- ऑपरेशन सिंदूर में ध्वस्त हुए जैश के आतंकी अड्डे का पुनर्निर्माण किया गया है.
- 15 महीने बाद आईं तस्वीरों से यह साफ हुआ है कि बहावलपुर में बिल्डिंग फिर से बनी है.
- ऑपरेशन सिंदूर में इस इमारत को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया था.
भारत की तरफ से चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' में जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित मुख्यालय 'मरकज सुभान अल्लाह' को धवस्त कर दिया गया था. लेकिन हालिया तस्वीरों से सनसनीखेज खुलासा हुआ है, नई तस्वीरों के मुताबिक इस बिल्डिंग का 15 महीने बाद फिर से पुनर्निर्माण किया गया है. ऑपरेशन सिंदूर में इस आतंकी ठिकाने को नेस्तनाबूद कर दिया था. लेकिन हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों और खुफिया रिपोर्टों से यह जानकारी सामने आई है कि पाकिस्तान में इस इमारत को फिर से तैयार किया गया है. नई तस्वीरों में इमारत पूरी तरह से साफ नजर आ रही है.
बहावलपुर में बनी है यह इमारत
दरअसल, पाकिस्तान के एन-5 राष्ट्रीय राजमार्ग पर पंजाब प्रांत में करीब 100 किलोमीटर अंदर बहावलपुर में यह इमारत बनी हुई है. जिसे 'मरकज सुभान अल्लाह' कहा जाता है. इस परिसर की जो नई तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें तेजी से हो रहे निर्माण को साफ देखा जा सकता है. भारतीय हमले में ध्वस्त हुई मस्जिद के गुम्बदों पर नया प्लास्टर किया गया है, नई सीमेंट पुरानी इमारत से बिल्कुल अलग नजर आ रही है, परिसर के भीतर हलचल भी बढ़ गई है. जबकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद जो तस्वीरें सामने आई थी, उसमें यह बिल्डिंग बुरी तरह से टूट गई थी. तब की तस्वीरों में गुम्बदों पूरी तरह से टूटी हुई, परिसर में मलबा बिखरा हुआ दिखा था. लेकिन अब इसका पुनर्निर्माण हुआ है.
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क्या था ऑपरेशन सिंदूर?
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 6 और 7 मई 2025 की रात को 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था. इस सटीक अभियान में भारतीय वायुसेना ने सीमा पार करके 26 प्रक्षेपास्त्र दागे थे. जहां पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया था. जिनमें बहावलपुर में जैश और मुरीदके में लश्कर का मुख्यालय शामिल था. भारत के इस अभियान में 70 से अधिक आतंकी मारे गए और 60 से अधिक घायल हुए थे. हमले के बाद आई उच्च-गुणवत्ता वाली तस्वीरों में मरकज सुभान अल्लाह पूरी तरह खंडहर नजर आ रहा था. नुकसान इतना अधिक था कि मार्च-अप्रैल 2026 के बीच पूरे ढांचे को गिराकर नए सिरे से निर्माण शुरू किया गया था.
मसूद अजहर का परिवार हुआ था खत्म
हमले के बाद जैश प्रमुख मसूद अजहर ने खुद स्वीकार किया था कि बहावलपुर में उसके परिवार के 10 सदस्य और 4 करीबी सहयोगी मारे गए थे. जिनमें उसकी बड़ी बहन, बहनोई, भतीजा-भतीजी और 5 बच्चे शामिल थे. गुप्तचर जानकारी के अनुसार, जैश से जुड़े सामाजिक माध्यम के खातों ने अंकीय बटुए के माध्यम से बहावलपुर अड्डे के पुनर्निर्माण के लिए धन जुटाने का अभियान चलाया था. बता दें कि मसूद अजहर 1994 में भारत में गिरफ्तार और 1999 में विमान अपहरण कांड के दौरान रिहा हुआ था. 2001 संसद हमला, 2016 पठानकोट और 2019 पुलवामा हमले का सरगना है. वह संयुक्त राष्ट्र की तरफ से घोषित वैश्विक आतंकवादी है.
इस पुनर्निर्माण ने पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को फिर उजागर कर दिया है. भारतीय नेतृत्व और गुप्तचर संस्थाओं ने इस्लामाबाद पर आरोप लगाया है कि वह सरकारी खजाने और अंतरराष्ट्रीय सहायता की आड़ में जैश और लश्कर के आतंकी ढांचे को फिर से खड़ा कर रहा है. सूत्रों ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के ठीक बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की तरफ से स्वीकृत 1 अरब डॉलर की किश्त की ओर इशारा किया है.
भारत का स्पष्ट रुख
इस मामले में भारत का रुख स्पष्ट है. जब विकास के लिए विदेशी सहायता आती है, तो पाकिस्तान अपना बजट आतंक को पालने में लगा देता है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय राजनयिक खुलेआम कह चुके हैं कि पाकिस्तान करदाताओं का पैसा और वैश्विक सहायता अपनी जनता पर नहीं, बल्कि भारत की तरफ से ध्वस्त किए गए आतंकी अड्डों को फिर से बनाने पर खर्च कर रहा है.
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