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जिंदगी से बड़ी मजबूरी, युद्ध की आग के बीच होर्मुज में फंसे नाविकों को जान से ज्यादा अपनी सैलरी की फिक्र

ईरान युद्ध के कारण होर्मुज में फंसे 20,000 नाविकों के पास खाना-पानी खत्म हो रहा है, जहां वे जान के खतरे और कम वेतन के बीच जीने को मजबूर हैं.

जिंदगी से बड़ी मजबूरी, युद्ध की आग के बीच होर्मुज में फंसे नाविकों को जान से ज्यादा अपनी सैलरी की फिक्र
होर्मुज स्ट्रेट में 2000 जहाजों में फंसे 20 हजार नाविक
AI Image
  • मिडिल ईस्ट की जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट पर 20,000 नाविक पांच हफ्तों से फंसे हुए हैं
  • नाविक युद्ध क्षेत्र में काम करने के बावजूद कम वेतन पाने और सुरक्षा की चिंता में जीवन जोखिम में डाल रहे हैं
  • जहाजों के मालिकाना और प्रबंधन अधिकार कई देशों में फैले होने से नाविकों के लिए जिम्मेदार कोई संस्था नहीं
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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब खतरनाक मोड़ ले चुकी है. इस युद्ध का असर दुनिया के कई देशों में देखने को मिल रहा है. इस युद्ध का सबसे बुरा असर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ा है, जो दुनिया का 20% तेल का रास्ता है. ईरान की धमकियों और युद्ध की नाकाबंदी ने होर्मुज को दुनिया का सबसे बड़ा तैरता हुआ जेलखाना बना दिया है. पांच हफ्तों से फंसे 20,000 नाविकों के पास अब न पीने को पानी बचा है और न खाने को निवाला. समुद्री कानूनों के पेचीदा जाल में उलझी इन जिंदगियों के लिए हर गुजरता मिनट भारी पड़ रहा है. ये कानून एक तरफ जहां ग्लोबल व्यापार को चलाते हैं वहीं दूसरी तरफ नाविकों को ऐसी मुश्किल स्थितियों में फंसा देते हैं. ऐसे में भी कुछ नाविकों को अपनी जान से ज्यादा कमाई की चिंता है. ये नाविक पूछ रहे हैं कि युद्ध की स्थिति में उनको कितनी सैलरी मिलेगी.

जिंदगी से ज्यादा सैलरी की चिंता

ITF की सपोर्ट टीम के पांच सदस्यों में से एक, लुसियन क्रैसिउन ने बताया कि उन्हें मिले लगभग 50 प्रतिशत ईमेल सैलरी के बारे में थे. उन्होंने कहा कि कई नाविक खतरे के बावजूद जहाजों पर ही रहना चुनते हैं, क्योंकि उनके पास जहाज छोड़ने का खर्च उठाने की क्षमता नहीं होती. एक ईमेल में, एक नाविक ने यह कन्फर्मेशन मांगा कि क्या उसकी सैलरी 16 डॉलर प्रतिदिन से बढ़कर 32 डॉलर हो जाएगी, क्योंकि वह एक युद्ध क्षेत्र में था. ITF के अनुसार, इतनी कम सैलरी यह बताती है कि जहाज मालिकों के पास सही वेतन सुनिश्चित करने के लिए कोई लेबर एग्रीमेंट नहीं है. ऐसी व्यवस्थाओं के तहत काम करने वाले नाविकों को खास तौर पर खतरा होता है, क्योंकि उनके कॉन्ट्रैक्ट में अक्सर युद्ध क्षेत्रों में होने वाले ऑपरेशन शामिल नहीं होते हैं.

जहाजों के अधिकारों पर बड़ी उलझन

Wired की एक रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक शिपिंग कई अधिकार क्षेत्रों में फैली हुई है. इसका मतलब है कि किसी जहाज का मालिकाना हक एक देश में हो सकता है और उसका रजिस्ट्रेशन किसी दूसरे देश में. इसके साथ ही उसका मैनेजमेंट कोई तीसरी पार्टी कर सकती है और वह भी किसी अन्य जगह मौजूद हो सकता है.

