- बांग्लादेश में भगवान राम की सबसे ऊंची मूर्ति बनाने वाले हरिदास को गिरफ्तार किया गया है
- हरिदास ने कहा कि मंदिर का प्रबंधन भक्तों के दान से होता है और उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है
- बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने हरिदास की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए उनकी रिहाई की मांग की है
बांग्लादेश में भगवान राम की सबसे ऊंची मूर्ति बनवा रहे व्यक्ति को पुलिस ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है. पुलिस ने बताया कि हरिदास चंद्र तरणी दास को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है. यह मामला 9.35 करोड़ टका के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है. दास ने गाइबांधा के पलाशबाड़ी में श्री श्री राधा गोविंद काली मंदिर में भगवान राम की 81 फीट ऊंची मूर्ति बनवाने का प्रस्ताव रखा था.
हरिदास ने आरोपों पर क्या कहा
बांग्लादेश की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रिमांड की सुनवाई के दौरान हरिदास ने अदालत से कहा कि वह मंदिर का प्रबंधन करते हैं और अगर मंदिर का प्रबंधन करने से वह अपराधी बन जाते हैं, तो वह कुछ नहीं कर सकते. दास ने आगे कहा कि संबंधित पैसा भक्तों द्वारा दान किया गया था और उन्होंने अधिकारियों से यह जांचने का आग्रह किया कि क्या इसका इस्तेमाल किसी गैर-कानूनी काम के लिए किया गया था.
अल्पसंख्यक संगठन क्या बोला
- अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले जाने-माने संगठन, 'बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद' ने हरिदास चंद्र तारणी दास की गिरफ्तारी की निंदा की है और उनकी तुरंत रिहाई की मांग की है. परिषद ने एक बयान में कहा, "बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने हरिदास चंद्र तारणी दास की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है और इस पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने हाल ही में गाइबांधा के पलाशबाड़ी में श्री श्री राधा गोविंद काली मंदिर परिसर में भगवान राम की 81 फुट ऊंची मूर्ति बनाने का प्रस्ताव रखकर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था. खबरों के मुताबिक, उन्हें 12 जुलाई 2026 की देर रात मनी-लॉन्ड्रिंग के एक कथित मामले में गिरफ्तार किया गया था."
- बयान में आगे कहा गया, "काफी समय से, कट्टरपंथी सांप्रदायिक समूह प्रस्तावित मूर्ति का विरोध कर रहे हैं और हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं. वो पूरे देश में बिना वजह धार्मिक नफरत फैला रहे हैं. सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने और सामाजिक अशांति को रोकने के लिए, अधिकारियों ने धार्मिक नफरत और असहिष्णुता भड़काने के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है. इसके बजाय, हरिदास चंद्र तारणी दास की गिरफ्तारी दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है."
- बयान में कहा गया है, "बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद ने हरिदास चंद्र तारानी दास की तुरंत रिहाई की मांग की है और अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे न्याय सुनिश्चित करें, धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करें और सांप्रदायिक नफरत फैलाने व सामाजिक सद्भाव को खतरा पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करें."
यह भी पढ़ें-मनमोहन सिंह ने खुदकुशी की बात क्यों की? खुद पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने किया क्लियर
मंदिर का निर्माण रुक गया
जून के महीने में, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समूहों ने गाइबांधा के पलाशबाड़ी उपजिला में भगवान राम की देश की सबसे बड़ी प्रतिमा बनाने की परियोजना से जुड़ी धमकियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया था. परियोजना को लेकर बढ़ते तनाव के बाद, इसे शुरू करने वालों ने निर्माण कार्य को अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की थी. NDTV से बात करते हुए, गाइबांधा पलाशबाड़ी कोमोरपुर श्री श्री राधा गोविंद मंदिर की मंदिर समिति के संस्थापक और अध्यक्ष हरिदास चंद्र तरानी दास ने कहा, "हम सनातन धर्म की ताकत के मुख्य स्रोतों में से एक, भगवान राम की मूर्ति बना रहे हैं. 81 फीट ऊंची इस मूर्ति का लगभग 80% काम पूरा हो चुका है, लेकिन कुछ कट्टरपंथी समूह अब हमें निर्माण कार्य रोकने के लिए मजबूर कर रहे हैं. हम डरे हुए हैं और इसी डर के कारण हमने काम रोक दिया है. मैं प्रधानमंत्री माननीय तारिक रहमान, कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले अधिकारियों और नागरिक समाज से अपील करना चाहता हूं कि वे यह सुनिश्चित करें कि हम अपना काम पूरा कर सकें."
यह भी पढ़ें-पांडवों के बाद हस्तिनापुर का क्या हुआ और सबसे आखिरी राजा कौन था, हैरान कर देगी कहानी
पुलिस ने क्या बताया
संदिग्ध वित्तीय लेन-देन को लेकर 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' के तहत मामला दर्ज करने के बाद, क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने हरिदास की गिरफ्तारी की घोषणा की. पुलिस ने बताया कि हरिदास को 'तौहीद इस्लाम' के नाम से भी जाना जाता था. अधिकारियों को उसके बैंक और MFS अकाउंट्स में संदिग्ध लेन-देन का पता चला, जबकि उसकी कमाई का कोई वैध जरिया नहीं था; इसके बाद वह जांच के दायरे में आया. पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में हरिदास के स्थानीय और विदेशी मुद्रा की लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध में शामिल होने के सबूत मिले हैं. बांग्लादेश की स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, CID ने बताया कि 2010 में बांग्लादेश लौटने से पहले वह पढ़ाई और ट्रेनिंग के लिए गैर-कानूनी तरीके से भारत गया था. बाद में 2019 में उसने इस्लाम अपना लिया और 'तौहीद इस्लाम' नाम रख लिया.
यह भी पढ़ें-
दिल्ली दंगा 2020 केस: ताहिर हुसैन समेत 5 आरोपी IB अफसर की हत्या के दोषी करार, 6 बरी
भारत के शहरों में आफत बन रही बारिश, इन देशों ने कैसे एक-एक बूंद बचाकर बनाया समंदर
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं