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अपनी ही पत्नी या गर्लफ्रेंड का यौन शोषण करने के ढूंढ रहे ऑनलाइन तरीके, ग्रुप में करते हैं चैट... रिपोर्ट

इन समुदायों का दायरा बहुत बड़ा है. कुछ समूहों में कथित तौर पर कई देशों में हजारों सदस्य हैं, जो मुख्य रूप से अंग्रेजी में संवाद करते हैं और चित्र, वीडियो और निर्देश शेयर करते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट की गुमनामी न केवल यूजर्स को सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि एक ऐसे सामुदायिक भाव को भी बढ़ावा देती है.

अपनी ही पत्नी या गर्लफ्रेंड का यौन शोषण करने के ढूंढ रहे ऑनलाइन तरीके, ग्रुप में करते हैं चैट... रिपोर्ट
इंटरनेट ने कुंठित लोगों को ग्रुप बनाकर गंदगी फैलाने की जगह दे दी है.
  • Motherless.com जैसे प्लेटफॉर्म पर नशीली दवाओं से बेहोश महिलाओं के हजारों वीडियो लाखों बार देखे जा चुके हैं
  • निजी चैट समूहों में नशीली दवाओं का प्रयोग और उन्हें छिपाने के तरीके विस्तार से चर्चा के विषय हैं
  • जांच में फ्रांस और पोलैंड में ऐसे नेटवर्क के सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी की खबरें भी सामने आई हैं

सीएनएन की एक महीने लंबी जांच में ऑनलाइन समुदायों के एक परेशान करने वाले वैश्विक नेटवर्क का खुलासा हुआ है. इसमें पुरुष खुलेआम अपनी ही पत्नी या गर्लफ्रेंड को नशीले पदार्थों से बेहोश करने और उनका यौन शोषण करने से संबंधित चर्चा, योजना और सामग्री शेयर करते हैं. मार्च और अप्रैल 2026 में 'एज इकुअल्स' सीरिज के तहत प्रकाशित इस जांच में तथाकथित 'रेप अकादमियों' के अस्तित्व का खुलासा हुआ है - ये छिपे हुए डिजिटल स्थान हैं, जहां दुर्व्यवहार को सामान्य माना जाता है और कुछ मामलों में इससे पैसा भी कमाया जाता है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, निजी मंचों और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर, सदस्य महिलाओं को बेहोश करने के लिए नशीले पदार्थों का उपयोग करने, पकड़े जाने से बचने और हमले को फिल्माने के चरण-दर-चरण तरीके शेयर करते हैं. पीड़ित अक्सर पत्नियां या प्रेमिकाएं होती हैं, जिन्हें उनके अपने घरों में निशाना बनाया जाता है.

62 मिलियन विजिट

पहचाने गए मुख्य प्लेटफॉर्मों में से एक है Motherless.com, जिस पर कथित तौर पर अकेले फरवरी 2026 में लगभग 62 मिलियन विजिट दर्ज की गईं. इस साइट पर 'नींद' या 'बेहोश' जैसी श्रेणियों के अंतर्गत हजारों वीडियो मौजूद हैं, जिनमें महिलाएं बेहोश दिखाई देती हैं. कुछ क्लिप में, अपराधी पीड़ितों की पलकें उठाते हैं - जिसे 'आईचेक' कहा जाता है - यह दिखाने के लिए कि उन्हें बेहोश किया गया है. ऐसे कई वीडियो को हजारों बार देखा जा चुका है.

जांचकर्ताओं को निजी चैट समूह भी मिले, जिनमें से एक 'Zzz' नाम से जाना जाता है, जहां यूजर महिलाओं को नशीली दवा देने के बारे में स्पष्ट सलाह शेयर करते थे, जिसमें पदार्थ, मात्रा और उन्हें भोजन या पेय में छिपाने के तरीके शामिल थे.

