विज्ञापन

ये चूहे जहर खाकर भी नहीं मरते, माइनस 60 डिग्री पर भी रहते हैं जिंदा

धरती पर सबसे अधिक ऊंचाई पर रहने वाले स्तनधारी जीव का विश्व रिकॉर्ड इन्हीं चूहों के नाम है. इनकी प्रजाति का नाम है- Andean leaf-eared mouse.

ये चूहे जहर खाकर भी नहीं मरते, माइनस 60 डिग्री पर भी रहते हैं जिंदा
Andean leaf-eared mouse सबसे अधिक ऊंचाई पर रहने वाले स्तनधारी जीव हैं (फोटो- AFP)
  • एंडियन लीफ-ईयर माउस धरती पर सबसे अधिक ऊंचाई पर रहने वाला स्तनधारी जीव है
  • यह छोटा सा चूहा एंडीज पर्वतमाला में 6,700 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर रहता, जहां तापमान माइनस 60 डिग्री होता है
  • ये चूहे एंडीज में 6,700 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर बहुत कम मिलने वाले जहरीले पौधों को खाकर भी गुजारा करते हैं

पहली नजर में देखने पर तो यह बस आपको एक आम सा चूहा लगेगा, लेकिन जब हम आपको इसके बारे में बताएंगे तो शायद आप इसमें सुपरहीरो वाले पावर्स देखने लगे. हम बात कर रहे हैं एंडियन लीफ-ईयर माउस की, जिसे प्रकृति का एक अद्भुत करिश्मा कहा जा रहा है. यह धरती पर सबसे अधिक ऊंचाई पर रहने वाला स्तनधारी जीव है. यह छोटा सा चूहा एंडीज पर्वतमाला में 6,700 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर रहता है, जहां तापमान माइनस 60 डिग्री तक होता है. आपकी हथेली में समा सकने वाले इस चूहे के नाम कई विश्व रिकॉर्ड हैं. एक नई रिसर्च में इस चूहे की कई खास बाते सामने आई हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ मोंटाना के बायोलॉजी रिसर्चर जैकरी चेविरॉन की रिसर्च इस हफ्ते प्रतिष्ठित जर्नल 'साइंस' में प्रकाशित हुई है. उन्होंने बताया कि धरती पर सबसे अधिक ऊंचाई पर रहने वाले स्तनधारी जीव का विश्व रिकॉर्ड इन्हीं चूहों के नाम है. यह चूहे ऐसे इलाकों में रह सकते हैं जहां पूरी तरह ट्रेनिंग लेने वाले इंसान (पर्वतारोगी) मुश्किल से ही कुछ समय के लिए जा पाते हैं.

चूहों की यह प्रजाति हिमालयन पिका के रहने की जगह से सैकड़ों मीटर ऊपर पाई गई. पिका वह छोटा जीव है जिसके पास पहले यह रिकॉर्ड था. इस छोटे से चूहे के रहने का दायरा भी बहुत बड़ा है. चिली की चोटियों पर जीवित रहने वाली यही प्रजाति समुद्र तल पर भी पाई गई है. चेविरॉन ने कहा, "इस ग्रह पर किसी भी अन्य स्तनधारी जीव की तुलना में इनका ऊंचाई के हिसाब से रहने का दायरा सबसे बड़ा है." यानी इन्हें आप सबसे ऊंची चोटी पर रख दो या समुद्र तल पर, यह हर जगह जींदा रह जाते हैं.

अव वैज्ञानिकों को लगता है कि इस चूहा ऐसा इसलिए कर पाता है क्योंकि इसकी जबरदस्त सहनशक्ति और अनुकूलन क्षमता है. यह कई मायनों में अद्भुत है.  उनका मानना ​​है कि उनकी खोज से मानव चिकित्सा के क्षेत्र में भी अहम जानकारी मिल सकती है.

यह भी पढ़ें: खुद घर पर ही ऐसे बनाएं चूहे भगाने की दवा, भाग जाएगा एक-एक चूहा

चूहे के पास है सुपरपावर!

