अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य में एक ज्यूरी ने सोशल मीडिया कंपनी Meta को बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने और अपने प्लेटफॉर्म पर यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को छिपाने का दोषी करार दिया है. यह महत्वपूर्ण फैसला करीब सात हफ्ते चली सुनवाई के बाद आया है, जिसे टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ी पहल माना जा रहा है.
ज्यूरी ने माना कि Meta जो फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हॉट्सएप का संचालन करती है, ने सुरक्षा के बजाय मुनाफे को प्राथमिकता दी और राज्य के Unfair Practices Act का उल्लंघन किया. ज्यूरी ने पाया कि कंपनी ने बच्चों की नाजुकता का गलत फायदा उठाया और प्लेटफॉर्म के जोखिमों के बारे में भ्रामक दावे किए.
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हजारों उल्लंघनों पर 375 मिलियन डॉलर का दंड
ज्यूरी ने हर उल्लंघन को अलग मानते हुए कुल 375 मिलियन डॉलर (35 हजार 200 करोड़ रुपये) का दंड तय किया है. हालांकि यह रकम अभियोजन पक्ष की मांग से काफी कम है. ज्यूरी ने माना कि Meta के प्लेटफॉर्म पर हजारों बच्चों को प्रभावित किया गया. हालांकि फैसले के तुरंत बाद Meta के शेयरों में लगभग 5% की बढ़त देखी गई, जिससे निवेशकों ने संकेत दिया कि वे इस फैसले से चिंतित नहीं हैं.
क्या बदलेगी Meta की नीतियां?
यह फैसला केवल दायित्व तय करता है. यह जज पर निर्भर होगा कि Meta की सेवाओं को सार्वजनिक नुकसान माना जाए या नहीं और क्या कंपनी को बच्चों की सुरक्षा से संबंधित कार्यक्रमों के लिए भुगतान करना होगा. यह चरण मई में शुरू होगा.
Meta ने फैसले को चुनौती देने का ऐलान किया है. कंपनी का कहना है कि वह लगातार सुरक्षा सुधारने पर काम कर रही है और यह भी मानती है कि हानिकारक सामग्री को पूरी तरह रोकना चुनौतीपूर्ण है.
'Meta बच्चों को निशाना बनाकर एल्गोरिदम चलाती है'
न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कंपनी के प्लेटफॉर्म बच्चों को अधिक समय तक व्यस्त रखने के लिए एल्गोरिदम चलाते हैं, जिससे जोखिम बढ़ता है. राज्य की दलील थी कि Meta ने युवाओं में लत पैदा करने वाली फीचर डिज़ाइन की और इससे जुड़े खतरों को छिपाया.
मामले में एजेंसियों ने बच्चों के नाम पर बनाई गई फर्जी प्रोफाइल्स का इस्तेमाल किया, जिन पर यौन शोषण संबंधी संदेश आने लगे और Meta की प्रतिक्रिया अपर्याप्त पाई गई.
टेक कंपनियों के लिए बढ़ी मुश्किलें
यह केस उन शुरुआती मामलों में है जो अदालत तक पहुंचे हैं. अमेरिका के 40 से ज्यादा राज्यों ने Meta के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर रखे हैं, जिनमें दावा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म युवा पीढ़ी की मानसिक सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं.
सोशल मीडिया से जुड़ी कई अभिभावक समूहों ने इस फैसले को ऐतिहासिक पल बताया और कहा कि यह बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने की लड़ाई में बड़ा कदम है.
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