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इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के बुरे दिन हो गए शुरू, ट्रंप प्रशासन निपटाने की तैयारी में जुटा

इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के प्रति ट्रंप की शत्रुता उनके पहले कार्यकाल से ही चली आ रही है. मार्च 2020 में, ICC के प्रॉसिक्यूटर ने अफगानिस्तान में एक जांच शुरू की थी, जिसमें अमेरिकी सैनिकों द्वारा किए गए संभावित अपराधों की जांच भी शामिल थी.

इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के बुरे दिन हो गए शुरू, ट्रंप प्रशासन निपटाने की तैयारी में जुटा
ट्रंप का इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट से पुराना छत्तीस का आंकड़ा है. (फोटो-IANS)
  • अमेरिका ICC अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने और अन्य देशों से ICC से हटने के लिए दबाव डालने की रणनीति अपना रहा है
  • अमेरिकी विदेश विभाग शीर्ष अधिकारियों की अगुवाई में ICC को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने का अभियान चला रहा है
  • ICC ने ट्रंप प्रशासन पर मुकदमा दायर किया है, जिसमें उनके प्रतिबंधों को गैरकानूनी बताया गया है

अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि ट्रंप प्रशासन इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) को खत्म करने का प्रयास कर रहा है. उसे वह अमेरिकी संप्रभुता के लिए खतरा मानता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश जैसे अन्य अमेरिकी अधिकारियों का लंबे समय से कहना रहा है कि आईसीसी को अमेरिकियों, विशेष रूप से सैन्य कर्मियों की जांच और उन पर मुकदमा चलाने का अधिकार नहीं होना चाहिए. रॉयटर्स ने इस साल की शुरुआत में पाया था कि ट्रंप प्रशासन ने आईसीसी अधिकारियों के खिलाफ प्रतिबंधों का समर्थन किया था, जिसका एक कारण यह भी था कि भविष्य में उन्हें या उनके अधिकारियों को विदेशों में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए जवाबदेह ठहराने के किसी भी प्रयास को रोका जा सके.

ICC की स्थापना 2002 में अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने युद्ध अपराधों, नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों पर मुकदमा चलाने के लिए की थी. यह अदालत तभी अपना अधिकार क्षेत्र लागू करती है जब कोई सदस्य देश खुद ऐसे अत्याचारों पर मुकदमा चलाने में असमर्थ या अनिच्छुक हो. अमेरिका कभी भी इस अदालत का सदस्य नहीं रहा है.

कैसे अमेरिका कतरेगा पर

नाम न बताने की शर्त पर विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि ICC को निशाना बनाने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. इनमें यात्रा पर रोक, वीजा रद्द करना, ICC और उससे जुड़ी संस्थाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाना और दूसरे देशों पर ICC से हटने के लिए कूटनीतिक दबाव डालना शामिल है.  विदेश विभाग के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अन्य शीर्ष अमेरिकी अधिकारी एक अभियान के तहत अन्य देशों पर दबाव डाल रहे हैं, जिसका उद्देश्य इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करना और यह सुनिश्चित करना है कि वह अमेरिकियों को निशाना न बना सके.

अधिकारी ने कहा कि जो देश अमेरिकी लॉ एनफोर्समेंट के साथ पार्टनर हैं, जहां अमेरिकी सेना मौजूद है, या जिन्हें अमेरिकी सुरक्षा घेरे से फायदा मिलता है, उनसे अमेरिकी अधिकारियों और सैनिकों पर मुकदमा चलाने के ICC के कथित अधिकार को अस्वीकार करने के लिए कहा जा रहा है. अधिकारी ने कहा कि जो देश अमेरिकी मदद पर निर्भर रहते हुए भी ICC को अस्वीकार करने से इनकार करते हैं, उन पर ज्यादा कड़ी नजर रखे जाने की संभावना है. अधिकारी ने कहा, "हम दिलचस्पी के साथ देखेंगे कि कौन से देश उन अमेरिकियों के लिए इस खतरे के खिलाफ हमारे साथ आते हैं जो दूसरों की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालने को तैयार हैं."

ट्रंप पर भी कर दिया मुकदमा

इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के प्रति ट्रंप की शत्रुता उनके पहले कार्यकाल से ही चली आ रही है. मार्च 2020 में, ICC के प्रॉसिक्यूटर ने अफगानिस्तान में एक जांच शुरू की थी, जिसमें अमेरिकी सैनिकों द्वारा किए गए संभावित अपराधों की जांच भी शामिल थी, लेकिन 2021 से, इसने अमेरिका की भूमिका को कम प्राथमिकता दी है और अफगान सरकार और तालिबान फोर्स द्वारा किए गए कथित अपराधों पर ध्यान केंद्रित किया है. नवंबर 2024 में जब ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति चुने गए और आईसीसी ने उनके सहयोगी, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर अभियोग लगाया, तब आईसीसी अधिकारियों को दंडित करने की योजना के साथ यह शत्रुता फिर से सामने आई. पिछले महीने, इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के तीन न्यायाधीशों ने पिछले साल उन तीनों पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर ट्रंप और उनके प्रशासन पर मुकदमा दायर किया, जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि ये उपाय गैरकानूनी थे.

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