- केन्या के गिलगिल शहर में बारिश के मौसम में चींटियों के झुंड बिलों से बाहर निकलते हैं जो स्थानीय दृश्य है
- अवैध व्यापारियों द्वारा रानी चींटियों की तस्करी की जा रही है जिनकी कीमत लगभग बीस हजार रुपये तक होती है
- रानी चींटियां दशकों तक जीवित रह सकती हैं और डाक सेवा के जरिए आसानी से विदेश भेजी जा सकती हैं
भारत के अलावा अफ्रीकी देश केन्या में भी इस समय मौसम सुहाना हो पड़ा है. इस बारिश में सबसे मेहनतकश माने जाने वालीं चीटियां भी अपने बिलों से बाहर निकलती हैं, केन्या की 'रिफ्ट वैली' के एक शांत कृषि प्रधान शहर गिलगिल (Gilgil) और उसके आसपास के हजारों चींटियों के टीलों से उनके झुंड निकलते देखे जा सकते हैं. इससे इतर चीटियों के लिए संकट भी है. गिलगिल शहर चीटियों के अवैध व्यापार का केंद्र बन गया है. तस्करों के लिए यह समय रानी चींटियों को पकड़ने का सबसे सही मौका होता है. आपको जानकर शायद ताज्जुब होगा कि एक चींटी की कीमत 20 हजार रुपये तक तय की जा रही है.
कीमत 20 हजार के करीब
तस्करों के बीच 'जायंट अफ्रीकन हार्वेस्टर एंट' (Giant African Harvester Ant) की सबसे ज्यादा मांग है. ये आकार में बड़ी और लाल रंग की होती हैं. ये ब्लैक मार्केट मुख्य रूप से ऑनलाइन चलता है.एक रानी चींटी की कीमत £170 ($220 यानी लगभग 18,500 रुपये) तक हो सकती है.एक अकेली रानी चींटी में पूरी कॉलोनी बसाने में सक्षम होती है और दशकों तक जीवित रह सकती है. इन्हें डाक के जरिए भेजना भी आसान होता है क्योंकि स्कैनर्स अक्सर जैविक पदार्थों (organic material) को पकड़ नहीं पाते हैं.
बीबीसी (BBC) में छपी रिपोर्ट के मुताबिक एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसने एक समय दलाल के रूप में काम किया था, जो विदेशी खरीदारों को स्थानीय नेटवर्क से जोड़ता था. उसने कहा, "शुरुआत में मुझे पता भी नहीं था कि यह अवैध है."इन चींटियों को वैज्ञानिक भाषा में मेसर सेफैलोट्स (Messor cephalotes) कहा जाता है. ये पूर्वी अफ्रीका की मूल निवासी हैं और अपने अनोखे बीज-इकट्ठा करने के व्यवहार के लिए जानी जाती हैं, जो इन्हें चींटियों को इकट्ठा करने वालों के बीच काफी लोकप्रिय बनाता है. पूर्व दलाल ने बताया, "एक दोस्त ने मुझे बताया था कि एक विदेशी इन रानी चींटियों के लिए अच्छे पैसे दे रहा है वे बड़ी लाल कलर में होती हैं और आसानी से दिख जाती हैं."
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चींटियों की तस्करी एक नई चुनौती
केन्या में इस अवैध व्यापार का पैमाना पिछले साल तब सामने आया, जब गिल्गिल्ल (Gilgil) के आसपास से पकड़ी गई 5,000 जायंट हार्वेस्टर रानी चींटियां नैवाशा (Naivasha) के एक गेस्ट हाउस में जीवित पाई गईं. नैवाशा पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय झील के किनारे बसा एक शहर है. केन्या वाइल्डलाइफ सर्विस (KWS) के अनुसार, बेल्जियम, वियतनाम और केन्या के संदिग्धों ने टेस्ट ट्यूब और सिरिंज में गीली रुई भरी थी, जिससे हर चींटी दो महीने तक जीवित रह सके. उनकी योजना इन्हें यूरोप और एशिया ले जाकर बेचने की थी. चींटियों के इस व्यापार ने वैज्ञानिकों और अधिकारियों को हैरान कर दिया है. पूर्वी अफ्रीकी देश (केन्या) आमतौर पर हाथी के दांत और गैंडे के सींग जैसे हाई-प्रोफाइल वन्यजीव अपराधों से निपटने का आदी रहा है, लेकिन चींटियों की तस्करी एक नई चुनौती बनकर उभरी है.
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