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'यह अन्याय है...BCCI को रणजी को खत्म कर देना चाहिए' टीम इंडिया में जगह नहीं मिलने पर अजीत अगरकर पर भड़का पूर्व कप्तान

Dilip Vengsarkar on Auqib Nabi Non Selection: अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट और वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया गया है. इस टीनम में आकिब नबी को जगह नहीं मिलने पर पूर्व कप्तान दिलीप वेंगसरकर पर निशाना साधा है.

'यह अन्याय है...BCCI को रणजी को खत्म कर देना चाहिए' टीम इंडिया में जगह नहीं मिलने पर अजीत अगरकर पर भड़का पूर्व कप्तान

Dilip Vengsarkar on Auqib Nabi Non Selection: अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समीति ने बीते दिनों अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट और वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम चुनी है. सेलेक्शन समेटी ने चार नए चेहरों को मौका दिया, जो आईपीएल में धमाकेदार प्रदर्शन कर रहे हैं. हालांकि, रणजी ट्रॉफी में विकटों का ढेर लगाने वाले जम्मू कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को शामिल नहीं किया गया है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने घरेलू रेड-बॉल क्रिकेट खेलने को लेकर कड़ा रूख अपना रखा है, लेकिन घरेलू क्रिकेट को अहमियत पर ज़ोर देने के बावजूद, सिलेक्टर्स ने रणजी ट्रॉफी के सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़, आकिब नबी को नज़रअंदाज़ कर दिया. 

भारत के पूर्व कप्तान दिलीप वेंगसरकर को अजीत अगरकर एंड कंपनी का यह फैसला बिल्कुल गले नहीं उतरा है. उन्होंने BCCI से कहा कि अगर भारत के सबसे बड़े घरेलू रेड-बॉल इवेंट में परफॉर्मेंस पर भी ध्यान नहीं दिया जाता है, तो रणजी ट्रॉफी को खत्म कर देना चाहिए.

आकिब ने पिछले रणजी ट्रॉफी कैंपेन में 60 विकेट लेकर जम्मू और कश्मीर को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. फिर भी, सिलेक्शन कमिटी ने पेसर को नज़रअंदाज़ करके बॉलिंग यूनिट में मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, मानव सुथार, गुरनूर बराड़ और हर्ष दुबे जैसे खिलाड़ियों को चुना.

पूर्व कप्तान वेंगसरकर ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा,"सिलेक्टर्स का उन्हें नज़रअंदाज़ करने का फ़ैसला बिल्कुल अजीब और हैरान करने वाला है. यह किस तरह का सिलेक्शन है? यह बिल्कुल मंज़ूर नहीं है. यह नाइंसाफ़ी है." "क्या आप सोच सकते हैं कि नबी की अभी क्या हालत होगी? उन्होंने रणजी ट्रॉफी में 60 विकेट लिए हैं. उन्होंने इसके लिए बहुत मेहनत की है और वह बाकी सबसे आगे रहने के हक़दार हैं." वेंगसरकर ने आगे कहा,"अगर डोमेस्टिक क्रिकेट में परफॉर्मेंस कोई मापदंड नहीं है, तो BCCI को डोमेस्टिक क्रिकेट खत्म कर देना चाहिए."

वेंगसरकर ने ज़ोर देकर कहा,"आप किसी बॉलर को उसकी विकेट लेने की काबिलियत के आधार पर चुनते हैं. वह 130  की रफ़्तार से बॉलिंग कर सकता है, लेकिन ज़रूरी बात उसकी विकेट लेने की काबिलियत है. इस लड़के ने विकेट लेने में ज़बरदस्त निरंतरता दिखाई है." उन्होंने कहा,"उसे तैयार करने का यह सबसे अच्छा समय था. जब कोई खिलाड़ी फ़ॉर्म में होता है, तो आप उसे वहीं मौका देते हैं. आप तब तक इंतज़ार नहीं करते जब तक वह कॉन्फिडेंस, फिटनेस या भूख न खो दे."

नबी की अनदेखी से सिर्फ़ वेंगसरकर ही हैरान नहीं हैं. भारत के पूर्व ऑलराउंडर इरफ़ान पठान ने भी इस फ़ैसले पर सवाल उठाए. उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया,"रणजी ट्रॉफ़ी के प्रदर्शन को हतोत्साहित न करें."

वहीं नबी को क्यों मौका नहीं मिला और कैसे गुरनूर बरार बाजी मार ले गए, इस पर रिपोर्ट में बोर्ड के एक सूत्र के हवाले से दावा किया गया,"हर रणजी सीज़न में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाला और विकेट लेने वाला खिलाड़ी होता है. तो क्या सिलेक्टर्स को सिर्फ़ आंकड़ों से बदल देना चाहिए?" "गुरनूर ने इंडिया A के लिए अच्छा किया है और मुंबई के ख़िलाफ़ पंजाब के लिए आठ विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी मैचों में 11 विकेट भी लिए हैं."

मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, अगरकर ने बताया कि नबी के परफॉर्मेंस पर विचार किया गया था, लेकिन सिलेक्टर्स ने गुरनूर को चुनना पसंद किया.

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