- नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खानाल 5 जून से तीन दिन का आधिकारिक भारत दौरा शुरू करने वाले हैं
- शिशिर खानाल भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के निमंत्रण पर आए दिल्ली आए हैं
- नेपाल के विदेश मंत्री व्यापार, निवेश, संपर्क व्यवस्था, ऊर्जा और लोगों के बीच संबंधों पर औपचारिक बातचीत करेंगे
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खानाल शुक्रवार, 5 जून से अपना तीन दिन का आधिकारिक भारत दौरा शुरू करने वाले हैं. इस दौरे को भारत और नेपाल के रिश्तों में सुधार के लिए एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि दोनों देशों के संबंध काफी समय से ठंडे पड़े थे. शिशिर खानाल भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के निमंत्रण पर आए दिल्ली आए हैं. वे यहां व्यापार, निवेश, संपर्क व्यवस्था, ऊर्जा और लोगों के बीच संबंधों पर औपचारिक बातचीत करेंगे. यह दौरा एक नाजुक समय पर हुआ है.
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि भारत के विदेश सचिव नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से मुलाकात नहीं कर पाए थे, जिससे असहज स्थिति पैदा हुई और प्रस्तावित दौरा रद्द हो गया था. इससे दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ा था. हालांकि भारत सरकार ने इन सभी रिपोर्टों को गलत बताया. इसी बैकग्राउंड में शिशिर खानाल का यह दिल्ली दौरा बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे साफ संकेत मिलता है कि काठमांडू भारत के साथ फिर से अच्छे रिश्ते बनाना चाहता है और पुरानी दूरी खत्म करना चाहता है.
नेपाल की सत्ताधारी पार्टी के प्रमुख आए थे भारत
यह दौरा नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रमुख रवि लामिछाने की हाल की भारत यात्रा के बाद हुआ है. उन्हें नई दिल्ली में बड़े सम्मान के साथ स्वागत मिला था. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीब एक घंटे तक मुलाकात की थी. इस मुलाकात में सांस्कृतिक महत्व का एक तोहफा भी दिया गया. लामिछाने ने प्रधानमंत्री मोदी को काठमांडू के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर की मूर्ति भेंट की, जो हिंदू धर्म का एक बहुत पवित्र स्थान है.
मुलाकात के बाद रवि लामिछाने ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक घंटे की बातचीत बहुत अच्छी और उपयोगी रही. उन्होंने कहा कि वे भारत और नेपाल के रिश्तों को नए विकास के दौर में ले जाना चाहते हैं और पुराने मतभेद खत्म करना चाहते हैं.
नेपाल के विदेश मंत्री के दौरे से क्या उम्मीद
अब उम्मीद की जा रही है कि विदेश मंत्री शिशिर खानाल की यह यात्रा राजनीतिक अच्छे माहौल को ठोस समझौतों में बदल देगी. दोनों देश जलविद्युत, सीमा पार संपर्क और व्यापार जैसे क्षेत्रों की समीक्षा करेंगे, जहां पहले काम की गति धीमी हो गई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा दोनों देशों की जरूरतों के कारण रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक कदम है. नेपाल के लिए भारत के साथ स्थिर संबंध आर्थिक और रणनीतिक रूप से बहुत जरूरी हैं. वहीं भारत भी चाहता है कि वह नेपाल में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखे, खासकर जब चीन का प्रभाव वहां बढ़ रहा है.
नेपाल के सूत्रों के अनुसार इस दौरे में कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर भी हो सकते हैं. शिशिर खानाल शनिवार को काठमांडू लौट जाएंगे.
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