भारत और नेपाल के बीच पिछले कुछ सालों से चली आ रही तल्खी अब खत्म होने जा रहा है. नेपाल की नई सरकार ने भारत के साथ अपने रिश्तों को एक नए मुकाम पर ले जाने का मन बना लिया है. नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे हैं. खनाल का यह दौरा दोनों देशों के बीच ऊर्जा, डिजिटल सहयोग और कनेक्टिविटी के दम पर द्विपक्षीय संबंधों को एक नए व्यावहारिक धरातल पर लाने का एक बड़ा और निर्णायक कदम है.
विदेश मंत्री शिशिर खनाल यहां नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार का एक बेहद साफ और सीधा संदेश लेकर आए हैं. संदेश यह कि नेपाल अब अतीत के राजनीतिक गतिरोधों और पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़कर भारत के साथ आर्थिक तरक्की, आपसी विकास और ठोस नतीजों पर आधारित नए रिश्ते की शुरुआत करना चाहता है.
एनडीटीवी के सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर आदित्य राज कौल को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में विदेश मंत्री खनाल ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि जब भारत तेजी से आगे बढ़ रहा था, तब नेपाल ने राजनीतिक अस्थिरता के कारण विकास के कई सुनहरे मौके गंवा दिए.

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'जेन-जी' के गुस्से से उपजा नेपाल का नया राजनीतिक नेतृत्व
नेपाल के विदेश मंत्री का यह भारत दौरा वहां आई एक बहुत बड़ी राजनीतिक क्रांति की पृष्ठभूमि में हो रहा है. दरअसल, नेपाल में हाल ही में हुए चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) को जो प्रचंड बहुमत मिला है, उसके पीछे 'जेन-जी' यानी युवाओं का एक बड़ा आंदोलन था. यह आंदोलन भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और पारंपरिक राजनीति के ढर्रे के खिलाफ था. युवाओं ने सड़कों पर उतरकर जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग की थी.
शिशिर खनाल ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, "यह आंदोलन देश की पुरानी और पारंपरिक राजनीति से निराश हो चुके युवाओं के गुस्से का नतीजा था. उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त नेपाल और सरकार की जवाबदेही की मांग की थी."
खनाल ने बताया कि उनकी पार्टी के ज्यादातर नेता पारंपरिक राजनेता नहीं हैं, बल्कि पेशेवर और गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं. यही वजह है कि उनकी सरकार किसी पुरानी विचारधारा या अतीत के पूर्वाग्रहों के बोझ से पूरी तरह मुक्त है और सिर्फ देश के विकास और सुशासन पर ध्यान केंद्रित कर रही है.
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— NDTV (@ndtv) June 6, 2026
नेपाल ने माना- भारत की रफ्तार के सामने हम पिछड़े, अब सुधारेंगे गलती
इंटरव्यू के दौरान नेपाली विदेश मंत्री ने बेहद बेबाकी और कूटनीतिक ईमानदारी के साथ अपनी कमियों को स्वीकार किया. उन्होंने माना कि पिछले एक दशक में भारत ने जिस तेजी से आर्थिक विकास किया, नेपाल उस रफ्तार का फायदा उठाने में पूरी तरह नाकाम रहा.
इस आर्थिक सुस्ती की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि काठमांडू में लगातार बदलने वाली गठबंधन सरकारों और राजनीतिक अस्थिरता ने देश का भारी नुकसान किया. अक्सर घरेलू राजनीति की रोटियां सेकने के लिए अंतरराष्ट्रीय और भू-राजनीतिक मुद्दों का गलत इस्तेमाल किया गया. लेकिन अब आरएसपी की नई सरकार इस ढर्रे को बदलने के लिए प्रतिबद्ध है. खनाल ने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भावनाओं या घरेलू राजनीति के चश्मे से नहीं, बल्कि तथ्यों और ठोस सबूतों के आधार पर आगे बढ़ाएगी.
बिजली से लेकर आईआईटी कैंपस तक साझेदारी
नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठकों के एजेंडे को लेकर शिशिर खनाल ने पांच मुख्य प्राथमिकताओं का जिक्र किया. इसमें सबसे ऊपर एनर्जी सेक्टर है. नेपाल अपनी विशाल हाइड्रोपावर क्षमता का लाभ उठाना चाहता है. उन्होंने कहा कि भारत, नेपाल और बांग्लादेश के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता होने जा रहा है. इस समझौते से नेपाल की ग्रीन एनर्जी भारतीय ग्रिड और ट्रांसमिशन लाइनों के जरिए ढाका तक पहुंच सकेगी. इसका सफल पायलट टेस्ट भी किया जा चुका है.
प्रधानमंत्री बालेन शाह का भारत दौरा
शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को लेकर नेपाल ने एक बेहद महत्वाकांक्षी प्रस्ताव भारत के सामने रखा है. विदेश मंत्री खनाल ने बताया कि नेपाल में भारत के सहयोग से एक आईआईटी (IIT) या एम्स (AIIMS) कैंपस स्थापित करने का विचार है. अगर ऐसा होता है, तो यह दोनों देशों के बीच शैक्षणिक और तकनीकी सहयोग के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा और नेपाल के युवाओं को अपने ही देश में विश्व स्तरीय शिक्षा मिल सकेगी.
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के भारत दौरे को लेकर पूछे गए सवाल पर विदेश मंत्री ने पुष्टि की कि प्रधानमंत्री शाह को भारत आने का निमंत्रण मिल चुका है. हालांकि, अपनी अनूठी कार्यशैली और मीडिया से दूरी बनाए रखने के लिए मशहूर प्रधानमंत्री शाह फिलहाल पूरी तरह से अपने घरेलू एजेंडे और नेपाल के नए बजट को जमीन पर उतारने में व्यस्त हैं. खनाल ने कहा कि पीएम शाह जल्द से जल्द जनता को अच्छे नतीजे देना चाहते हैं, लेकिन उम्मीद है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर कूटनीतिक दौरे और बैठकें देखने को मिलेंगी.
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