विज्ञापन

ईरान को भी मिला 'मुस्लिम NATO' में शामिल होने का न्योता? मुनीर के तेहरान दौरे से पहले बड़ा दावा

मक्का संधि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर बनाया है. इस रक्षा समझौते के तहत किसी भी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा.

ईरान को भी मिला 'मुस्लिम NATO' में शामिल होने का न्योता? मुनीर के तेहरान दौरे से पहले बड़ा दावा
ईरान पहुंचने वाले हैं पाकिस्तान आर्मी के चीफ आसिम मुनीर (फाइल फोटो- AFP)
  • ईरान को मक्का समझौते में शामिल होने का न्योता मिला है, जो सऊदी अरब, तुर्की और पाक ने बनाया गया है- रिपोर्ट
  • अभी तक ईरान और समझौते के सदस्य देशों ने इस न्योते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है
  • बांग्लादेश ने भी इस मुस्लिम नाटो जैसे सुरक्षा समझौते में शामिल होने पर विचार करने का संकेत दिया है

क्या अब ईरान भी 'मुस्लिम नाटो' कहे जाने वाले मक्का संधि में शामिल होने वाला है? मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक सीनियर ईरानी अधिकारी ने कहा कि ईरान को भी मक्का समझौते में शामिल होने का न्योता मिला है. यह संधि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर बनाया है, जिसमें किसी एक पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा. अल मयादीन की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी संसद की 'खानेह मेल्लत' के प्रमुख मेहदी रहीमी ने एक इंटरव्यू में न्योता मिलने का दावा किया. है

यह खबर उस समय सामने आई है जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर सोमवार को तेहरान का दौरा करेंगे. पाकिस्तान खुद को अमेरिका ईरान जंग में शांतिदूत दिखाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि अभी तक इलाके में शांति और सुरक्षा लाने की उसकी कोशिशें फेल साबित हुई हैं.

अभी कोई आधिकारिक मुहर नहीं

यह ध्यान देना जरूरी है कि ईरान के विदेश मंत्रालय या इस समझौते सदस्य तीनों देशों (पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की) में से किसी ने भी अभी तक आधिकारिक तौर पर इस न्योते की पुष्टि नहीं की है. रिपोर्ट के अनुसार रहीमी ने अल मयादीन को बताया कि "ईरान को मक्का समझौते में शामिल होने का न्योता मिला है और इस मामले पर विचार किया जा रहा है."

कथित तौर पर उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के देश क्षेत्रीय सुरक्षा कवच की ओर बढ़ रहे हैं. गौरतलब है कि मक्का समझौते पर 7 अगस्त को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए थे.

इसे मुस्लिम नाटो क्यों कहा जा रहा? क्या बांग्लादेश भी शामिल होगा?

यह समझौता आपसी सुरक्षा का सिद्धांत तय करता है. इसका मतलब है कि अगर तीनों देशों में से किसी पर भी हमला होता है, तो उसे उन सभी पर हमला माना जाएगा. तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने इस व्यवस्था की तुलना नाटो (NATO) संधि के आर्टिकल 5 से की. चूंकि इसमें सिर्फ मुस्लिम देशों को शामिल करने का पैटर्न दिख रहा है, कई एक्सपर्ट इसे 'मुस्लिम नाटो' नाम दे रहे हैं. तुर्की ने इस बात पर जोर दिया कि यह समझौता ईरान या किसी खास देश के खिलाफ नहीं है.

बांग्लादेश भी संकेत दे रहा है कि वह इस समझौते में शामिल हो सकता है. बांग्लादेश के दो मंत्रियों ने कहा है कि ढाका, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच हाल में हुए रक्षा गठबंधन में शामिल होने पर विचार कर सकता है.

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान ने किए थे अत्याचार और तुर्किये से नाता नहीं, फिर क्यों 'इस्लामिक नाटो' में जाना चाहता है बांग्लादेश

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Mecca Joint Defence Agreement, Muslim Nato, US Iran War, Mecca Joint Defence Agreement News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com