- मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी में वापसी देते हुए राष्ट्रीय संयोजक का महत्वपूर्ण पद सौंपा है
- आकाश आनंद को पहली बार मई 2024 में उत्तराधिकारी और राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया गया था
- मार्च 2025 में आकाश आनंद को सभी अहम पदों से हटाकर पार्टी से बाहर कर दिया गया था
बसपा सुप्रीमो मायावती और उनके भतीजे आकाश आनंद के रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं. मुख्यमंत्री के तौर पर सख्त प्रशासक की उनकी छवि थी, लेकिन अब परिवार और पार्टी के मुखिया के तौर पर वह कभी पिघल जाती हैं तो कभी सख्त रुख अपनाती हैं. अब मायावती ने एक बार फिर से भतीजे आकाश को 'माफ' कर दिया है और उन्हें पार्टी में वापसी दी है. इसके अलावा उनको पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक का अहम पद भी दे दिया है. आकाश आनंद को कभी एंट्री देकर खुला आसमान देना और फिर बाहर करके जमीन दिखाने का फैसला कई बार मायावती ने लिया है. लेकिन इस बार पार्टी से एकदम बाहर करने के बाद फिर एंट्री दी है तो यह मायने रखता है.
मायावती ने पहली बार भतीजे आकाश को उत्तराधिकारी और राष्ट्रीय संयोजक के पद से 7 मई 2024 को हटाया था. तब से अब तक आकाश आनंद को लेकर मायावती का यह 9वां यूटर्न है. बसपा चीफ ने पहली बार जब आकाश आनंद को जिम्मेदारी से हटाया था तो उनका कहना था कि अभी वह ऐसे अहम ओहदे के लिए परिपक्व नहीं हैं. करीब डेढ़ महीने बाद वह पिघलीं और आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बना दिया और उत्तराधिकारी भी घोषित किया गया. करीब 9 महीने तक सब सही चला और फिर मार्च 2025 में आकाश आनंद पर गाज गिरी. उन्हें सभी अहम पदों से हटा दिया गया और वह पार्टी से भी बाहर हुए. उनका कहना था कि ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आकाश आनंद अच्छे से काम नहीं कर रहे हैं.
बुआ के एक्शन पर दुखी आकाश आनंद ने सार्वजनिक माफी मांगी थी और फिर उनकी 13 अप्रैल, 2025 को वापसी हुई. फिर उन्हें मई में प्रमोशन भी मिला और वह मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक बनाए गए. अगस्त आते-आते मायावती उन पर और मेहरबान हुईं तो राष्ट्रीय संयोजक ही बना दिया गया. आकाश आनंद ने फिर लगभग एक साल तक काम किया और बसपा के लिए रैलियां करते नजर आए. भाजपा, सपा जैसे दलों पर वह हमलावर भी थे. इसी बीच उन पर 3 सितंबर को मायावती ने फिर से कार्रवाई कर दी. उन्हें मुख्य संयोजक के पद से हटा दिया गया. उनके भाई ईशान को प्रमोशन मिला और कहा गया कि आकाश अब सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर काम करेंगे.

आकाश आनंद की भावुक अपील का मायावती पर हुआ असर?
10 सितंबर तक रिश्ते और बिगड़े तो आकाश आनंद को पार्टी से ही बहनजी ने बाहर कर दिया. आकाश आनंद के साथ ही ससुर अशोक सिद्धार्थ भी निशाने पर आए. यहां तक कि अशोक सिद्धार्थ ने दामाद के राजनीतिक करियर के लिए अपने संन्यास तक का ऐलान कर दिया. फिर भी मायावती का गुस्सा शांत नहीं हुआ. फिर आकाश आनंद ने कुछ इंतजार के बाद एक भावुक अपील की. माना जा रहा है कि उसके बाद चीजें बदलीं और मायावती ने फिर से पिघलते हुए आकाश आनंद की वापसी का फैसला लिया है. अब देखना होगा कि बसपा के नीले आसमान में इस बार आकाश आनंद को कब तक और कितना मौका मिलता है.
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