अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच का सीज़फायर जैसे ठीक से शुरू होने से पहले ही ख़त्म होता दिख रहा है. इज़रायल का कहना है कि इस सीज़फ़ायर में लेबनान शामिल नहीं है. वह लेबनान पर ताबड़तोड़ हमले कर रहा है. इजराइली सेना ने दावा किया कि बुधवार रात उसने बेरूत पर जो हमला किया, उसमें हिज्बुल्लाह नेता नईम कासिम के भतीजे की मौत हो गई. ये भतीजा नईम कासिम का सेक्रेटरी भी था. सीजफायर के 24 घंटे बाद ही लेबनान पर इज़रायल के हमलों में 200 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है. ये हमला बेहद बड़ा था- महज 10 मिनट में 100 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया. अब अमेरिका और इजराइल कह रहे हैं कि सीजफायर में लेबनान पर हमले रोकना शर्त में शामिल नहीं है. वहीं ईरान कह रहा है कि अगर लेबनान में हमले नही रुके तो वह तेलअवीव पर फिर से हमले करेगा . ये इजरायल का एक तरह से संकेत है कि उसका इस समझौते से कोई वास्ता नहीं है. इजरायल ने कहा है कि वह सीजफायर का समर्थन करता है लेकिन लेबनान पर हमले जारी रखेगा.
हालांकि, इजराइल के इन हमलों की कई देश आलोचना कर रहे हैं .इटली ने लेबनान के आम नागरिकों पर बमबारी की निंदा की . उसका कहना है कि वह नहीं चाहता कि कोई दूसरा गाजा बने. ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने कहा कि लेबनान पर इजरायल के लगातार हमले गंभीर रूप से नुकसानदेह हैं. इससे अमेरिका और ईरान के युद्धविराम को अस्थिर करने का खतरा है. संयुक्त राष्ट्र ने भी माना है कि लेबनान पर इजरायली हमले अमेरिका ईरान के संघर्षविराम के लिये गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि यह युद्धविराम लेबनान पर भी लागू होना चाहिए. पूरे क्षेत्र में शांति होनी चाहिए जाहिर सी बात है कि दुनिया में कई देशों को अब लग रहा है कि इजरायली जिद की वजह से सीजफायर खटाई में न पड़ जाए .
वैसे इजरायल और हिज्बुल्लाह की ये जंग पुरानी है . इन दोनों के बीच 1982 और 2006 में दो बड़े युद्ध हो चुके हैं . वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका को तय करना होगा कि वो सीजफायर लागू करता है या इजराइल के जरिए जंग जारी रखता है, क्योंकि दोनों साथ नहीं चल सकते . इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुताबिक लेबनान अमेरिका-ईरान सीजफायर का हिस्सा नहीं है . यही बात अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी दोहरा रहे हैं जबकि ईरान और मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान का कहना है कि समझौते में लेबनान पर इजरायली हमले रोकना भी शामिल है.
ऐसे में भले ही ये सीजफायर है लेकिन जमीन पर हालात बेहद खराब हैं. लेबनान पर लगातार इजरायली हमला युद्धविराम को खतरे में डाल रहा है . वजह है कि ईरान ऐसे हिज्बुल्लाह का साथ छोड़ने को तैयार नही है . यह उसका एक प्रॉक्सी संगठन है . ऐसे में अब गेंद अमेरिका के पाले में है. अगर वह इजराइल को लेबनान पर हमले के लिये नहीं रोकता है तो इस सीजफायर का टूटना तय माना जा रहा है .
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