2020 में 124... 2021 में 8... 2022 में 181... 2023 में 18... 2024 में 110... 2025 में 25... और 2026 में अब तक 75... ये आंकड़े हैं जो बताते हैं कि असम में बाढ़ कितनी भयावह होती है. असम वो राज्य जो चाय के बागानों की खुशबू से महकता है, वहां हर साल मॉनसून में बाढ़ के पानी और उनमें डूबती-तैरती लाशों की बदबू आती है.
वही असम इस साल भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है. असम सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 28 जुलाई तक बाढ़ से 75 लोगों की मौत हो चुकी है. असम में 3.32 लाख लोग अब भी प्रभावित हैं.
अधिकारियों ने बताया कि शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, सोनितपुर और कामरूप मेट्रोपॉलिटन समेत सात जिले अब भी बाढ़ की चपेट में हैं. 622 गांव प्रभावित हैं. अधिकारियों ने बताया कि चराइदेव जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 1.42 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. इसके बाद शिवसागर में 97,074 और जोरहाट में 57,371 लोग बाढ़ की चपेट में हैं. बाढ़ प्रभावित जिलों में 45,341.98 हेक्टेयर खेती की जमीन डूब गई है.

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रेस्क्यू ऑपरेशन में सेना, वायुसेना, NDRF, SDRF, फायर ब्रिगेड और वॉलेंटियर समेत कई एजेंसियां जुटी हुई हैं. प्रभावित जिलों में 115 रिलीफ कैंप बनाए गए हैं, जिनमें 32,477 लोग रह रहे हैं.
लेकिन असम के साथ दिक्कत ये है कि यहां हर साल सिर्फ मॉनसून ही नहीं आता, बल्कि वह अपने साथ बाढ़ भी लाता है. ब्रह्मपुत्र और उसकी 50 सहायक नदियां जहां मैदानी इलाकों में खेती के लिए सबसे बड़ा सहारा हैं, वही मॉनसून में उफनती हैं और बाढ़ लेकर आती हैं.
हर साल की वही कहानी...
असम में हर साल 1 मई से लेकर 31 अक्टूबर के बीच बाढ़ आने का खतरा बना रहता है. असम सरकार के 2025-26 के इकनॉमिक सर्वे के मुताबिक, असम में 2025 में तीन बार बाढ़ आई थी. इस बाढ़ से 35 में से 28 जिलों के 11 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए थे.
पहले असम में कुछ सालों के अंतराल के बाद बाढ़ आया करती थी, लेकिन अब तो हर साल यही कहानी बन गई है. असम सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ के कारण 2016 से 2025 तक 836 लोगों की जान गई है.

हर साल बाढ़ के आने का सबसे बड़ा कारण ये है कि पूरा असम दो घाटियों- ब्रह्मपुत्र और बराक से मिलकर बनाया है. असम का कुल क्षेत्रफल 78,438 वर्ग किलोमीटर है. इसमें से 56.194 वर्ग किमी का इलाका ब्रह्मपुत्र और 22,244 वर्ग किमी का इलाका बराक घाटी में बसा है.
राष्ट्रीय बाढ़ आयोग के मुताबिक, असम का 31.500 वर्ग किमी इलाका ऐसा है जहां बाढ़ का खतरा बना रहता है. ये असम के कुल क्षेत्रफल का 39.58% है. असम सरकार के रिकॉर्ड बताते हैं कि बाढ़ से हर साल औसतन 9.31 लाख हेक्टेयर का इलाका प्रभावित होता है.
असम का भूगोल ही ऐसा है कि...
असम के लगभग 40 फीसदी इलाके पर बाढ़ का खतरा बना रहता है. साल के 6 महीने तो इसी डर में गुजर जाते हैं कि कभी भी बाढ़ आ सकती है.
लेकिन इसका क्यों? इसका जवाब है- असम का भूगोल. असम चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है. तिब्बत, भूटान, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड के पहाड़ों ने असम को घेर रखा है. इससे इसकी बनावट 'कटोरे' जैसी बन जाती है.
ऐसे में होता यह है कि जब पहाड़ों पर बारिश होती है तो उसका पानी बहकर असम के मैदानी इलाकों में आता है और इस कारण बाढ़ आती है.

