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर चल रही बहस का संकेत मान रहे हैं.
हालांकि सरकार के वरिष्ठ सदस्य सार्वजनिक तौर पर नकवी के बयानों से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि गृह मंत्री की टिप्पणियों ने पाकिस्तान की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है.
नकवी को पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिम मुनीर का करीबी रिश्ते बताया जाता है. पाकिस्तान मामलों के जानकारों का मानना है कि नकवी के ऐसे बयान का मतलब है कि वह अपना कद बड़ा करना चाहते हैं या तो मुनीर की शह पर ऐसे बयान दे रहे हैं ताकि सत्ता की कमान सेना के हाथों में आ जाए. नए प्रशासनिक यूनिट और प्रांत बनाने की बात भी इसी प्लान के तहत कही जा रही है. वैसे भी सेना का दखल पाकिस्तान सरकार में पूरी तरह हो चुका है. शहबाज शरीफ सरकार एक कठपुतली की तरह काम कर रही है.
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