- तेल की कीमतों में वृद्धि का मुख्य लाभ तेल कंपनियों को मिलता है, जो उत्पादन और निवेश में इसे लगाती हैं
- मध्य पूर्व में युद्ध के कारण तेल उत्पादन और शिपिंग में जोखिम बढ़ने से बीमा और सुरक्षा लागत बढ़ती है
- अमेरिका, ब्रिटेन, नॉर्वे जैसे देशों में तेल की बढ़ती कीमतों से सरकारों और शेयरधारकों को वित्तीय लाभ होता है
तेल का बाजार ग्लोबल है, यही कारण है कि ईरान युद्ध जैसी घटनाएं तेल की कीमतों और तेल से बने उत्पादों की कीमतों को लगभग हर जगह प्रभावित करती हैं. फेडरल डेटा से पता चलता है कि अमेरिका में कच्चे तेल के प्रमुख केंद्र पर फरवरी 2026 के अंत में (अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले से पहले) तेल की कीमत 66 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी, जो 13 अप्रैल को बढ़कर 101 डॉलर प्रति बैरल हो गई. इसी तरह की मूल्य वृद्धि का असर पूरी दुनिया में महसूस किया गया है.
कुछ बुनियादी अर्थशास्त्र
एपी ने अर्थशास्त्रियों से बात कर एक रिपोर्ट में बताया है कि कच्चा तेल वैश्विक आर्थिक प्रणाली में सबसे महत्वपूर्ण वस्तु हो सकता है. यह औद्योगिक अर्थव्यवस्था का मूल ईंधन है. यह परिवहन को चलाने वाले इंजनों को शक्ति प्रदान करता है और उन सड़कों का निर्माण करता है जिन पर वाहन चलते हैं. संक्षेप में, तेल और इसके उत्पादों के बिना आधुनिक जीवन की कल्पना करना कठिन है. और जब इसकी आपूर्ति बदलती है, तो इसकी कीमत भी बदल जाती है. अर्थशास्त्री इसे मूलभूत मॉडल आपूर्ति और मांग का उपयोग करके समझाते हैं। जब किसी चीज की उपलब्धता कम हो जाती है, तो उसे चाहने वाले उपभोक्ताओं और उसकी आवश्यकता वाली कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा से कीमत बढ़ सकती है.
-
पीएम मोदी के ग्लोबल विजन से लेकर RBI गवर्नर के बड़े बयान तक, अखबारों के फ्रंट पेज पर छाया NDTV समिट -
'भारतीय दयालु, ईमानदार और बुद्धिमान होते हैं', खामेनेई ने अपने प्रतिनिधि को भारत भेजते समय क्या कहा था? -
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?

कभी-कभी यह प्रक्रिया धीरे-धीरे चलती है, जिससे लोग कीमतों में अचानक होने वाले बदलावों को कम करने के लिए अपनी खरीदारी या गतिविधियों को समायोजित कर सकते हैं, लेकिन जब दुनिया के तेल के एक महत्वपूर्ण स्रोत को बिना किसी पूर्व सूचना के प्रभावी रूप से अवरुद्ध कर दिया जाता है, जैसे कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है, तो कीमतें थोड़े ही समय में तेजी से बढ़ सकती हैं.
तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि होने पर कई लोगों द्वारा पूछा जाने वाला एक स्वाभाविक प्रश्न यह है: वह अतिरिक्त पैसा कहां जाता है, और इससे किसे लाभ होता है?
कुछ लोगों ने इस बात का विश्लेषण करते हुए पूरी किताबें लिखी हैं कि उपभोक्ताओं की जेब से निकलने के बाद वह पैसा कहां जाता है, लेकिन अंततः, अधिकांश पैसा तेल के स्रोत - तेल कंपनियों - की ओर ही जाता है. तेल कंपनी किस क्षेत्र में काम कर रही है और उसका मालिक कौन है, इस पर निर्भर करते हुए कंपनी उस पैसे का उपयोग किस प्रकार करती है, इसमें काफी अंतर होता है. इसके अलावा, कंपनी जिस कारोबारी माहौल में काम करती है - यानी कानूनों और नियमों का समूह - वह भी मायने रखता है.
मध्य पूर्व खतरे में
ईरान में युद्ध के कारण मध्य पूर्व के तेल उत्पादकों को कई नए जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें उत्पादन, प्रसंस्करण स्थलों और शिपिंग मार्गों पर खतरे शामिल हैं. इन जोखिमों से बीमा, सुरक्षा और परिवहन की लागत बढ़ जाती है, लेकिन इस क्षेत्र में उत्पादन लागत अपेक्षाकृत कम है, इसलिए वैश्विक तेल की ऊंची कीमतें आमतौर पर मजबूत मुनाफे में तब्दील हो जाती हैं.
सऊदी अरब जैसे प्रमुख निर्यातक देश में, सरकार लगभग सभी तेल उत्पादन का स्वामित्व और नियंत्रण रखती है, इसलिए ऊंची कीमतें आमतौर पर युद्ध के दौरान भी सरकार के वित्त और निवेश को लाभ पहुंचाती हैं. सऊदी अरब में, तेल राजस्व का उपयोग ऐतिहासिक रूप से सार्वजनिक व्यय के लिए किया जाता रहा है.
पश्चिमी टेक्सास को अप्रत्याशित लाभ
अमेरिका का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र, पर्मियन बेसिन, फारस की खाड़ी से काफी दूर है. जब ईरान में युद्ध के कारण वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो पश्चिमी टेक्सास में काम करने वाली तेल कंपनियों को अप्रत्याशित लाभ मिलता है: कीमतें लागत से अधिक तेजी से बढ़ती हैं, कम से कम कुछ समय के लिए.

