- डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर रुख अक्सर बदलता रहता है और यह वैश्विक रणनीतिकारों के लिए चुनौती बन गया है.
- ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कई बार धमकियां दी हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता पैदा हुई है.
- ट्रंप ने कहा कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से तेल का प्रवाह रोकता है तो उसे पहले से 20 गुना ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा.
मिडिल ईस्ट के आसमान पर गहराते युद्ध के बादलों के बीच, व्हाइट हाउस से आने वाली आवाजें किसी सुलझे हुए कूटनीतिक संदेश के बजाय एक 'अनिश्चितता के भंवर' जैसी जान पड़ती हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर बदलता रुख आज दुनिया भर के रणनीतिकारों के लिए एक अनसुलझी पहेली बन गया है. कभी वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने की कसम खाते हैं, तो कभी अचानक उनका लहजा बदलकर 'सत्ता परिवर्तन' की मांग पर आ टिकता है. वहीं, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी ट्रंप का रवैया कुछ ऐसा ही है.
इतना ही नहीं, ट्रंप का विरोधाभास तब और गहरा जाता है जब वे एक तरफ ईरानी जनता से बगावत की अपील करते हैं और दूसरी तरफ ईरान को 'पूरी तरह तबाह' करने की चेतावनी दे डालते हैं. उनके बयानों में युद्ध की अवधि भी किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है. कभी दावा होता है कि जंग महज दो दिनों में खत्म हो जाएगी, तो कभी इसे एक विनाशकारी अंतहीन संघर्ष के रूप में पेश किया जाता है.
वैश्विक मंच पर अमेरिका की साख को झटका
वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी ट्रंप का रवैया कुछ ऐसा ही है. इसे खोलने और बंद करने को लेकर वे बार-बार नई तारीखों का ऐलान करते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता का माहौल पैदा हो जाता है. विशेषज्ञों और कूटनीति के जानकारों का स्पष्ट मानना है कि बयानों में इस निरंतर अस्थिरता ने वैश्विक मंच पर अमेरिका की साख को गहरा धक्का पहुंचाया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज पर कब-कब क्या कहा?
- 1 मार्च को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखे पोस्ट में धमकाते हुए लिखा था, 'अगर ईरान ऐसा कुछ करता है जिससे होर्मुज स्ट्रेट से तेल का फ्लो रुक जाता है तो अमेरिका ने हमलों में अब तक जितना नुकसान पहुंचाया है, उससे 20 गुना ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा.'
- 15 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह से नष्ट हो गई है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि ईरान के लिए एक-दो ड्रोन भेजना, माइन अटैक करना या होर्मुज स्ट्रेट के आसपास कम दूरी की मिसाइल दागना आसान है, भले ही वह कितनी भी बुरी तरह हार गया हो.
- 22 मार्च को ट्रंप ने होर्मुज को लेकर धमकी देते हुए कहा- अगर ईरान अगले 48 घंटों के भीतर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (समुद्री रास्ता) को पूरी तरह नहीं खोलता है तो संयुक्त राज्य अमेरिका उनके अलग-अलग पावर प्लांट्स पर हमला कर उन्हें पूरी तरह तबाह कर देगा. ट्रंप ने कहा कि इसकी शुरुआत सबसे बड़े पावर प्लांट से होगी.
- 21 मार्च को, ट्रम्प ने कहा था कि अगर ईरान ने 48 घंटों के भीतर जलमार्ग को फिर से नहीं खोला, तो वह बिजली संयंत्रों पर "हमला करके उन्हें पूरी तरह तबाह कर देंगे", जिसकी शुरुआत "सबसे बड़े संयंत्रों से होगी".
- दो दिन बाद, उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच "बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत" हुई है, और उन्होंने ऊर्जा ढाँचे पर होने वाले हमलों को पाँच दिनों के लिए टाल दिया.
- 27 मार्च को, ट्रम्प ने कहा कि वह ऊर्जा संयंत्रों पर हमला 10 दिनों के लिए टाल देंगे, "ईरानी सरकार के अनुरोध पर", जिससे समय-सीमा बढ़कर 6 अप्रैल हो गई
- 2 अप्रैल : अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से लगभग न के बराबर तेल लेता है. हमें इसकी जरूरत नहीं है. जो देश होर्मुज से तेल लेना चाहते करते हैं, उन्हें इस मार्ग का ध्यान रखना चाहिए. उन्हें इसे सुरक्षित रखना चाहिए और इसकी रक्षा करनी चाहिए, हमें ऐसी कोई जरूरत नहीं है. ईरान के साथ हमारी जंग खत्म होगी, तो अपने आप ये रास्ता सभी के लिए खुल जाएगा."
- कल, जब 6 अप्रैल की समय-सीमा नज़दीक आ रही थी, तो उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के पास "48 घंटे" हैं, जिसके बाद वह "पूरी तबाही मचा देंगे". आज, अपमानजनक भाषा से भरे एक पोस्ट में, ट्रम्प ने इस धमकी को फिर से दोहराया.
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