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बलूचिस्तान की जमीन फिर खून से लाल, बड़े सैन्य ऑपरेशन में मेजर समेत 5 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत

बलूचों का मानना है कि बलूचिस्तान को 1947 के विभाजन के बाद उनकी मर्जी के खिलाफ पाकिस्तान में शामिल किया गया था. वे पाकिस्तान सरकार और मुख्य रूप से पंजाब क्षेत्र पर बलूचिस्तान के प्राकृतिक गैस और खनिजों जैसे संसाधनों के शोषण का आरोप लगाते हैं.

बलूचिस्तान की जमीन फिर खून से लाल, बड़े सैन्य ऑपरेशन में मेजर समेत 5 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत
Pakistan atrocity on Balochistan: पाकिस्तान सेना बलूचों पर अत्याचार के लिए जानी जाती है
  • बलूचिस्तान के बरखान जिले में कथित आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में पाकिस्तान सेना के मेजर समेत पांच सैनिकों की मौत
  • इस सैन्य कार्रवाई में सात कथित आतंकवादियों को मार गिराया गया और हथियार तथा विस्फोटक बरामद हुए
  • बलूचिस्तान में पहले चार महीनों में कई बड़े सैन्य क्लीन-अप ऑपरेशन किए गए जिनमें कई विद्रोही मारे गए
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बलूचिस्तान में कथित आतंकियों के खिलाफ चलाए गए एक बड़े सैन्य अभियान में पाकिस्तान सेना को भारी नुकसान हुआ है. सेना के मुताबिक ऑपरेशन के दौरान मेजर समेत पांच सैनिक मारे गए, जबकि कई आतंकियों को भी ढेर किया गया. पिछले कुछ महीनों से बलूचिस्तान में लगातार सैन्य कार्रवाई चल रही है, जहां सुरक्षा बलों और विद्रोहियों के बीच संघर्ष तेज होता जा रहा है. इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान में सुरक्षा हालात को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

पाकिस्तान सेना की मीडिया वींग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस यानी आईएसपीआर के अनुसार, बलूचिस्तान के बरखान जिले में कथित आतंकियों के खिलाफ चलाए गए एक ऑपरेशन में मेजर समेत पांच पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. आईएसपीआर ने बुधवार देर रात जारी बयान में कहा कि इस कार्रवाई में कम से कम सात आतंकवादी भी मारे गए.

पाकिस्तान सेना और बलूचिस्तान फ्रंटियर कोर ने संयुक्त रूप से यह क्लीन-अप ऑपरेशन बरखान के नोशाम इलाके में चलाया. आईएसपीआर के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान सात आतंकियों का सामना हुआ और उन्हें मार गिराया गया. लेकिन इसी दौरान एक फील्ड अधिकारी समेत पांच सैनिकों की भी मौत हो गई. मारे गए कथित के पास से हथियार, गोलाबारूद और विस्फोटक बरामद किए गए.

इस साल के पहले चार महीनों में सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान में कई बड़े क्लीन-अप ऑपरेशन चलाए हैं. मार्च में हरनाई और बसीमा जिलों में कम से कम 15 विद्रोही मारे गए थे. वहीं फरवरी में झोब इलाके में हुए एक ऑपरेशन में 10 विद्रोही ढेर किए गए थे.

यहां ध्यान रखना जरूरी है कि पाकिस्तान का बलूचिस्तान लंबे समय से कम स्तर के विद्रोह और हिंसा का सामना कर रहा है. यहां विद्रोही अक्सर सुरक्षा बलों और सरकारी ढांचे को निशाना बनाते रहते हैं. बलूचों का मानना है कि बलूचिस्तान को 1947 के विभाजन के बाद उनकी मर्जी के खिलाफ पाकिस्तान में शामिल किया गया था. वे पाकिस्तान सरकार और मुख्य रूप से पंजाब क्षेत्र पर बलूचिस्तान के प्राकृतिक गैस और खनिजों जैसे संसाधनों के कथित शोषण का आरोप लगाते हैं. यह समूह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और ग्वादर पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स का कड़ा विरोध करता है. BLA इसे संसाधनों की लूट और बलूच संप्रभुता के लिए खतरा मानता है.

पाकिस्तान सरकार इन हमलों के लिए बलोच लिबरेशन आर्मी और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराती है.

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