- नेपाल सरकार ने भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए ब्रिटेन से मध्यस्थता करने की मांग नहीं की है- बालेन शाह
- पिछले महीने बालेन ने संसद में ही कहा था कि नेपाल ने अलग-अलग जगहों पर भारतीय क्षेत्रों पर अतिक्रमण किया है
- उनके इस बयान के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया था, भारत ने भी आपत्ति जताई थी
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने रविवार, 21 जून को साफ किया कि नेपाल सरकार ने भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए ब्रिटेन से मध्यस्थता (बीच-बचाव) करने की मांग नहीं की है. उन्होंने चितवन जिले में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के पहले महाधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा, "हमने कहा था कि अगर ब्रिटिश शासन के समय (भारत में) के सबूतों की जरूरत होगी, तो हम उन्हें लेकर आएंगे. हमने उनसे मध्यस्थता करने के लिए नहीं कहा था."
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कुछ दिन पहले विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में कहा था कि नेपाल और भारत के बीच सीमा से जुड़े मुद्दे को एक संयुक्त कार्य समूह देखेगा. इससे पहले पिछले महीने बलेंद्र शाह ने संसद में ही कहा था कि नेपाल ने अलग-अलग जगहों पर भारतीय क्षेत्रों पर अतिक्रमण किया है और इस मुद्दे को सुलझाने के लिए हिमालयी देश नेपाल ने चीन और ब्रिटेन को भी शामिल किया है. उनके इस बयान के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया था.
भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद
नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है. दोनों देश इन क्षेत्रों पर अपना दावा करते हैं. भारत का कहना है कि ये इलाके उत्तराखंड का हिस्सा हैं और इस मुद्दे का समाधान दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत से होना चाहिए. बालेन शाह ने अपने विरोधियों से कहा कि सीमा विवाद पर उनके बयानों को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है.
प्रधानमंत्री ने रविवार को कहा, "हम अपने पड़ोसी देश के साथ बातचीत करके इस मुद्दे का समाधान करेंगे. इसे लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है." उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि "उनकी राष्ट्रभक्ति और देश के प्रति प्रतिबद्धता पर शक न करें." उन्होंने जोर देकर कहा, "किसी को भी इस पर संदेह नहीं करना चाहिए."
शाह ने दावा किया, "हमारे पास इस बात के सबूत हैं कि कालापानी और लिपुलेख हमारे क्षेत्र का हिस्सा हैं. अगर उनके (भारत) पास भी सबूत हैं, तो वे भी दिखा सकते हैं." बता दें कि राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) का पहला महाधिवेशन रविवार को चितवन जिले के भरतपुर महानगर में शुरू हुआ.
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