- राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बैकअप योजना के तहत इरिट्रिया जैसे देशों से दोस्ती बढ़ाने की रणनीति अपनाई है
- इरिट्रिया की भौगोलिक स्थिति लाल सागर के किनारे होने के कारण रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है
- चीन अफ्रीकी देशों में अपनी आर्थिक और सैन्य साझेदारी मजबूत कर रहा है, जिबूती में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और नाजुक हालात के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब बैकअप प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है. खाड़ी देशों को जंग में उलझाकर ना सिर्फ अमेरिका बल्कि चीन भी योजना बनाने लगा है. इसके लिए अब इन दोनों देशों ने अफ्रीकी देश इरिट्रिया को चुना है. ट्रंप अब इरिट्रिया जैसे देशों से दोस्ती बढ़ाकर ईरान के खिलाफ अपना बैकअप तैयार कर रहे हैं. वो इरिट्रिया पर लगे प्रतिबंधों को हाटना चाहते हैं.
अमेरिका जहां इरीट्रिया पर लगे प्रतिबंधों को हटाकर उसका इस्तेमाल करना चाहता है. वहीं चीन भी इन देशों से अपनी आर्थिक साझेदारी मजबूत करना चाहता है. वजह है इसकी भौगोलिक संरचना.

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इरिट्रिया देश क्यों है इतना खास?
क्या सोचता है अमेरिका?
अमेरिका ने पिछले साल ही 12 देशों पर ट्रैवल बैन लगाया था, जिसमें इरिट्रिया भी शामिल था. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने 19 चिंताजनक देशों के लोगों के ग्रीन कार्ड, अमेरिकी नागरिकता और अन्य आव्रजन संबंधी आवेदनों पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. इन माने गए ‘चिंताजनक देशों' की सूची में भी इरिट्रिया को शामिल किया गया था. अब अमेरिका इरिट्रिया को कई तरह की राहत देकर अपने संबंध सुधारना चाहता है.

दरअसल ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर दबदबा बना रखा है. इसके अलावा यमन में हूती विद्रोही रेड सी और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दे रहे हैं. इन परिस्थितियों में डोनाल्ड ट्रंप ये चाहते हैं कि रेड सी में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए इरिट्रिया जैसे देशों से संबंध अच्छे किए जाएं, ताकि ईरान के खिलाफ उनकी बैकअप स्ट्रैटेजी मजबूत हो.
चाइना का प्लान क्या?
चीन दुनिया भर के देशों को अपनी कर्ज नीति में फंसा रहा है. अफ्रीकी देशों पर भी वह पिछले एक दशक से ज्यादा समय से अपना फोकस बढ़ाए हुए है. साल 2017 में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण अफ्रीकी देश जिबूती में चीन ने अपना पहला ओवरसीज मिलिट्री बेस स्थापित किया था. जिबूती रेड सी और अदन की खाड़ी के किनारे स्थित है. इसके अलावा चीन अन्य अफ्रीकी देशों को भी कम कीमत पर और सस्ते लोन के जरिए सैन्य साजो-सामान भी मुहैया कराता है.

अफ्रीकी देश फ्यूल, खाने और फर्टिलाइजर के इंपोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की वजह से अफ्रीकी देश पर वैश्विक आर्थिक संकट का असर ज्यादा होने की उम्मीद है. चीन ने फरवरी में घोषणा की थी कि वह व्यापार संबंधों को बढ़ाने के लिए 1 मई से 53 अफ्रीकी देशों से सभी इम्पोर्ट के लिए जीरो-टैरिफ स्कीम लागू करेगा.
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