- हिज्बुल्लाह और उसके समर्थक लेबनान-इजरायल वार्ताओं का कड़ा विरोध कर रहे हैं और वार्ता में शामिल नहीं हैं
- लेबनान-इजरायल में आधिकारिक युद्ध जारी है और दोनों देशों के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं
- राष्ट्रपति औन ने पूर्व राजदूत साइमन करम को वार्ता के लिए नामित किया और स्थायी शांति की उम्मीद जताई है
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने सोमवार को कहा कि हिज्बुल्लाह और उसके समर्थकों द्वारा वार्ता को अस्वीकार किए जाने के बावजूद, इजरायल के साथ प्रस्तावित वार्ता का उद्देश्य दक्षिण में शत्रुता और कब्जे को समाप्त करना है. औन ने एक बयान में कहा, "वार्ता का उद्देश्य शत्रुता को रोकना, दक्षिणी क्षेत्रों पर इजरायली कब्जे को समाप्त करना और इजरायल के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त दक्षिणी सीमाओं तक लेबनानी सेना की तैनाती करना है." ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह इन वार्ताओं का हिस्सा नहीं है और उसके समर्थक लेबनान-इजरायल वार्ताओं का कड़ा विरोध कर रहे हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषणा किए जाने के बाद शुक्रवार को हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच छह सप्ताह से अधिक समय से चल रहे युद्ध को विराम देते हुए 10 दिनों का युद्धविराम शुरू हुआ. लेबनान में यह युद्धविराम ईरान की उन शर्तों में से एक थी, जिसके तहत वह वाशिंगटन के साथ अपने अलग युद्धविराम को बढ़ाने और स्थायी शांति की शर्तों पर काम करने के लिए वार्ता फिर से शुरू करना चाहता था. हालांकि, ट्रंप ने नये बयानों और रविवार देर रात ईरानी जहाज को कब्जे में लेने से ईरान ने आज से शुरू होने वाली इस्लामाबाद शांति वार्ता से किनारा कर लिया. मगर लेबनान सरकार फिर भी इजरायल से वार्ता को तैयार है. लेबनान आधिकारिक तौर पर इजरायल के साथ युद्ध में है और अपने दक्षिणी पड़ोसी देश के साथ उसके कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं.
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लेबनान में औन का हो रहा विरोध
बेरुत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर जाने वाली सड़क पर, दक्षिणी उपनगरों में जहां हिज्बुल्लाह का दबदबा है, एएफपी की तस्वीरों में सोमवार को औन और प्रधानमंत्री नवाफ सलाम के वार्ता के समर्थन के बाद उन पर हमला करने वाले दीवार पर बने नये चित्र दिखाई दिए. एक दीवार पर बने चित्र में, लेबनानी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बारे में लिखा था, "जोसेफ गद्दार है, नवाफ गद्दार है." इन नामों को काले रंग से मिटा दिया गया था. एक अन्य दीवार के चित्र में लिखा था, "इजरायल के साथ बातचीत वर्जित है... सामान्यीकरण नहीं."
हिज्बुल्लाह के वरिष्ठ अधिकारी महमूद कमाती ने शनिवार को औन की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, "हार गए, अब आप इजरायलियों और अमेरिकियों के पास जाओगे, देखते हैं आपको क्या मिलता है." हिज्बुल्लाह समर्थकों ने भी सोशल मीडिया पर औन की जमकर आलोचना की.
एक यूजर ने X पर पोस्ट किया, “दो दिन की बातचीत के बाद आप दक्षिण को सौंपने जा रहे हैं? हम आपको समझौता करने नहीं देंगे.” एक अन्य यूजर ने X पर पोस्ट किया, जिसकी प्रोफाइल पिक्चर में औन और सलाम हैं, लिखा है, “वे मेरा प्रतिनिधित्व नहीं करते. हमारे सभी बलिदानों के बाद, यह आदमी हमारी तरफ से बोलना चाहता है?”
लेबनानी अधिकारियों ने बताया कि पिछले महीने हिज्बुल्लाह द्वारा देश को मध्य पूर्व युद्ध में घसीटने के बाद से इजरायली हमलों में लगभग 2,300 लोग मारे गए और दस लाख से अधिक लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा. हिज्बुल्लाह के सांसद हसन फदलल्लाह ने सोमवार को एएफपी को बताया, “लोग अपने बलिदानों को व्यर्थ नहीं जाने देंगे. उन्होंने अपने बेटों को कुर्बान किया और अपना खून बहाया, और वे कभी स्वीकार नहीं करेंगे... कि उनकी उपलब्धियों से समझौता किया जाए. प्रत्यक्ष वार्ता का कोई भी परिणाम उन लोगों पर थोपा नहीं जा सकता, जिन्होंने ये बलिदान दिए हैं.”
'मुझे पूरी उम्मीद है'
सोमवार को औन ने वाशिंगटन में लेबनान के पूर्व राजदूत साइमन करम को इजरायल के साथ वार्ता का नेतृत्व करने के लिए नामित किया. उन्होंने कहा, "कोई भी लेबनान के साथ इस जिम्मेदारी को साझा नहीं करेगा या उसकी जगह नहीं लेगा," और यह भी कहा कि इजरायल-लेबनान वार्ता "किसी भी अन्य वार्ता से अलग" होगी, जो अमेरिका-ईरान कूटनीति की ओर एक अप्रत्यक्ष इशारा था. उन्होंने कहा, "लेबनान के सामने दो विकल्प हैं: या तो युद्ध जारी रहे, जिसके मानवीय, सामाजिक, आर्थिक और संप्रभुता संबंधी गंभीर परिणाम होंगे, या इस युद्ध को समाप्त करने और स्थायी स्थिरता प्राप्त करने के लिए वार्ता हो." औन ने कहा, "मैंने वार्ता को चुना है, और मुझे पूरी उम्मीद है कि हम लेबनान को बचाने में सक्षम होंगे."

क्या ट्रंप कर गए खेल?
ईरान युद्ध के बीच ट्रंप ने भले ही ईरान की शर्त की मजबूरी में ही इजरायल को लेबनान से सीजफायर के लिए मजबूर किया, लेकिन लगता है ट्रंप का ये दांव काम कर गया. हिज्बुल्लाह और लेबनान सरकार में खटपट शुरू हो गई है. ऐसे में अगर लेबनान की सरकार हिज्बुल्लाह की मर्जी के बगैर कोई समझौता कर लेती है तो हिज्बुल्लाह शायद ही उसे माने. लेबनान सरकार से हिज्बुल्लाह टकराएगा तो उसे लेबनान सरकार और इजरायल दोनों से लड़ना पड़ेगा. इधर, ईरान खुद अमेरिका से जंग में है. ऐसे में ना तो ईरान हिज्बुल्लाह की मदद कर पाएगा और ना ही हिज्बुल्लाह ईरान की. जाहिर है दोनों को ट्रंप के इस दांव से आगे नुकसान उठाना पड़ सकता है. या फिर लेबनान सरकार सिर्फ इजरायल-अमेरिका के मंसूबे जानना चाहती है और ईरान के कहने पर सीजफायर टाइम बढ़ाना चाहती है.
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