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बाढ़ की दूसरी वजह है यहां नदियों का जाल. यहां दो प्रमुख नदियां हैं- ब्रह्मपुत्र और बराक. इन दोनों के अलावा लगभग 50 सहायक नदियां भी हैं. ये नदियां लगातार चौड़ी होती जा रही हैं, जिससे असम बाढ़ की चपेट में आता रहता है.
असम सरकार के दस्तावेज के मुताबिक, एक सदी में ही राज्य में ब्रह्मपुत्र नदी का कवर एरिया दोगुना चौड़ा हो गया है. 1912 से 1928 के बीच जब सर्वे हुआ था, तब ब्रह्मपुत्र नदी राज्य के 3,870 वर्ग किमी के एरिया को कवर कर रही थी. 1963 से 1975 के बीच हुए सर्वे में यह 4,850 वर्ग किमी में फैल गई. आखिरी बार जब 2006 में सर्वे हुआ था तो इसका कवर एरिया बढ़कर 6,080 वर्ग किमी हो गया.
नदियां कैसे बन रही बाढ़ का कारण?
असम सरकार की एक रिपोर्ट बताती है कि ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत से निकलती है, जहां इसे यारलुंग त्सांगपो कहा जाता है. ये नदी 5,210 मीटर की ऊंचाई से निकलती है. फिर ये धीरे-धीरे नीचे आती है और तिब्बत के पे गांव यानी 3,300 मीटर की ऊंचाई पर आ जाती है. इसका मतलब हुआ कि 1,625 किलोमीटर के सफर में यह नदी सिर्फ 1,910 मीटर ही नीचे आई. लेकिन अगले 200 किलोमीटर के सफर में यह नदी एकदम से 3,150 मीटर नीचे गिर जाती है.
इसका मतलब हुआ कि ब्रह्मपुत्र पहाड़ों से होते हुए सीधे जमीन पर आ गिरती है. इतनी तेज ढलान की वजह से नदी अपने साथ पहाड़ों के टुकड़े और गाद बहाकर लाती है.

इसके बाद आगे का खेल शुरू होता है. असम में आते ही नदी की बहने की रफ्तार धीमी हो जाती है. इसका असर ये होता है कि सारा गाद नदी के तल और किनारों पर जमा होने लगता है. नदी आगे बहने के लिए खुद को चौड़ा करती है. नदी चौड़ी होकर 3 से 6 धाराओं में बंट जाती है. इसकी औसत चौड़ाई 10 किलोमीटर है.
ऐसे में जब बारिश होती है तो नदी के नीचे गाद जमी होने के कारण पानी का स्तर बढ़ने लगता है और बाढ़ आ जाती है.
असम की बाढ़ कितनी खतरनाक?
आजादी के बाद से असम में कई बार भयानक बाढ़ आई है. 1954, 1962, 1972, 1977, 1988, 1998, 2002, 2004, 2008, 2014 और 2016 में भयंकर बाढ़ का सामना किया है.
बीते कुछ सालों से असम हर साल बाढ़ से जूझ रहा है. 2025 में असम में तीन बार बाढ़ आई थी, जिससे 11 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए थे.

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बाढ़ के कारण असम में हर साल हजारों हेक्टेयर खेती की जमीन बर्बाद हो जाती है. और तो और, बाढ़ की वजह से नदियां हर साल जमीन काट रही हैं. असम सरकार के 2025-26 के इकनॉमिक सर्वे के मुताबिक, 1950 से अब तक बाढ़ की वजह से नदियों ने 4.27 लाख हेक्टेयर जमीन काटकर बहा दी है. हर साल औसत 8,000 हेक्टेयर जमीन को नदियां अपने साथ काटकर बहा ले जा रही हैं. इसका मतलब हुआ कि 1950 से अब तक असम की 7% जमीन नदी में बह चुकी है.
इसके अलावा, बाढ़ के कारण असम को हर साल करोड़ों का नुकसान भी उठाना पड़ता है. इकनॉमिक सर्वे बताता है कि बाढ़ के कारण असम को हर साल औसतन 200 करोड़ रुपये का नुकसान होता है.
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