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This Article is From Sep 10, 2025

BHU से पढ़ाई, करप्शन पर सख्त... जानिए कौन हैं सुशीला कार्की, जिन्होंने संभाली नेपाल की कमान

7 जून, 1952 को विराटनगर में जन्मी सुशीला कार्की नेपाल की अंतरिम सरकार की प्रमुख बन गई हैं. उन्होंने राष्ट्रपति भवन में शपथ ली. सुशीला कार्की ने वकालत और कानूनी सुधार के क्षेत्र में अपना करियर शुरू करने से पहले BHU से पॉलिटिकल साइंस की डिग्री हासिल की है.

नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायधीश सुशीला कार्की.
  • नेपाल में Gen-Z आंदोलन के बाद देश की पूर्व शासन व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है.
  • नेपाल की व्यवस्था संभालने के लिए अंतरिम कार्यकारिणी बनेगी, जिसमें सुशीला कार्की को हेड के रूप चुना गया है.
  • सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायधीश हैं. उन्होंने बीएचयू से पढ़ाई की है.
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Nepal Interim Govt: नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायधीश सुशीला कार्की देश की अंतरिम सरकार की प्रमुख बन गई हैं. राष्ट्रपति भवन में उन्हें शपथ दिलाई गई. उनके शपथ ग्रहण समारोह में काठमांडू के मेयर बालेन शाह सहित कई बड़े चेहरे मौजूद रहे. मालूम हो कि जेन-जड आंदोलन (Nepal Gen-Z Protest) के बाद बालेन शाह के नाम की चर्चा भी अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में चल रहा था. हालांकि उन्होंने खुद सुशीला कार्की का समर्थन किया. सुशीला कार्की के शपथ ग्रहण में उपराष्ट्रपति रामसहाय यादव, प्रधान न्यायाधीश प्रकाश सिंह रावत, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ बाबूराम भट्टराई, प्रधान सेनापति जनरल अशोक राज सिग्देल, मुख्य सचिव एकनारायण अर्याल सहित अन्य मौजूद रहे.

सुशीला कार्की का भारत से खास नाता रहा है. Gen-Z आंदोलन के बाद सुशीला कार्की के सामने नेपाल की मौजूदा स्थिति को संभालने की चुनौती होगी. हालांकि इससे पहले आईए जानते हैं कैसे सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का प्रमुख चुना गया. सुशीला कार्की हैं कौन?   

अब जानिए कौन हैं सुशीला कार्की

सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायधीश हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से राजनीति शास्त्र में मास्टर्स किया है. उन्होंने 1979 में वकालत में अपनी करियर शुरू किया था. वें 11 जुलाई 2016 से 6 जून 2017 तक नेपाल की मुख्य न्यायाधीश रहीं थीं.

सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ट्रांजिशनल जस्टिस और चुनावी विवादों से जुड़े मामलों की अध्यक्षता की. साथ ही लोकतंत्र के संरक्षक के तौर पर न्यायपालिका की भूमिका को मजबूत किया. 

करप्शन को बिल्कुश बर्दाश्त नहीं करने वाली छवि

हालांकि 2017 में उनके खिलाफ महाभियोग लाया गया था. तब सुशीला कार्की पर कार्यपालिका में हस्तक्षेप आरोप लगा था. जिसके बाद उन्हें सस्पेंड भी किया गया था. हालांकि सुशीला कार्की की पहचान एक ऐसे न्यायधीश के रूप में रही है जो भ्रष्टाचार को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करती है. वह 2006 में संवैधानिक मसौदा समिति की सदस्य भी रह चुकी हैं.

Gen-Z के विद्रोह के बाद बदलाव के दौर में नेपाल

नेपाल में Gen-Z के विद्रोह के बाद अब धीरे-धीरे हालात काबू में आ रहा है. नेपाल की पूर्व शासन व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है. देश की मौजूदा व्यवस्था को संभालने के लिए अंतरिम कार्यकारिणी की गठन की बात कही जा रही है. अंतरिम हेड के रूप में नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायधीश सुशीला कार्की (Sushila Karki) का नाम सबसे आगे चल रहा है. दरअसल नेपाल में जारी प्रदर्शनों के और केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को नेपाल का अंतरिम नेता चुनने की बात कही जा रही है.

वर्चुअल मीटिंग में Gen-Z ने सुशीला का चुना नेता

दरअसल बुधवार को प्रदर्शन के बीच Gen-Z आंदोलनकारियों ने एक वर्चुअल बैठक बुलाई थी. इस वर्चुअल मीटिंग में करीब 5 हजार से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया. इस वर्चुअल मीटिंग में सुशीला कार्की को अंतरिम हेड के रूप में चुना गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुशीला कार्की ने भी अंतरिम PM की जिम्मेदारी संभालने के लिए सहमति दे दी है.

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