वैज्ञानिक अंतरिक्ष में छिपे कई रहस्यों का पता लगा चुका है. हमारे अंतरिक्ष में असंख्य तारे हैं, इसमें ऐसे कई तारे भी शामिल हैं, जिनके रहस्यों से अभी तक पर्दा नहीं उठा है. लेकिन हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने पहली बार एक पल्सर यानी मरे हुए एक तारे के बेहद पावरफुल चुंबकीय क्षेत्र को मापने में सफलता हासिल की है. यह कारनामा नासा ने एडवांस इमेजिंग एक्स-रे पोलरिमेट्री एक्सप्लोरर (IXPE) टेलीस्कोप से किया. यह पहली बार है जब इंसान ने इस मरे हुए तारे के सबसे बड़े रहस्य को खोजा है.
NASA ने टेलीस्कोप से पल्सर PSR J1101−6101 के मैग्नेटिक फील्ड को सीधे मापा है. यह पल्सर 'लाइटहाउस नेबुला' के बीच में मौजूद है. इस खोज से यह समझने में मदद मिलेगी कि ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमयी और ताकतवर खगोलीय पिंड कैसे काम करते हैं. इस रिसर्च के नतीजे द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में छपे हैं.
क्या होते हैं पल्सर?
पल्सर एक खास तरह का न्यूट्रॉन स्टार होता है, जो बहुत तेजी से घूमता है और जिसका मैग्नेटिक फील्ड बेहद शक्तिशाली होता है. लाइटहाउस नेबुला का यह पल्सर हर सेकंड 16 बार घूमता है. न्यूट्रॉन स्टार उन विशाल तारों के बचे हुए हिस्से होते हैं, जो अपने जीवन के अंत में विस्फोट के बाद रह जाते हैं. इनमें सूरज से ज्यादा मास होता है, लेकिन आकार किसी शहर जितना छोटा हो सकता है.

एक्स-रे: चंद्रा से पहली बार नापा मैग्नेटिक फील्ड
Photo Credit: NASA
वैज्ञानिकों ने जून 2025 में करीब 18 दिनों तक लाइटहाउस नेबुला की स्टडी की. उन्होंने पल्सर से निकलने वाली दो पतली एक्स-रे का एनालिसिस किया. इनमें लंबी स्ट्रीम को 'फिलामेंट' और छोटी स्ट्रीम को 'ट्रेल' कहा जाता है. शोधकर्ताओं का मकसद यह समझना था कि लाइट की स्पीड के करीब चलने वाले इलेक्ट्रॉन इस सिस्टम में कैसे व्यवहार करते हैं.
वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब पल्सर से निकलने वाले ऊर्जावान कण अंतरिक्ष में मौजूद गैस से टकराते हैं, तो एक 'बो शॉक' बनता है. यह ठीक वैसा ही होता है जैसे तेज रफ्तार नाव के आगे पानी में लहर बनती है. ज्यादातर कण इस क्षेत्र के पीछे फंस जाते हैं और एक ट्रेल बनाते हैं, जबकि कुछ बेहद ऊर्जावान कण बाहर निकलकर अंतरिक्ष में दूर तक फैल जाते हैं और फिलामेंट जैसी संरचना बनाते हैं.
सालों पुरानी थ्योरी को मिली मजबूती
इस स्टडी में लाइट के पोलराइजेशन को मापकर मैग्नेटिक फील्ड की दिशा पता लगाई. इसके लिए उन्हें काफी चुनौती का सामना करना पड़ा, क्योंकि लाइटहाउस नेबुला बहुत धुंधला दिखाई देता है. स्टडी में 99 फीसदी से ज्यादा भरोसे के साथ पुष्टि हुई कि मैग्नेटिक फील्ड उसी दिशा में है, जिस दिशा में कण बह रहे हैं. इससे सालों पुरानी एक वैज्ञानिक थ्योरी को मजबूती मिली. हालांकि एक और दिलचस्प बात सामने आई. पोलराइजेशन की मात्रा उम्मीद से कहीं ज्यादा मिली, जिससे नए सवाल खड़े हो गए कि इस क्षेत्र में मैग्नेटिक टर्बुलेंस यानी उथल-पुथल कितनी है.
वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि एक्स-रे और रेडियो तरंगों से मिले आंकड़ों में मैग्नेटिक फील्ड की दिशा अलग-अलग दिखाई दी. एक्स-रे डेटा में मैग्नेटिक फील्ड ट्रेल के समानांतर दिखा, जबकि रेडियो ऑब्जर्वेशन में यह लगभग वर्टीकल था. यह इस बात का संकेत है कि अलग-अलग ऊर्जा वाले कण इस सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं और वहां अलग तरह की प्रक्रियाएं काम कर रही हैं.
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