इस स्टडी से पता चलता है कि नीचे और ऊंचाई पर रहने वाले चूहे जेनेटिक रूप से एक जैसे होते हैं. यानी जीन एक ही है. वे उन इंसानों से बहुत अलग नहीं हैं जो रेगिस्तान, ट्रॉपिकल इलाकों या ऊंचे पहाड़ी इलाकों में रहने के लिए विकसित हुए हैं. चेविरॉन ने कहा, "कई मायनों में यह इंसानों के लिए एक अच्छा मॉडल है."

बर्फीली ऊंचाइयों पर रहने वाले चूहों में कुछ खास जीन पाए गए. इनमें से एक जीन तिब्बती लोगों में हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी) के अनुकूल ढलने से जुड़ा हुआ माना जाता है. लेकिन इन चूहों का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है. इन चूहों ने कम ऑक्सीजन वाले माहौल में जीवित रहने के लिए सुपरपावर हासिल कर लिए हैं. कोल्ड-चेंबर में किए गए एक्सपेरिमेंट से पता चलता है कि ये पहाड़ी चूहे शरीर की गर्मी बनाए रखने में बहुत माहिर होते हैं.

शुरुआती नतीजों से यह भी पता चलता है कि ये चूहे ऑक्सीजन को बेहतर ढंग से सोखने के लिए ज्यादा रेड ब्लड सेल्स नहीं बनाते, जैसा कि दूसरे स्तनधारी जीव करते हैं. इसकी जगह ये चूहे तेजी से सांस लेते हैं. तेजी से सांस लेने से होने वाले किसी भी नुकसान से बचने के लिए, ये चूहे एक बदले हुए एंजाइम का इस्तेमाल करते हैं. 

 
'साइंस' में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ऊंचे पहाड़ों पर रहने ये चूहे नीचे रहने वाले चूहों की तुलना में ज्यादा शरीर की गर्मी पैदा करते हैं. इनके माइटोकॉन्ड्रिया (जो सेल के लिए ऊर्जा बनाते हैं) ने भी खुद को इस तरह ढाल लिया है कि कम ऑक्सीजन वाली स्थितियों में भी शरीर काम करता है.

ये चूहे न सिर्फ बर्फ और चट्टानों वाले रेगिस्तान में कम ऑक्सीजन वाले माहौल में जिंदा रह सकते हैं, बल्कि वे बहुत कम मिलने वाले जहरीले पौधों को खाकर भी गुजारा करते हैं. एंडियन लीफ-ईयर्ड चूहों के जीनोम में ऐसे जीन की पहचान की गई है जो खाने के साथ शरीर में जाने वाले जहरीले पदार्थों के मेटाबॉलिज्म (पाचन और ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया) में अहम भूमिका निभाते हैं.

अब इंसानों के लिए बन सकते हैं फरिश्ते

नेब्रास्का यूनिवर्सिटी के इवोल्यूशनरी बायोलॉजिस्ट जे स्टोर्ज ने बताया कि इंसानों की कई बीमारियों, खासकर दिल से जुड़ी समस्याओं में, ऑक्सीजन ठीक से न पहुंच पाने के कारण जटिलताएं पैदा होती हैं. उन्होंने कहा, "इसलिए, यह समझना कि लीफ-ईयर्ड चूहों जैसे जानवर अपने प्राकृतिक माहौल में कम ऑक्सीजन में रहने के लिए कैसे विकसित हुए हैं, उन इंसानी मरीजों के इलाज के तरीके खोजने में मदद कर सकता है जो अलग-अलग वजहों से मूल रूप से वैसी ही शारीरिक स्थिति का सामना कर रहे हैं."

चेविरॉन ने कहा कि ऐसी जानकारी कैंसर पर रिसर्च में भी मदद कर सकती है, क्योंकि ट्यूमर भी "हाइपोक्सिक माहौल" (कम ऑक्सीजन वाला माहौल) बना सकते हैं. चेविरॉन ने इस बात पर भी जोर दिया कि पहाड़ों पर रहने वाले इन चूहों की खोज ने स्तनधारी जीवों के जीवन की सीमाओं के बारे में हमारी सोच को सचमुच बदल दिया है.

यह भी पढ़ें: तुर्की से यह गिफ्ट पाकर ताकतवर नेता भी हैरान! तस्वीर आई सामने तो पता चला कितना खास

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Rat, Rat Birth Control, Mouse
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com