- नेपाल के गाइड हिलेरी दावा शेरपा एवरेस्ट की चोटी से 6 दिन पहले लापता हो गए थे और अब वे रेंगकर नीचे पहुंचे है
- शेरपा अपने साथ पर्वतारोही क्रिस थ्रॉल को चोटी तक ले गए थे लेकिन नीचे उतरते समय दोनों अलग हो गए
- थ्रॉल ने बताया कि पूरा सफर खराब मौसम की वजह से बहुत लंबा था. जो 5 दिन में पूरा होना चाहिए था, उसमें 11 दिन लगे
एक नेपाली गाइड दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के बाद छह दिनों से लापता था, जिसे मरा हुआ समझ लिया गया था, अब वह जिंदा मिल गया है. जिंदगी की जंग वो कुछ ऐसे लड़कर जीत गया कि वह खुद रेंगते हुए बेस कैंप तक पहुंचा. इस अनुभवी गाइड का नाम हिलेरी दावा शेरपा है, जो 30 मई की सुबह माउंट एवरेस्ट की चोटी के ऊपरी हिस्से में अचानक गायब हो गए थे. इसके 6 दिन बाद गुरुवार की सुबह उन्हें बेस कैंप के पास पाया गया.
न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार उन्हें सागरमाथा प्रदूषण नियंत्रण समिति की टीम ने ढूंढा. यह नेपाली टीम एवरेस्ट पर रास्ते तय करने और वहां का कचरा साफ करने में मदद करती है.
मौत का शोक मनाने लगे थे लोग
A 8K एक्सपीडिशन्स के पेम्बा शेरपा इस सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन को देख रहे थे. उन्होंने एएफपी को बताया कि हिलेरी दावा रेंगते हुए नीचे आ रहे थे. उन्होंने कहा, “एक हेलीकॉप्टर भेजा गया है ताकि उनको काठमांडू के अस्पताल ले जाया जा सके.”

हिलेरी दावा शेरपा को हेलीकॉप्टर से हॉस्पिटल भेजा गया (फोटो- AFP)
थ्रॉल ने बताया कि 30 मई को वह कैंप चार से नीचे उतरना शुरू कर चुके थे, जो लगभग 7,950 मीटर की ऊंचाई पर है और ऑक्सीजन की कमी वाले “डेथ जोन” के पास है. उन्होंने कहा कि नीचे उतरते समय शेरपा रुक गए थे. “वह अपने बैग के साथ आराम के लिए बैठ गए थे, ये लोग बहुत भारी सामान उठाते हैं. मैंने मुड़कर कहा, हिलेरी, तुम ठीक हो भाई? उन्होंने कहा, ‘हां, हां, ठीक हूं क्रिस, तुम जाओ, जाओ!' यह हमारे लिए नया नहीं है, हम अक्सर ऐसे आगे-पीछे चलते हैं.”
थ्रॉल ने बताया कि पूरा सफर बहुत लंबा था. जो पांच दिन में पूरा होना चाहिए था, वह 11 दिन लग गया, इतना कठिन मौसम था. वापस हिलेरी दावा उन्हें नहीं मिले. इसके बाद सर्च टीमों ने उन्हें को ढूंढने के लिए अभियान चलाया, लेकिन वह गुरुवार सुबह तक नहीं मिले. आखिर में पता चला कि वह खुद ही नीचे आ चुके थे, वो भी रेंगकर.
बता दें कि इस सीजन में कम से कम पांच लोगों की मौत हुई है- दो भारतीय और तीन नेपाली पर्वतारोही जो एवरेस्ट की तैयारी कराने में शामिल थे. सरकार के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में 1000 से अधिक पर्वतारोही एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचे, जो अब तक का सबसे व्यस्त सीजन माना जा रहा है.
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