- अमेरिका की खुफिया एजेंसियों का मानना है कि अब ईरान जब चाहे तब होर्मुज के रास्ते को बंद कर सकता है- रिपोर्ट
- युद्ध के बाद ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की एक नई और बहुत शक्तिशाली क्षमता मिल गई है
- "हमने अब होर्मुज पर असली कंट्रोल ईरान को दे दिया है- यह किसी भी परमाणु हथियार से ज्यादा ताकतवर हथियार है"
अमेरिका गोला-बारूद लेकर निकला तो था ईरान को तबाह करने लेकिन उसका यह दांव उलटा पड़ गया है. अमेरिका ने ही ईरान के हाथ में वो ब्रह्मास्त्र दे दिया है, जिसकी ताकत का अंदाजा ईरान को नहीं था. यह बात खुद अमेरिका की खुफिया एजेंसियां मान रही हैं. यहां हम जिस ब्रह्मास्त्र की बात कर रहे हैं, वह है होर्मुज का रास्ता रोकना. दरअसल अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने हाल ही में यह निष्कर्ष निकाला है कि अब ईरान जब चाहे तब होर्मुज के रास्ते को प्रभावी रूप से बंद कर सकता है. इसे खुफिया एजेंसी परमाणु से बड़ा हथियार मान रही हैं. यह वही अहम समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया के कुल तेल कारोबार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है. यह रिपोर्ट CNN ने छापी है.
अमेरिका की खुफिया एजेंसिया अब मान रही हैं कि युद्ध के बाद ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की एक नई और बहुत शक्तिशाली क्षमता मिल गई है. अब इसे ब्रह्मास्त्र नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे.
डील तो डन लेकिन ईरान को ताकत का एहसास हो गया
अमेरिका और ईरान में डील हो गई है और शुक्रवार को इसपर साइन होगा. इस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर आधिकारिक मुहर लगने से पहले ही होर्मुज खुल गया है. डील के बाद 60 दिनों में दोनों देशों के बीच परमाणु वार्ता शुरू होगी. यह तो हो गई मौजूदा संकट को टालने वाली बात. दूसरा पहलू है कि इस पूरे जंग के दौरान ईरान ने दिखा दिया कि वह होर्मुज का रास्ता बंद कर सकता है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन बताते हैं कि भविष्य में भी ऐसा दोबारा हो सकता है.
होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह फिर से खोलने के लिए अमेरिका को ईरान के साथ लंबी और गहन (इंटेंस) बातचीत करनी पड़ी. इससे यह साफ होता है कि ईरान के पास अभी भी काफी प्रभाव और दबाव बनाने की क्षमता है. ईरान को भी लगता है कि वह भविष्य में भी होर्मुज को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि उसके पास अभी भी हथियारों का बड़ा भंडार मौजूद है- इसमें मिसाइलें, ड्रोन, मिसाइल लॉन्चर और सैकड़ों छोटी तेज रफ्तार वाली नावें शामिल हैं.
दूसरे सूत्र ने कहा कि ईरान ने यह भी सीख लिया है कि वह खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे (एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर) पर चुनिंदा हमले करके अपने फायदे के लिए दबाव बना सकता है. युद्ध के दौरान उसने ऐसा प्रभावी तरीके से किया और अब यह उसके पास भविष्य का एक और हथियार है.
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