
काठमांडू/नई दिल्ली:
जिस 7.9 तीव्रता के जबर्दस्त भूकंप ने शनिवार को नेपाल में भारी क्षति पहुंचाई और अब तक 4,347 लोग मारे जा चुके हैं, वहीं उसके केंद्र लामजुंग जिले में सिर्फ चार लोग मारे गए हैं। यह जानकारी एक शीर्ष अधिकारी ने मंगलवार को दी।
लामजुंग के मुख्य जिलाधिकारी श्रवण कुमार तिमिलसिना ने फोन पर बताया, 'चूंकि सुबह भूकंप आया था, लिहाजा लोग घरों से बाहर थे। अब तक चार लोगों के मारे जाने की खबर है और करीब 25 लोग घायल हुए हैं।' उन्होंने कहा, 'हमारे यहां ज्यादा लोग हताहत नहीं हुए हैं, लेकिन संपत्तियों को गंभीर नुकसान हुआ है।'
उन्होंने बताया कि 3,000 से अधिक मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं। लामजुंग हिमालय के बर्फीले इलाके से घिरा हुआ जिला है, जहां जनघनत्व कम है। उन्होंने बताया, 'जिले में 3,243 मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं।' इनमें से ज्यादातर कच्चे मकान थे और पत्थरों से बनाए गए थे।
तिमिलसिना ने कहा, 'जिले में करीब 4,000 मकानों में दरारें पड़ गई हैं और वे रहने लायक नहीं है।' उन्हें जिले के दूरवर्ती गांवों में गंभीर नुकसान का डर है, काठमांडू से लामजुंग पहुंचने में पांच घंटे का समय लगता है। अधिकारी के अनुसार, जिला कृषि प्रधान है और यहां की जनसंख्या 1,67,000 है।
तिमिलसिना ने बताया कि पांच सर्वाधिक प्रभावित गांवों के करीब 95 फीसदी मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।
जबर्दस्त भूकंप और बाद में आए कई झटकों के बाद लोग अपने घरों में जाने से डर रहे हैं। लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण उन्हें बाहर रहने में भी दिक्कत हो रही है।
तिमिलसिना ने बताया कि अधिकारी और सेना गांव वालों की मदद कर रहे हैं, लेकिन कुछ गांवों में खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ती जा रही है, और उनके लिए अभी और किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'हमारे पास शामियाने की कमी है। हमें तत्काल 4,000 शामियानों की जरूरत है।'
तिमिलसिना ने बताया कि अधिकारी लोगों की मदद के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन खराब मौसम ने चुनौतियां पेश की हैं और भूकंप के बाद से खुले में सो रहे हैं।
लामजुंग के मुख्य जिलाधिकारी श्रवण कुमार तिमिलसिना ने फोन पर बताया, 'चूंकि सुबह भूकंप आया था, लिहाजा लोग घरों से बाहर थे। अब तक चार लोगों के मारे जाने की खबर है और करीब 25 लोग घायल हुए हैं।' उन्होंने कहा, 'हमारे यहां ज्यादा लोग हताहत नहीं हुए हैं, लेकिन संपत्तियों को गंभीर नुकसान हुआ है।'
उन्होंने बताया कि 3,000 से अधिक मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं। लामजुंग हिमालय के बर्फीले इलाके से घिरा हुआ जिला है, जहां जनघनत्व कम है। उन्होंने बताया, 'जिले में 3,243 मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं।' इनमें से ज्यादातर कच्चे मकान थे और पत्थरों से बनाए गए थे।
तिमिलसिना ने कहा, 'जिले में करीब 4,000 मकानों में दरारें पड़ गई हैं और वे रहने लायक नहीं है।' उन्हें जिले के दूरवर्ती गांवों में गंभीर नुकसान का डर है, काठमांडू से लामजुंग पहुंचने में पांच घंटे का समय लगता है। अधिकारी के अनुसार, जिला कृषि प्रधान है और यहां की जनसंख्या 1,67,000 है।
तिमिलसिना ने बताया कि पांच सर्वाधिक प्रभावित गांवों के करीब 95 फीसदी मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।
जबर्दस्त भूकंप और बाद में आए कई झटकों के बाद लोग अपने घरों में जाने से डर रहे हैं। लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण उन्हें बाहर रहने में भी दिक्कत हो रही है।
तिमिलसिना ने बताया कि अधिकारी और सेना गांव वालों की मदद कर रहे हैं, लेकिन कुछ गांवों में खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ती जा रही है, और उनके लिए अभी और किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'हमारे पास शामियाने की कमी है। हमें तत्काल 4,000 शामियानों की जरूरत है।'
तिमिलसिना ने बताया कि अधिकारी लोगों की मदद के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन खराब मौसम ने चुनौतियां पेश की हैं और भूकंप के बाद से खुले में सो रहे हैं।
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