सीरिया (Syria) में रविवार को विद्रोही गुटों ने राजधानी दमिश्क पर कब्जा कर लिया. इसके साथ ही लंबे समय से जारी गृहयुद्ध के बाद बसर अल असद की सत्ता का अंत हो गया. सीरिया में अरब स्प्रिंग के दौरान लोकंतत्र की स्थापना को लेकर शुरू हुआ आंदोलन गृहयुद्ध में बदल गया और इसमें हजारों लोगों की जान चली गयी. सीरिया में इस आंदोलन की जब-जब चर्चा होती है तो एक नाम सामने आता है मौविया स्यास्नेह का. 14 साल मौविया स्यास्नेह वही वो शख्स था जिसके एक पेटिंग के बाद सीरिया में आंदोलन की शुरुआत हो गयी.
“एजाक एल डोर"
आज की तारीख से 13 साल पहले 14 साल के एक युवक मौविया स्यास्नेह ने अपनी पेंटिंग से जिस मांग को रखा उसके लिए सीरिया में लंबा संघर्ष देखने को मिला. साल 2011 में मौविया स्यास्नेह ने दक्षिणी सीरिया के शहर दारा (Daraa) की एक दीवार पर एक पेंटिंग बनायी थी. . इसमें लिखा था “एजाक एल डोर" मतलब, ‘अब तुम्हारी बारी है डॉक्टर.' यहां डॉक्टर से इशारा सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद की तरफ था. यह वही दौर था जब अरब और अफ्रिका के कई देशों में लोकतंत्र की स्थापना के लिए आंदोलन हो रहे थे.
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पुलिस ने 26 दिनों तक मौविया स्यास्नेह को हिरासत में रखा
मौविया स्यास्नेह को इस एक पेंटिंग की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी और उसे 26 दिनों तक पुलिस ने हिरासत में रखा था.मौविया स्यास्नेह की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बसर अल असद की पुलिस ने कई जगहों पर गोली भी चलाया था. मौविया स्यास्नेह के समर्थन में हुए आंदोलन के दौरान सीरिया में फ्री सीरियन आर्मी (FSA) का उदय हुआ. जिसमें असद की सेना से भागे हुए कई लोग शामिल हुए. इस विद्रोह का फायदा चरमपंथी समूहों ने भी उठाया, जिससे कई हिस्सों में हिंसा और फैल गई.
सीरिया के लिए बेहद अहम रहा साल 2011
2011 का शासन काल सीरिया के लिए सबसे अहम साबित होउ. इस दौरान लोकतंत्र की मांग को लेकर हजारों सीरियाई नागरिक सड़कों पर उतर आए, लेकिन उन्हें भारी सरकारी दमन का सामना करना पड़ा. हालांकि सरकार के विरोध में विभिन्न सशस्त्र विद्रोही समूहों का गठन हो गया और सरकार का विरोध 2012 के मध्य तक, विद्रोह एक पूर्ण गृह युद्ध में बदल गया.
असद के गलत कदमों ने माहौल को बिगाड़ा
असद पर मानवाधिकार उल्लंघनों का आरोप लगता रहा है, जिनमें युद्ध के दौरान सीरिया में रासायनिक हथियारों का प्रयोग, कुर्दों का दमन और लोगों को जबरन गायब करना शामिल है. असद रूस, ईरान और लेबनान के हिजबुल्लाह की मदद से वर्षों तक विद्रोही गुटों का सफलतापूर्व मुकाबला करते रहे. लेकिन पिछले दिनों अचानक सक्रिय हुए विद्रोही गुटों ने सीरियाई राष्ट्रपति के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी क्योंकि असद के तीन सहयोगी- रूस, हिजबुल्लाह और ईरान इजरायल खुद के संघर्षों में उलझे हुए थे.
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