अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान की एक भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई. इसके बाद, अतीक के दो बेटों (अली और उमर) को जनाजे में शामिल होने के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच क्रमशः झांसी और लखनऊ जेल से प्रयागराज लाया गया. उमर अहमद को लखनऊ से लाते समय उसके समर्थकों का एक बड़ा काफिला (30 से अधिक गाड़ियां) पुलिस वैन के पीछे चल रहा था. समर्थकों को डर था कि कहीं विकास दुबे कांड की तरह गाड़ी न पलट जाए या एनकाउंटर न हो जाए. आरोप है कि इस तेज रफ्तार काफिले ने नवाबगंज और प्रतापगढ़ के अख्तियारी टोल प्लाजा पर भारी दबंगई दिखाई. टोल टैक्स देने के बजाय बैरियर तोड़ दिए गए, कर्मचारियों को धमकियां दी गईं और उन पर गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया गया. इस बवाल पर पुलिस ने हत्या के प्रयास (धारा 109/1) समेत कई गंभीर धाराओं में 28 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल कर आरोपियों की पहचान कर रही है. इस मुद्दे पर भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. भाजपा का कहना है कि योगीराज में केवल अपराधी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, जबकि सपा नेता अबू आजमी ने इस हादसे की निष्पक्ष जांच की मांग की है. हादसे में घायल हुए अबान के दो साथियों (उमर और जैद) की हालत बेहद नाजुक है और उन्हें दिल्ली के मेदांता व मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि तीसरे साथी फारूक की हालत स्थिर है.