इंडोनेशिया की सबसे बड़ी इस्लामिक धार्मिक संस्था ने फतवा जारी करके पुरुषों को बड़ी चेतावनी दी है. उनसे कहा गया है कि स्वतंत्रता दिवस पर जश्न मनाते हुए महिलाओं के कपड़े न पहनें. जबकि वहां पुरुषों का इस दिन महिलाओं के कपड़े पहनकर फुटबॉल खेलना एक पुरानी परंपरा रही है. दरअसल इस मुस्लिम-बहुल एशियाई देश में LGBTQ-विरोधी भावनाएं बढ़ रही हैं. अब इंडोनेशियाई उलेमा काउंसिल (MUI) ने एक बयान में कहा कि दूसरे जेंडर का कपड़ा पहनना हराम या मना है.
उलेमा काउंसिल ने क्या कहा है?
न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार इंडोनेशियाई उलेमा काउंसिल ने कहा कि उसका यह कदम लेस्बियन, गे, सोडोमी और अश्लीलता (LGSP) आंदोलन के गुप्त अभियान को रोकने की कोशिश है. यह वह शॉर्ट-फॉर्म है जिसे यह उलेमा काउंसिल LGBT (लेस्बियन, गे, बाइसेक्शुअल और ट्रांसजेंडर) के विकल्प के तौर पर बढ़ावा देता है.
स्वतंत्रता दिवस पर चली आ रही खास परंपरा
हर साल इंडोनेशिया के लोग 17 अगस्त, 1945 को सदियों की गुलामी से आजादी मिलने की खुशी में खेल और परेड जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं. यहां के लोग रस्साकशी, बोरी-दौड़ और क्रैकर खाने की प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं. वे चिकने खंभों पर चढ़ते हैं और रंग-बिरंगी झांकियों वाली परेड में शामिल होते हैं.

हिजाब पहनकर फुटबॉल खेलते पुरुष खिलाड़ी (फोटो- AFP)
यह चेतावनी उन महिलाओं के लिए भी है जो पुरुषों के कपड़े पहनती हैं. यह पहली बार नहीं है जब उलेमा काउंसिल ने दूसरे जेंडर के कपड़े पहनने के खिलाफ आवाज उठाई है. लेकिन ताजा चेतावनी ऐसे समय में आई है जब इंडोनेशिया में गे लोगों पर शारीरिक हमलों की कई घटनाएं हुई हैं. राष्ट्रपति के एक नियम में तो LGBTQ कल्चर को सुरक्षा के लिए ही खतरा बताया गया है.
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