कुछ मामलों में, व्यक्तियों ने क्रिप्टोकरेंसी के बदले तथाकथित 'नींद लाने वाले तरल पदार्थ' बेचकर या लाइव-स्ट्रीम किए गए यौन शोषण का विज्ञापन करके लाभ कमाने का प्रयास किया. सेउटा में रहने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने टेलीग्राम पर कहा कि तरल पदार्थ की एक बोतल की कीमत 150 यूरो (लगभग 13,000 रुपये) होगी, और इसे स्वादहीन और गंधहीन बताया. उसने बताया, “आपकी पत्नी को कुछ भी महसूस नहीं होगा और उसे कुछ भी याद नहीं रहेगा.” 

फ्रांसीसी सांसद ने सुनाई आपबीती

फ्रांसीसी सांसद सैंड्रिन जोसो, जो खुद मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले दुर्व्यवहार की शिकार रही हैं. उन्होंने इन नेटवर्कों को “ऑनलाइन बलात्कार अकादमियां” और “हिंसा के स्कूल” बताया, जो अपराधियों को बिना किसी डर के दुर्व्यवहार सीखने में सक्षम बनाते हैं. 

जांच में वास्तविक दुनिया के परिणामों पर भी प्रकाश डाला गया है. एक अन्य मामले में, जो वाट्स को पता चला कि उनके 16 साल से पति ने उनके बेटे की नींद की दवा को उनकी चाय में पीसकर मिला दिया था और जब वह बेहोश थीं, तब उनका यौन उत्पीड़न किया था. वाट्स ने कहा, “हम इस बात से चिंतित रहते हैं कि हमारे पीछे कौन आ रहा है, सड़क पर कौन चल रहा है, या फेसबुक पर कौन हमें फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज रहा है. आप जानते हैं, हम देर रात पार्किंग में अपनी कार तक जाने से भी डरते हैं, लेकिन हम इस बात से चिंतित नहीं होते कि हम किसके बगल में सो रहे हैं. मुझे एहसास ही नहीं था कि मुझे ऐसा सोचना पड़ेगा.” 

उनके पूर्व पति ने 2018 में एक सामान्य रविवार को, अपने चार बच्चों के साथ चर्च से लौटने के बाद, दुर्व्यवहार की बात कबूल की. सीएनएन की रिपोर्टिंग के बाद, अधिकारियों ने पोलैंड में ऐसे नेटवर्क के कम से कम एक प्रमुख सदस्य की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया.

इन समुदायों का दायरा बहुत बड़ा है. कुछ समूहों में कथित तौर पर कई देशों में हजारों सदस्य हैं, जो मुख्य रूप से अंग्रेजी में संवाद करते हैं और चित्र, वीडियो और निर्देश शेयर करते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट की गुमनामी न केवल यूजर्स को सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि एक ऐसे सामुदायिक भाव को भी बढ़ावा देती है, जो आपराधिक व्यवहार को सामान्य बनाता है और प्रोत्साहित करता है.

पहले भी देखा गया पैटर्न

इस तरह के ऑनलाइन इकोसिस्टम के खतरों ने 2024 में डोमिनिक पेलिकोट मुकदमे के दौरान दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा. इस ऐतिहासिक मामले ने फ्रांस को दहला दिया और सहमति के बारे में दुनिया में बहस छेड़ दी. यह मामला 2024 के अंत में पेलिकोट और 50 अन्य पुरुषों की दोषसिद्धि के साथ समाप्त हुआ.

पेलिकोट को अपनी पत्नी गिजेल को बार-बार नशीली दवा देने और एक ऑनलाइन फोरम के माध्यम से संपर्क किए गए दर्जनों पुरुषों द्वारा उसके बलात्कार में सहायता करने के लिए 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई. उस पर कम से कम 70 पुरुषों द्वारा 200 से अधिक बार हमला किया गया, जिनमें से कुछ की पहचान कभी नहीं हो सकी.

इस मामले ने संक्षेप में यह उजागर किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म किस प्रकार समन्वित यौन हिंसा को सक्षम बना सकते हैं. संबंधित वेबसाइट को अंततः बंद कर दिया गया, लेकिन जांचकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इसी तरह के नेटवर्क अभी भी बड़े पैमाने पर और काफी हद तक बिना किसी रोक-टोक के काम कर रहे हैं.

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लेखक के बारे में
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विजय शंकर पांडेय
चीफ सब एडिटर
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