इसका तात्कालिक प्रभाव ऊंची कीमतों से अधिक आय के रूप में सामने आता है. यह पैसा मुख्य रूप से कंपनी के मालिकों यानी शेयरधारकों को लाभांश, ऋण कटौती, कंपनी द्वारा समर्थित अपने ही शेयरों की खरीद और ड्रिलिंग एवं उत्पादन में पुनर्निवेश के माध्यम से मिलता है. समय के साथ, कंपनियां इस अप्रत्याशित लाभ का कुछ हिस्सा अधिक उत्पादन क्षमता या पाइपलाइन निर्माण पर खर्च करने का निर्णय ले सकती हैं ताकि अधिक तेल और गैस बाजार तक पहुंचाया जा सके.
उत्तरी सागर से सरकारी राजस्व में वृद्धि
ग्रेट ब्रिटेन और स्कैंडिनेविया के बीच स्थित उत्तरी सागर में, बहुराष्ट्रीय और सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों का एक समूह अधिकांश तेल का उत्पादन करता है. ब्रिटेन में, तेल की बढ़ती कीमतों से होने वाले अधिक मुनाफे का प्राथमिक लाभ निजी शेयरधारकों को मिलता है, हालांकि तेल और गैस कंपनियों के मुनाफे पर लगने वाले अतिरिक्त कर के कारण सरकार को भी इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्राप्त होता है, जिसका उपयोग वह सार्वजनिक खर्चों को पूरा करने में करती है.
नॉर्वे में, तेल राजस्व गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल में जाता है, जो दुनिया का सबसे बड़ा संप्रभु धन कोष है, जिसका मूल्य 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है. कानून यह निर्धारित करते हैं कि कोष से कितनी और किन उद्देश्यों के लिए धन निकाला जा सकता है, जिससे सार्वजनिक खर्चों को समर्थन मिलता है और भावी पीढ़ियों के लिए धन संरक्षित रहता है. यह अलास्का के राज्य-स्वामित्व वाले कार्यक्रम के समान मॉडल है, जो तेल राजस्व से वित्त पोषित है और सरकारी सेवाओं के लिए भुगतान करता है और प्रत्येक स्थायी निवासी को वार्षिक लाभांश भेजता है.
रूसी कुलीन वर्ग और भी समृद्ध हो रहे हैं
यूक्रेन के कुछ हिस्सों पर रूस के आक्रमण और कब्जे के जवाब में प्रमुख औद्योगिक देशों द्वारा रूसी तेल पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए हैं. हालांकि अमेरिका रूस द्वारा अपने तेल की कीमत तय करने पर नियंत्रण नहीं कर सकता, लेकिन वह रूसी तेल को विश्व भर में ले जाने के लिए आवश्यक सेवाओं को नियंत्रित कर सकता है. मौजूदा मूल्य प्रतिबंधों के तहत, पश्चिमी शिपिंग, बीमा और वित्तपोषण का उपयोग रूसी कच्चे तेल के परिवहन और बिक्री के लिए तभी किया जा सकता है, जब कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से कम हो.

रूस के तेल उद्योग पर सरकारी नियंत्रण वाली कंपनियों का दबदबा है, जिनके नेता राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी संबंध बनाए रखते हैं. इन रहस्यमय व्यक्तियों के लेन-देन अक्सर गुप्त रखे जाते हैं, लेकिन यह संभावना है कि वे और पुतिन का सैन्य-औद्योगिक परिसर - न कि रूसी जनता - उच्च तेल कीमतों से मुख्य रूप से लाभान्वित हो रहे हैं.
इसका आप पर क्या प्रभाव पड़ता है
आम अमेरिकी उपभोक्ताओं को शायद यह विचार पसंद न आए कि उनकी मेहनत से कमाई गई धनराशि इनमें से किसी भी समूह की पहले से ही भरी जेबों में जा रही है, लेकिन अल्पावधि में, कीमत चुकाने के अलावा और कोई चारा नहीं है. हालांकि, लंबी अवधि के लिए, दुनिया भर के लोग पहले से ही ऊर्जा के उन स्रोतों के बारे में सोच रहे हैं, बात कर रहे हैं और उन्हें चुन रहे हैं जो जीवाश्म ईंधन पर निर्भर नहीं हैं.
ये भी पढ़ें-
ईरान-अमेरिका शांतिवार्ता में कहां फंस गया पेंच? पाकिस्तान में तो लगातार लैंड कर रहे US विमान
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं