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खामेनेई को मार गिराया...अब क्या होगा इजरायल और अमेरिका का मिडिल ईस्ट में एंड गेम? समझें पूरी बात

खामेनेई की मौत के बाद मिडिल ईस्ट के समीकरण बदल गए हैं. अमेरिका और इजरायल अब ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट करने और हिजबुल्लाह-हमास जैसे संगठनों की सप्लाई लाइन काटने की निर्णायक तैयारी में हैं.

खामेनेई को मार गिराया...अब क्या होगा इजरायल और अमेरिका का मिडिल ईस्ट में एंड गेम? समझें पूरी बात
  • मिडिल ईस्ट में अयातुल्ला खामेनेई का हटना शिया क्रेसेंट की ताकत के खत्म होने का संकेत होगा
  • अमेरिका सऊदी अरब पर दबाव डालेगा ताकि वह इजरायल के साथ आधिकारिक रिश्ते स्थापित कर सके
  • इजरायल का लक्ष्य ईरान के नतान्ज और फोर्डो जैसे परमाणु ठिकानों को रणनीतिक रूप से निशाना बनाना
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मिडिल ईस्ट के नक्शे से अयातुल्ला अली खामेनेई का हटना केवल एक सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि उस शिया क्रेसेंट की कमर टूटना होगा जिसने आधी सदी से पश्चिमी एक युग का अंत है. यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि उस दशकों पुरानी व्यवस्था का ढहना है जिसने इजरायल और अमेरिका की नींद उड़ा रखी थी. लेकिन असली खेल खामेनेई के बाद शुरू होगा. यह एक ऐसा 'एंडगेम' है, जिसे अमेरिका और इजरायल ने सालों पहले कागज पर उतार लिया था. यह ईरान के पूरी तरह बिखरने और इजरायल के वर्चस्व की नई इबारत लिखने का मौका है. मिडिल ईस्ट में नई इबारत कैसे लिखी जाएगी? आइए पूरी कहानी समझते हैं.

अमेरिका सऊदी अरब पर बनाएगा दबाव

अमेरिका अब वेट एंड वॉच की नीति त्याग कर रियाद पर इजरायल के साथ आधिकारिक संबंध बनाने का दबाव बनाएगा. सऊदी अरब और इजरायल का मिलन ईरान के लिए कूटनीतिक हार जैसा होगा. इस गठबंधन के जरिए अमेरिका पूरे क्षेत्र को एक ऐसी घेराबंदी में बदल देगा, जहां ईरान चाहकर भी दोबारा सिर नहीं उठा पाएगा. यह मिडिल ईस्ट के पूरे इस्लामिक शासन के समीकरण बदल कर रख देगा. इससे ईरान पूरी तरह अलग-थलग हो जाएगा.

परमाणु ठिकानों का खात्मा करने की तैयारी

ईरान पर बाहर से इजरायल और अमेरिका ने हमला किया है. लेकिन इससे बड़ा हमला वो अपने देश में झेल रहा है. दरअसल ईरान इन दिनों नेतृत्व के संकट और आंतरिक विद्रोह से जूझ रहा है. ऐसे में इजरायल का प्रहार सैन्य से ज्यादा रणनीतिक होगा. इजरायल का टारगेट अब केवल सीमाएं नहीं, बल्कि नतान्ज और फोर्डो जैसे परमाणु केंद्र होंगे. इजरायल इस मौके का इस्तेमाल ईरान की दशकों की मेहनत को मलबे में तब्दील करने के लिए करेगा, ताकि भविष्य में किसी बड़े संकट को टाला जा सके.

हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे संगठन हो रहे अनाथ

खामेनेई की मौत के बाद हिजबुल्लाह, हमास और हूतियों की फंडिंग और वैचारिक ऑक्सीजन की सप्लाई लाइन कट जाएगी. बिना सुप्रीम लीडर के दिशा-निर्देश के ये संगठन आपसी गुटबाजी में उलझ सकते हैं. इजरायल के लिए लेबनान से लेकर गाजा और यमन तक इन संगठनों को जड़ से मिटाने का यह सबसे सटीक और अंतिम मौका होगा. इसके नतीजे भी आना शुरू हो गए हैं. इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर हमले किए और हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया.

बीजिंग और मॉस्को के लिए दरवाजे होंगे बंद

ईरान के चीन और रूस से अच्छे संबंध माने जाते हैं. ऐसे में अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता में रूस या चीन की एंट्री है. अमेरिका की रणनीति अब तेहरान में एक ऐसी व्यवस्था थोपने की होगी जो न केवल बीजिंग के प्रभाव को रोके, बल्कि रूस के साउथ मोर्चे को भी कमजोर कर दे. ईरान के टूटने के बाद वहां का कंट्रोल अपने हाथ में रखना अमेरिका के लिए वैश्विक महाशक्ति बने रहने की सबसे जरूरी शर्त बन जाएगी.

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