इजरायल चुनाव में हर वोट की गिनती हो चुकी है और फाइनल रिजल्ट सामने आ चुका है. शुक्रवार, 30 अक्टूबर को तड़के सुबह जारी अंतिम नतीजों के अनुसार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का खेमा विपक्ष से आगे तो रहा, लेकिन बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे रह गया है. नेतान्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन ने नेसेट यानी इजरायली संसद की 120 सीटों में से 53 सीटें जीती हैं. नेतन्याहू की अपनी लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी रही. वहीं नेतन्याहू को चुनौती से दे रहे गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट ने 48 सीटें हासिल कीं.
लेकिन असली खेल तो अरब पार्टियों ने किया है- 'राआम' और ज्वाइंट लिस्ट ने मिलकर 19 सीटें जीती हैं. गठबंधन की बातचीत में ये दोनों पार्टियां 'किंगमेकर' की भूमिका निभा सकती हैं.
बहुमत नहीं मिला तो अरब पार्टियों पर आरोप लगाने लगे नेतन्याहू
गुरुवार को नेतन्याहू की पार्टी ने इन दोनों अरब पार्टियों पर चुनाव में धांधली के बेबुनियाद आरोप लगाए. लिकुड ने दावा किया गया कि इन पार्टियों को वोट खरीदने के लिए कतर से फंड मिलने का संदेह है. लिकुड पार्टी ने कहा कि "रामगेट घोटाला एक राजनीतिक भूकंप है. इजरायल के चुनाव चुरा लिए गए हैं." लेकिन अरब पार्टियों और कतर ने इन आरोपों को खारिज कर दिया. 'राआम' के नेता मंसूर अब्बास ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया और जांच का स्वागत किया. वहीं 'जॉइंट लिस्ट' ने नेतन्याहू और उनके सहयोगियों पर आरोप लगाया कि वे अरब मतदाताओं के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव से डरकर "उकसावे का अभियान" चला रहे हैं. जबकि विपक्षी नेता आइसेनकोट ने नेतन्याहू पर चुनाव नतीजों को "अवैध" ठहराने की कोशिश करने का आरोप लगाया.
सरकार अभी भी नेतन्याहू के हाथ में है यानी हर एजेंसी उनके पास है. ऐसे में इजरायल की घरेलू सुरक्षा एजेंसी 'शिन बेट' ने कहा कि वह कथित धांधली की जांच कर रही है. लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इसका मकसद "उन लोगों पर सवाल उठाना या उन्हें दोषी ठहराना नहीं है, जिन्होंने लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से अपने वोट डाले हैं".
दबाव में किंगमेकर
'जॉइंट लिस्ट' के प्रमुख यूसुफ जबरीन ने न्यूज AFP को बताया कि वह नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए विपक्ष के साथ सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन वे विपक्ष के साथ मिलकर सरकार में शामिल नहीं होंगे. वहीं इजरायल के चैनल 12 न्यूज के मुताबिक, रा'म पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने कहा है कि गादी आइजनकोट के नेतृत्व में अल्पमत सरकार बनना नामुमकिन है. गादी आइजनकोट यशर पार्टी के अध्यक्ष हैं और यह सरकार अरब पार्टियों के बाहर से समर्थन से बननी थी. मंसूर अब्बास ने पार्टी के सदस्यों के साथ बैठक के दौरान यह बात कही.
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