- अमेरिका- इजरायल द्वारा ईरान पर 28 फरवरी को हमला किया गया जिसमें एक लड़कियों के स्कूल को भी निशाना बनाया गया था
- इस हमले में लगभग 150 मासूम बच्चियों की मौत हुई
- अमेरिकी रक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि सेना इस घटना की गहनता से जांच कर रही है
अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 28 फरवरी को जब ईरान पर पहला हमला बोला तो उसके हाथों के सबसे बड़ा गुनाह यह हुआ कि उसने लड़कियों के एक स्कूल को भी निशाना बनाया. इस हमले में 150 मासूम बच्चियों की मौत हो गई. अमेरिका और इजराल के हाथ खून से सने हैं और पूरी दुनिया सवाल कर रही है कि आखिर यह कैसी जंग है जहां मासूम बच्चियों को निशाना बनाना जायज हो जाए. अगर यह गलती से हुआ हमला था तो गलती किसकी थी. इस सवालों के बीच एक ऐसी रिपोर्ट आई है जो तस्वीर को कुछ हद तक साफ करती है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्सी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी सैन्य जांचकर्ताओं का मानना है कि संभव है कि अमेरिकी सेना ही ईरान के एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले के लिए जिम्मेदार हो. हालांकि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है. यह जानकारी दो अमेरिकी अधिकारियों ने रॉयटर्स को दी है. रिपोर्ट के अनुसार रॉयटर्स यह पता नहीं लगा सका कि जांच में और क्या-क्या जानकारी सामने आई है. यह भी साफ नहीं है कि इस शुरुआती अनुमान के लिए कौन-सा सबूत मिला, इस हमले में किस तरह का हथियार इस्तेमाल हुआ, असली जिम्मेदार कौन है या अमेरिका ने स्कूल को क्यों निशाना बनाया होगा.
रॉयटर्स यह भी पता नहीं लगा सका कि जांच कितने समय तक चलेगी या अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले अमेरिकी जांचकर्ता और कौन-से सबूत ढूंढ रहे हैं.
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ईरान के स्कूल में बहे खून
दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में स्थित इस लड़कियों के स्कूल पर शनिवार को हमला हुआ था. यह वही दिन था जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे. जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के लिए ईरान के राजदूत अली बहरीन ने कहा कि इस हमले में 150 छात्राओं की मौत हुई. हालांकि रॉयटर्स इस संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है.
पेंटागन ने रॉयटर्स के सवालों को अमेरिकी सेना के यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड के पास बढ़ा दिया. यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने कहा, “क्योंकि घटना की जांच चल रही है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा.” इसी तरह व्हाइट हाउस ने जांच पर सीधे टिप्पणी नहीं की. लेकिन प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने रॉयटर्स को दिए बयान में कहा, “जब तक युद्ध विभाग इस मामले की जांच कर रहा है, यह भी याद रखना चाहिए कि ईरान की सरकार नागरिकों और बच्चों को निशाना बनाती है, अमेरिका नहीं.”
बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस घटना के बारे में पूछे जाने पर हेगसेथ ने कहा था, “हम इसकी जांच कर रहे हैं. हम कभी भी नागरिक ठिकानों को निशाना नहीं बनाते. लेकिन हम इस मामले को देख रहे हैं और जांच कर रहे हैं.”
वहीं अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि अमेरिका जानबूझकर किसी स्कूल को निशाना नहीं बनाएगा. रूबियो ने कहा, “अगर यह हमला हमारी तरफ से हुआ होगा तो युद्ध विभाग इसकी जांच करेगा. इस बारे में सवाल उन्हीं से पूछे जाने चाहिए.”
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