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मुज्तबा खामेनेई का 'गायब' रहना ईरान को कैसे बना रहा 'सर्वाइवर'?

अमेरिका के साथ जब से ईरान की जंग शुरू हुई है, तब से सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई कहीं दिखाई नहीं दिए हैं. उनकी सेहत को लेकर भी तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.

मुज्तबा खामेनेई का 'गायब' रहना ईरान को कैसे बना रहा 'सर्वाइवर'?
मुज्तबा खामेनेई जंग शुरू होने के बाद से दिखाई नहीं दिए हैं.
  • ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की लोकेशन और स्वास्थ्य स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है
  • फरवरी में अमेरिका-इजरायल के हमले में मुज्तबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हुए थे और वे अब कम सक्रिय हैं
  • सुप्रीम लीडर की अनुपस्थिति के कारण ईरान में निर्णय प्रक्रिया अस्पष्ट हो गई है और आंतरिक गतिरोध बढ़ा है
नई दिल्ली:

अमेरिका से जंग के बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई कहां है? इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है. जब से उन्हें सुप्रीम लीडर बनाया गया है, तब से उन्हें न तो किसी ने देखा है और न ही उनकी आवाज सुनी है. मुज्तबा के जो भी संदेश आए, उन्हें टीवी पर न्यूज एंकर ने पढ़ा. सोशल मीडिया पर उनके मैसेज पोस्ट किए गए. यहाँ तक कि उनके संदेश दिखाने के लिए ईरान ने कई बार AI वीडियो का भी इस्तेमाल किया है. इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं मुज्तबा या तो अस्वस्थ हैं या फिर विदेश में हैं.

28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले में तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए थे. उनकी मौत के लगभग हफ्तेभर बाद 8 मार्च को मुज्तबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया था. लेकिन सुप्रीम लीडर बनने के बाद से मुज्तबा दिखाई ही नहीं दिए. जबकि उनके पिता अयातुल्लाह अली खामेनेई हर हफ्ते देश को संबोधित करते थे. वह हमेशा चर्चा में बने रहते थे और हर मामले में उनका दखल होता था.

कहां हैं मुज्तबा खामेनेई?

मुज्तबा खामेनेई के बारे में कहा जा रहा है कि वह अस्पताल में भर्ती हैं. हाल ही में न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया था कि 28 फरवरी को हुए हमले में मुज्तबा खामेनेई भी बुरी तरह घायल हो गए थे. 

रॉयटर्स ने करीबी सूत्रों के हवाले से बताया था कि इस हमले में उनका चेहरा बुरी तरह से बिगड़ गया था और उनके पैर में भी फ्रैक्चर आया था. सूत्रों ने यह भी बताया था कि वह ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं और जंग से जुड़े सारे अहम मुद्दों पर फैसले लेने में शामिल हैं.

CNN ने इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में ईरान प्रोजेक्टर के डायरेक्टर अली वाएज के हवाले से बताया है कि मुज्तबा शायद ऐसी स्थिति में नहीं हैं, जहां वह असल में कोई अहम फैसला ले सकें. 

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फैसले कौन ले रहा है?

ईरान में अब फैसले कौन ले रहा है? यह साफ नहीं है. इसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. पिछले हफ्ते जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने का ऐलान किया था. 

इसके बाद ईरान की न्यूज एजेंसी तस्नीम ने कहा कि अराघची की एक गलत और अधूरी पोस्ट ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कन्फ्यूजन पैदा कर दिया है. जानकारों का कहना है कि IRGC अभी होर्मुज खोलने के फैसले पर सहमत नहीं थी.

CNN के मुताबिक, सुप्रीम लीडर की कथित गैर-मौजूदगी ने ईरानी नेताओं को बीच मझधार में फंसा दिया है. ईरानी नेता बाहर के साथ-साथ आंतरिक गतिरोध से भी जूझ रहे हैं. उन पर दबाव है कि ट्रंप की टिप्पणियों से होने वाले नुकसान को कैसे संभाले? और एक देश के अंदर का कट्टरपंथी खेमा है जो अमेरिका के साथ किसी भी तरह के समझौते को सरेंडर मानता है.

अब तक, सुप्रीम लीडर के बिना कोई भी डील नहीं होती थी. CNN का कहना है कि अब ईरान शायद उस दौर में आ गया है, जहां सुप्रीम लीडर की सीधी सहमति की जरूरत नहीं रही.

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सुप्रीम लीडर का 'गायब' रहना ही फायदेमंद?

28 फरवरी से जंग शुरू होने के बाद से ऐसी कई खबरें आई हैं, जिनमें दावा किया कि ईरान में सत्ता और सेना के बीच मतभेद हैं.

अब्बास अराघची ने जब होर्मुज खोलने का ऐलान किया तो उनकी आलोचना की गई. स्थानीय मीडिया ने आलोचना की कि इससे ट्रंप को अपनी जीत का दावा करने का मौका मिल गया. उसके बाद IRGC ने होर्मुज पर अपना कंट्रोल होने की बात कही. इसके बाद मीडिया में फिर आपसी कलह की बात चली.

अली वाएज ने CNN से कहा, 'यह शासन अभी भी खतरे से बाहर नहीं है. यह आज भी अस्तित्व की लड़ाई है और किसी भी समय जंग फिर से शुरू हो सकती है, इसलिए वे अभी आपस में लड़ने की स्थिति में नहीं हैं.'

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई का 'गायब' रहना ईरानी नेताओं के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है. वाएज ने कहा, 'उनके नाम पर अपने विचार थोप देना, भले ही वे उनसे सहमत न हों, ईरानी नेताओं के लिए आलोचना से बचने का एक अच्छा तरीका है. ऐसे व्यक्ति की बातों का कोई विरोध नहीं कर सकता, जो खुद सामने नहीं है.'

उनका कहना है कि इससे अमेरिका के साथ बात कर रहे नेताओं को भी ज्यादा खुली छूट मिलती है. वाएज ने कहा, 'मुज्तबा अभी ऐसी स्थिति में नहीं हैं जहां वह असल में कोई अहम फैसला ले सकें या बातचीत को कंट्रोल कर सकें. सिस्टम उनका इस्तेमाल बड़े और अहम फैसलों के लिए आखिरी मंजूरी लेने के लिए कर रहा है, न कि बातचीत की रणनीति बनाने के लिए.'

उन्होंने आगे कहा, 'यह जानबूझकर मुज्तबा की संलिप्तता को उजागर करती है, क्योंकि यह वार्ताकारों को अंदरूनी आलोचना से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच देती है. मुज्तबा के पिता अयातुल्लाह अली खामेनेई हर दिन सामने आकर बातचीत की स्थिति पर टिप्पणी किया करते थे. लेकिन मुज्तबा इस पूरी प्रक्रिया से नदारद हैं, इसलिए अपने विचारों को उनके नाम से जोड़ना ईरानी वार्ताकारों के लिए खुद को आलोचना से बचाने का एक अच्छा बहाना है.'

लेकिन इससे ईरान को नुकसान भी हो रहा है. क्योंकि अब यहां पर पावर बैलेंस बिखर गया है. इजरायल के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज में ईरान मामलों के एक्सपर्ट डैनी सिट्रिनोविज ने X पर लिखा, 'अगर जंग से पहले बातचीत मुश्किल थी तो अब यह कहीं ज्यादा हो गई है. क्योंकि ईरान अब ऐसे सिस्टम का सामना कर रहा है, जो पहले से कहीं ज्यादा बंटा हुआ और कट्टरपंथी है.' उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा सिस्टम है जो इस लड़ाई में अपनी मजबूती को 'जीत' के रूप में देखता है.

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