विज्ञापन
This Article is From Feb 16, 2026

इधर रोजगार का वादा तो उधर हिंदू राष्ट्र बनाने का इरादा-नेपाल चुनाव में Gen Z नेताओं और पुराने धुरंधरों में जंग

Nepal Election 2026 Explained: नेपाल की 275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा के लिए 5 मार्च को चुनाव होंगे. जनता इनमें से केवल 165 सदस्यों का चुनाव करेगी. यहां जानिए पीएम की रेस में कौन-कौन शामिल है.

इधर रोजगार का वादा तो उधर हिंदू राष्ट्र बनाने का इरादा-नेपाल चुनाव में Gen Z नेताओं और पुराने धुरंधरों में जंग
Nepal Election 2026 Explained: नेपाल के आम चुनाव में 5 मार्च को वोट डाले जाएंगे
  • नेपाल में 5 मार्च को प्रतिनिधि सभा के 275 सदस्यों के लिए चुनाव होंगे, जिसमें 165 सीधे चुने जाएंगे
  • सितंबर 2025 के युवाओं के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के बाद यह पहला चुनाव है, जिसमें नई सरकार चुनी जाएगी
  • केपी ओली और पुष्प कमल दहल सहित पुराने नेता PM पद के प्रमुख उम्मीदवार हैं, युवा नेता बालेन शाह भी मैदान में

Nepal Election 2026: नेपाल में 5 मार्च को आम चुनाव के लिए वोटिंग होने जा रही है. यह चुनाव हर लिहाज से खास है. सबसे बड़ी वजह है कि यह सितंबर 2025 में हुए युवाओं के नेतृत्व वाले भ्रष्टाचार-विरोधी प्रदर्शनों के बाद हो रहा पहला चुनाव है. उन प्रदर्शनों को Gen-Z आंदोलन नाम दिया गया था, जिनमें केपी ओली के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी. अब बारी नए संसद के लिए सांसदों के चुनाव की है. नेपाल में आधिकारिक चुनाव प्रचार आज यानी सोमवार, 16 फरवरी से शुरू होगा. चलिए आपको इस एक्सप्लेनर में नेपाल चुनाव से जुड़ी हर जानकारी देते हैं.

नेपाल चुनाव 2026: कब और कितनी सीटों पर चुनाव है? 

नेपाल की 275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा (संसद का निचला सदन) के लिए 5 मार्च को चुनाव होंगे. जनता इनमें से केवल 165 सदस्यों का चुनाव करेगी. बाकी के 110 सांसद पार्टी सूची के जरिए चुने जाएंगे. यह चुनाव इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि कई युवा नेपाली इससे नए नेतृत्व की उम्मीद कर रहे हैं. बता दें कि सितंबर 2025 की अशांति के बाद नेपाल में 73 वर्षीय पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था. उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह थी कि वे 3 करोड़ की आबादी वाले इस हिमालयी देश को अगले चुनाव तक ले जा सकें, निष्पक्ष चुनाव कराएं. चुनाव के बाद कार्की यह पद छोड़ देंगी और नेपाल को नया प्रधानमंत्री मिलेगा.

नेपाल के चुनावी मैदान में कौन-कौन है?

पुराने नेता

लगभग दो दशकों से नेपाल की राजनीति पर पुराने नेता हावी रहे हैं. इनमें से कई 10 साल लंबे गृहयुद्ध (जो 2006 में खत्म हुआ) के बाद बारी-बारी से सत्ता में आते रहे, और कई पूर्व माओवादी विद्रोही भी रहे हैं. 73 साल के.पी. शर्मा ओली को Gen-Z आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री पद से हटाया गया, लेकिन वे फिर भी इतनी राजनीतिक ताकत बचाए रखने में सफल रहे कि उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल–UML का दोबारा नेता चुन लिया गया है. यानी पार्टी की ओर से वह इस बार के चुनाव में पीएम उम्मीदवार हैं.

एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री, 71 वर्षीय पुष्प कमल दहल, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख हैं. इस पार्टी ने आंदोलन के बाद कई अन्य वामपंथी गुटों को अपने साथ जोड़ लिया है.

वहीं देश की सबसे पुरानी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने जनवरी में 49 साल के गगन थापा को अपना नया नेता चुना. इससे पार्टी के वरिष्ठ नेता और पांच बार प्रधानमंत्री रह चुके 79 वर्षीय शेर बहादुर देउबा हाशिये पर चले गए हैं.

2008 में पद से हटाए किए गए पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह (78 साल) अब भी काठमांडू में रहते हैं. 240 साल पुराने राजशाही शासन के अंत के बाद भी उन्हें राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) का समर्थन हासिल है. यह पार्टी पुराने दौर की यादों और मुख्यधारा की राजनीति से जनता की नाराजगी का फायदा उठाती है. पार्टी ने घोषणापत्र में दावा किया है कि अगर सरकार बनी तो राजतंत्र वापस लाया जाएगा, नेपाल सेक्यूलर देश नहीं, एक हिंदू राष्ट्र बनेगा.

Latest and Breaking News on NDTV

युवाओं में लोकप्रिय नए चेहरे

इन पुराने नेताओं को चुनौती देने के लिए कई नए नेता मैदान में आ गए हैं.

टीवी होस्ट 50 वर्षीय रवि लामिछाने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं. 2022 में इस पार्टी ने सबको चौंका दिया था और संसद में चौथी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी थी. पूर्व उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री रह चुके लामिछाने ने काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह (35 साल) के साथ गठबंधन बनाया है. बालेन शाह एक रैपर और सिविल इंजीनियर हैं और सोशल मीडिया पर उनकी बड़ी फॉलोइंग है. यह गठबंधन बालेन शाह को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना रहा है. वे अपने क्षेत्र में सीधे तौर पर के.पी. शर्मा ओली को चुनौती दे रहे हैं.

एक और चर्चित उम्मीदवार कुलमान घिसिंग हैं. वे पूर्व अंतरिम ऊर्जा मंत्री रह चुके हैं और नेपाल विद्युत प्राधिकरण के प्रमुख के रूप में देश में लंबे समय से चली आ रही बिजली कटौती की समस्या से निपटने का श्रेय उन्हें दिया जाता है.

जेन Z प्रदर्शनकारियों में एक अहम चेहरा रहे सुदन गुरंग भी चुनाव लड़ रहे हैं, उनके साथ कई अन्य युवा कार्यकर्ता भी मैदान में हैं.

नेपाल के GEN Z: चुनाव पर युवाओं की नजर

सितंबर 2025 के प्रदर्शनों को आगे बढ़ाने वाले जेन Z आंदोलन से पहली बार चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों का एक नया समूह सामने आया है. युवा नेपाली ऐसे नेताओं की तलाश में हैं जो आर्थिक सुधार का वादा करें. वर्ल्ड बैंक के अनुसार, नेपाल की 82 प्रतिशत वर्कफोर्स अनौपचारिक क्षेत्र में काम करती है, और 2024 में प्रति व्यक्ति जीडीपी 1,447 डॉलर थी. भारत की बात करें तो यहां प्रति व्यक्ति जीडीपी 2400 डॉलर के आसपास है.

आर्थिक कठिनाइयों के कारण लाखों नेपाली विदेशों में काम करने गए हैं. ताजा जनगणना के अनुसार, देश की 7.5 प्रतिशत आबादी विदेश में रहती है. हालांकि तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से इस बार प्रवासी नेपाली वोट नहीं डाल पाएंगे, लेकिन उनका प्रभाव काफी बड़ा है. नेपाल की कुल जीडीपी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा विदेश से आने वाली रेमिटेंस (पैसे) पर निर्भर है.

यह भी पढ़ें: नेपाल में राजतंत्र वापस लाकर 'हिंदू राष्ट्र' बनाएगी RPP, जानिए चुनावी घोषणापत्र में क्या वादे किए

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Nepal, Nepal Election 2026, Nepal Gen Z Protest
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com