नई दिल्ली:
हिंदू धार्मिक साहित्य भगवद् गीता पर रूसी शहर तामस्क में फैसला आने के एक दिन पूर्व विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने यहां मंगलवार को रूसी राजदूत अलेक्जेंडर कदाकिन से मिलकर कहा कि रूस की सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान करने में हर तरह से मदद करनी चाहिए। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक राजदूत को मंत्री से मिलने के लिए हैदराबाद हाउस में बुलाया गया था। सूत्र के मुताबिक इस मुलाकात में कृष्णा ने राजदूत से कहा कि रूस की सरकार को मुद्दे के समाधान में हर सम्भव मदद करनी चाहिए। कदाकिन ने कहा कि मामला हालांकि अदालत में विचाराधीन है लेकिन सरकार अपने अधिकार के दायरे में हर सम्भव कोशिश करेगी। राजदूत ने कहा, "मेरा निजी विचार यह है कि किसी भी धार्मिक साहित्य को अदालत में नहीं लाया जाना चाहिए चाहे वह बाइबिल हो, कुरान हो गया गीता हो।" उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद गीता पढ़ी है और कोई भी इसे पढ़कर यही समझ सकता है कि गीता एक महान धार्मिक पुस्तक है और यह विश्व की पुस्तक है। पिछले सप्ताह विदेश सचिव रंजन मथाई इस मुद्दे पर भारत की चिंता से अवगत कराने के लिए राजदूत से मिले थे। रूस के साइबेरियाई शहर तामस्क की जिला अदालत में इस मामले पर बुधवार को फैसला आने की उम्मीद है। पिछले सप्ताह अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और तामस्क क्षेत्र के मानवाधिकार लोकपाल और मास्को तथा सैंट पीट्सबर्ग के विचारकों से अपनी राय देने के लिए कहा था। अदालत में मामला रूस के सरकारी अभियोजकों ने दाखिल किया था और मांग की थी कि भगवद् गीता पर पाबंदी लगाई जाए तथा इसे चरमपंथी साहित्य घोषित किया जाए।
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