आमतौर पर इससे ग्लोबल कारोबार में आसानी होती है. लेकिन किसी संकट के समय नाविकों के लिए स्पष्ट रूप से जिम्मेदार कोई एक अथॉरिटी नहीं होती है. उनके वापस लौटने की कोई भी संभावना इन सभी अधिकार क्षेत्रों के आपसी सहयोग पर निर्भर करती है. ITF जैसे संगठनों का कहना है कि इसमें दखल देना संभव है, लेकिन यह अलग-अलग अधिकार क्षेत्रों के बीच तालमेल और जहाज मालिकों के सहयोग पर निर्भर करता है.

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नाविक मदद के लिए लगा रहे गुहार

समाचार एजेंसी AFP की एक रिपोर्ट के अनुसार, नाविकों के लिए बनी हेल्पलाइनें खाड़ी क्षेत्र में फंसे जहाजों के क्रू के संदेशों से भर गई हैं. इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (ITF) की 'सीफेयरर सपोर्ट टीम' को भेजे गए एक संदेश में लिखा था, 'क्रू को जिंदा रखने के लिए खाने, पीने के पानी और बुनियादी जरूरतों की तत्काल आपूर्ति जरूरी है.'

नाविकों से आने वाली मदद की गुहारों को संभालने वाले ITF के अरब और ईरान के नेटवर्क कोऑर्डिनेटर मोहम्मद अराचेदी कहते हैं, 'यह एक असाधारण स्थिति है, यहां बहुत ज्यादा पैनिक फैला हुआ है.'

अराचेदी ने AFP को बताया, 'मेरे पास नाविकों के फोन सुबह के 2-3 बजे भी आते हैं. जैसे ही उन्हें इंटरनेट की सुविधा मिलती है, वे तुरंत मुझे फोन करते हैं.' उन्होंने आगे बताया, 'एक नाविक ने घबराकर फोन किया और कहा, 'हम पर यहां बमबारी हो रही है. हम मरना नहीं चाहते. प्लीज मदद कीजिए और यहां से निकालिए.'

जहाज क्यों नहीं छोड़ सकते नाविक?

फरवरी में शुरू हुआ ईरान युद्ध लगातार भयानक होता जा रहा है. टकराव के शुरू होने के बाद से ही इंटरनेशनल बारगेनिंग फोरम ने होर्मुज स्ट्रेट के आस-पास के इलाकों को युद्ध क्षेत्र घोषित कर दिया है. ऐसी स्थिति में नाविकों को कंपनी के खर्च पर अपने देश लौटने का अधिकार होता है और जो लोग काम कर रहे हैं, उन्हें दोगुनी सैलरी मिलती है. 

इसके बाद भी कई नाविक ऐसे जहाजों पर हैं जिनके साथ ये समझौते नहीं हैं और होर्मुज की नाकेबंदी का उन पर सबसे बुरा असर पड़ा है. 18 मार्च के एक ईमेल में, एक नाविक ने बताया कि जहाज का ऑपरेटर क्रू के जहाज छोड़ने के अनुरोधों को नजरअंदाज़ कर रहा था. ईमेल में लिखा था, 'वे हमें कार्गो ऑपरेशन और STS (एक जहाज से दूसरे जहाज पर सामान ले जाने के ऑपरेशन) जारी रखने के लिए मजबूर कर रहे हैं, भले ही हम अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हों और हम एक युद्ध जैसे इलाके में हों. वे हमें ऐसी स्थिति में फंसाकर रख रहे हैं जहां हमारे पास कोई विकल्प नहीं है.'

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अब तक 10 नाविकों की मौत

इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से जहाजों से जुड़ी 19 घटनाओं की पुष्टि हुई है और इन घटनाओं में 10 नाविकों की मौत हो गई है. ईरान ने धमकी दी है कि उसके मित्र देशों को छोड़कर अगर कोई भी अन्य देश का जहाज होर्मुज से गुजरता है, तो वो उस पर हमला करेगा.ईरान की धमकी और हमलों की वजह से दुनियाभर में तेलों की कीमतें आसमान छू रही हैं. ऐसे में अमेरिका पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है.

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