सांप्रदायिक हिंसा की आग में जलते हुए नेपाल को हफ्तेभर से ज्यादा हो गया है. इस हिंसा में तीन लोगों की मौत हो चुकी है. दर्जनों लोग अब भी घायल हैं. 26 जुलाई से शुरू हुई हिंसा के बाद अभी भी कुछ जिलों में कर्फ्यू लगा हुआ है. नेपाल की हिंसा को देखते हुए बिहार से सटे सीमाई इलाकों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है.
नेपाल में सबसे पहले हिंसा सुनसरी जिले में भड़की थी. भीड़ को शांत करने के लिए पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और उसके बाद हिंसा और भी जिलों में फैल गई. बिहार से सटे कोशी और मधेश प्रांत भी हिंसा की आग में जल रहे हैं.
हिंसा भड़कने के चार दिन बाद 30 जुलाई को नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने एक बयान जारी कर दोनों पक्षों से शांति की अपील की थी.
नेपाल में कैसे भड़की हिंसा? इस हिंसा में अब तक क्या-क्या हुआ? हिंसा में किन-किनकी मौत हुई? और भारत में कैसी है सुरक्षा? जानते हैं.
नेपाल में क्या कुछ हुआ? 5 पॉइंट
कब भड़की हिंसा: 26 जुलाई की रात को तब हिंसा भड़की, जब कोशी प्रांत के सुनसरी जिले में दो समुदायों के लोग अलग-अलग प्रोग्राम कर रहे थे.
- कहां भड़की थी हिंसा: नेपाल में सबसे पहले हिंसा देवगंज के कप्तानगंज इलाके में भड़की थी. दो समुदायों के बीच कहासुनी हिंसा में बदल गई.
- कैसे भड़की थी हिंसा: दो अलग-अलग समुदायों के लोग अपना जुलूस निकाल रहे थे, तभी लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और धार्मिक झंडे फहराने को लेकर आपस में भिड़ गए थे.
- हिंसा में क्या हुआ: भीड़ को शांत करने के लिए पुलिस ने गोलीबारी की. इस गोलीबारी में 24 साल के ओम प्रकाश मेहता की मौत हो गई. अब तक तीन की मौत हो चुकी है.
- अभी कैसे हैं हालात: भारतीय सीमा से सटे कोशी और मधेश प्रांत में हालात तनावपूर्ण हैं. 4 जिलों- सप्तरी, सुनसरी, धनुषा और सिरहा में कर्फ्यू लगा है.
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हिंसा की पूरी वजह क्या रही?
सांप्रदायिक हिंसा की पूरी वजह धार्मिक जुलूस और तेज आवाज में डीजे बजाना रहा. न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सावन महीने में चलने वाले 'बोल बम उत्सव' के दौरान हिंदू श्रद्धालु कोशी बैराज से पवित्र जल लेकर कप्तानगंज चौक की ओर जा रहे थे. इस दौरान वे तेज आवाज में डीजे भी बजा रहे थे.
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पुलिस ने बताया कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने तेज आवाज में बज रहे संगीत पर आपत्ति जताई. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई. देखते ही देखते विवाद बढ़ गया, पहले धक्का-मुक्की हुई और फिर हालात हिंसक हो गए.
हालात को काबू में लाने के लिए पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें ओम प्रकाश मेहता की मौत हो गई. इस घटना के बाद मधेश के अन्य इलाकों खासकर सिराहा जिले में भी विरोध प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं सामने आने लगीं.
हिंसा में किनकी-किनकी मौतें?
इस हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है. पुलिस की गोलीबारी में ओम प्रकाश मेहता नाम के युवक की मौत हो गई थी.
इसके बाद जय प्रकाश मेहता की भी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई, जो सांप्रदायिक हिंसा में गंभीर रूप से घायल हो गए थे. वहीं, सिरहा जिले के गोलबाजार के पास 15 साल के गणेश यादव को भी गंभीर चोटें आई थीं और उसकी भी इलाज के दौरान मौत हो गई.
नेपाल की सरकार ने क्या किया?
हालात को काबू में लाने के लिए नेपाल के कई जिलों में कर्फ्यू लगाया गया है. इसके तहत 5 या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने, प्रदर्शन, धरना, सार्वजनिक सभा या बैठक करने पर रोक लगाई गई है.
नेपाल के कोशी और मधेश प्रांतों में बीते एक सप्ताह से जारी सांप्रदायिक हिंसा, मरने वालों की संख्या बढ़कर तीन हुई.#Nepal | @DeoSikta pic.twitter.com/UccHp0mwTK
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30 जुलाई को नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सरकार हालिया हिंसा की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करेगी और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराएगी,
बालेन शाह ने लोगों से अपील की कि वे सोशल मीडिया या अन्य मंचों के जरिये अफवाहें, गलत जानकारी या नफरत फैलाने वाली बातें न प्रसारित करें.
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भारत में क्या पड़ रहा असर?
जिस सुनसरी में सबसे पहले हिंसा भड़की थी, उसकी बिहार के साथ सीमा लगती है. दोनों देशों के बीच यह एक जरूरी ट्रांजिट और कमर्शियल कॉरिडोर है.
नेपाल की सांप्रदायिक हिंसा और कर्फ्यू का असर भारत-नेपाल सीमा पर भी देखने को मिल रहा है. बिहार के सीतामढ़ी जिले की विभिन्न सीमाओं, खासकर मिठ्ठामोड़ सीमा से नेपाल जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जनकपुर धाम में माता जानकी के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु सीमा पर ही रुकने को मजबूर हैं, जबकि स्थानीय व्यापारियों और वाहन चालकों की रोजी-रोटी पर भी संकट गहरा गया है. सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती और नेपाल में तनावपूर्ण माहौल के कारण लोग फिलहाल यात्रा करने से भी बच रहे हैं.
गोरखपुर से आए श्रद्धालु राकेश कुमार ने कहा, 'हम लोग माता सीता के दर्शन के लिए जनकपुर धाम पहुंचे थे, लेकिन सीमा पर रोक के कारण आगे नहीं जा सके. काफी दूर से श्रद्धा लेकर आए हैं, उम्मीद है हालात जल्द सामान्य होंगे ताकि दर्शन कर सकें.'
मिठ्ठामोड़ सीमा के एक स्थानीय दुकानदार ने कहा, 'सीमा पर आवाजाही लगभग ठप हो गई है. ग्राहक नहीं आने से दुकानदारी चौपट हो गई है. रोज कमाने-खाने वालों के सामने परिवार चलाने की चिंता खड़ी हो गई है.'
वहीं एक टेंपो चालक ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, 'हमारी पूरी कमाई सीमा पार आने-जाने वाले यात्रियों पर निर्भर रहती है. कई दिनों से सवारी नहीं मिल रही है. गाड़ी खड़ी है और घर चलाना मुश्किल हो गया है.'
हिंसा और कर्फ्यू को देखते हुए बिहार के मधुबनी जिले में भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. आधिकारिक बयान के अनुसार, एहतियात के तौर पर बिहार के मधुबनी जिले में पुलिस ने शांति बनाए रखने और सीमा पर किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ाई है.
(सीतामढ़ी से रंजीत कुमार के इनपुट के साथ)
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