विज्ञापन

चोल वंश के ताम्रपत्र तो मिल गए, पर विदेश में अब भी कैद हैं भारत की 10 धरोहरें, देखें तस्वीरें

Top 10 Artefacts Of India: आइए आपको भारत के 10 आर्टिफिकेट के बारे में बताते हैं जो इस वक्त विदेश में है. इनमें बेशकीमती कोहीनूर हीरा भी है

चोल वंश के ताम्रपत्र तो मिल गए, पर विदेश में अब भी कैद हैं भारत की 10 धरोहरें, देखें तस्वीरें
india top 10 artefacts
  • ब्रिटिश राज के दौरान भारत की कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरें विदेशों में लूटकर रखी हैं
  • कोहिनूर हीरा, अमरावती मार्बल्स, सुल्तानगंज बुद्ध प्रतिमा और महाराजा रणजीत सिंह का स्वर्ण सिंहासन प्रमुख है
  • भारत सरकार और न्यायपालिका द्वारा इन कलाकृतियों की वापसी के लिए प्रयास और मांगें तेज हो रही हैं
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

भारत ने अंग्रेजों की हुकूमत का एक लंबा अध्याय देखा और झेला है. न जाने कितने असंख्य लोगों ने अपनी भारत माता की रक्षा के लिए बलिदान दे दिए. अंग्रेजों ने न सिर्फ लोगों को कष्ट दिए बल्कि भारत की बेशकीमती धरोहरों को भी लूट कर अपने साथ ले गए. हालांकि अब समय के साथ भारत की विदेश में रखीं धरोहरें अब धीरे-धीरे वापस अपने वतन लौट रही हैं. नीदरलैंड ने पीएम मोदी के दौरे के दौरान चोल राजवंश से जुड़े ताम्रपत्र वापस लौटा दिए तो वहीं भोजशाला मंदिर में स्थापित होने वाली मां वाग्देवी की असल मूरत के भी वापसी की मांग तेज हो गई है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकार को इसे वापस भारत लाकर फिर से स्थापित करने के निर्देश दिए हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि 11वीं शताब्दी के तामपात्र और 1034 ईस्वी की मां वाग्देवी की मूर्ति के अलावा भी कई  ऐसी आर्टिफिकेट हैं जो विदेश में रखे हैं और वापसी की बाट जोह रहे हैं. तो आइए आपको भारत के 10 आर्टिफिकेट के बारे में बताते हैं जो इस वक्त विदेश में है. 

Latest and Breaking News on NDTV

 1.कोहिनूर हीरा 

105.6 कैरेट का ‘माउंटेन ऑफ लाइट' (प्रकाश का पर्वत) कहे जाने वाला कोहिनूर दुनिया के सबसे प्रसिद्ध हीरों में से एक है. यह हीरा आंध्र प्रदेश के कोल्लूर की खदानों से निकला था और समय के साथ कई शासकों के पास रहा जिनमें  काकतीय वंश, खिलजी वंश,मुगल साम्राज्य,फारसी शासक,अफगान शासक और महाराजा रणजीत सिंह का सिख साम्राज्य शामिल है.आखिरकार, 1849 में पंजाब के विलय के बाद यह हीरा ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया को सौंप दिया गया.मौजूदा समय में यह यूनाइटेड किंगडम के टॉवर ऑफ लंदन में सुरक्षित रखा हुआ है. 

Latest and Breaking News on NDTV

2. अमरावती मार्बल्स

वर्तमान में यह ब्रिटिश म्यूजियम, लंदन मैं है.यह 120 बेहद बारीकी से तराशी गई चूना पत्थर (लाइमस्टोन) की मूर्तियों और शिलालेखों का शानदार संग्रह है. यह संग्रह ईसा पूर्व पहली सदी से लेकर तीसरी सदी के बीच का माना जाता है. ये कलाकृतियां पहले आंध्र प्रदेश स्थित महान अमरावती स्तूप के चारों ओर लगी हुई थीं, जो प्राचीन भारत के सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध स्मारकों में से एक था.

Latest and Breaking News on NDTV

3. सुल्तानगंज बुद्ध प्रतिमा

वर्तमान में यह बर्मिंघम म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी, यूनाइटेड किंगडम में स्थित है. यह एक विशाल तांबे की बनी बुद्ध प्रतिमा है, जिसकी ऊंचाई लगभग 7.5 फीट है और वजन आधे टन से अधिक है.यह प्रतिमा 1862 में बिहार में रेलवे निर्माण के दौरान खुदाई में मिली थी.यह गुप्त और पाल काल के बीच के समय (लगभग 500–700 ई.) की मानी जाती है और प्राचीन भारत की उन्नत धातुकला (metallurgy) और बौद्ध कला का उत्कृष्ट उदाहरण है.

Latest and Breaking News on NDTV

4. महाराजा रणजीत सिंह का स्वर्ण सिंहासन

यह सिंहासन विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम, लंदन में है.यह शानदार स्वर्ण सिंहासन 1820 से 1830 के बीच सुनार हाफिज मोहम्मद मुल्तानी की ओर से तैयार किया गया था.यह आठ कोनों वाला (octagonal) और सुनहरी सजावट से सुसज्जित सिंहासन सिख साम्राज्य की शाही भव्यता (courtly splendor) का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है.इसका डिजाइन कमल (लोटस) की पंखुड़ियों से प्रेरित है, जो इसे खास बनाता है.द्वितीय आंग्ल‑सिख युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसे युद्ध की लूट (state booty) के रूप में अपने कब्जे में ले लिया था.

Latest and Breaking News on NDTV

5. टीपू सुल्तान का ‘टाइगर' (Tipu's Tiger)

यह विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम, लंदन में है. ‘टाइगर ऑफ मैसूर' कहे जाने वाले टीपू सुल्तान के लिए 18वीं सदी के अंत में बनाई गई यह एक प्रसिद्ध यांत्रिक (मेकैनिकल) कलाकृति है.यह एक लगभग असली आकार का लकड़ी का बाघ दिखाती है, जो एक ब्रिटिश सैनिक पर हमला करते हुए प्रतीत होता है. इसमें एक खास मैकेनिज्म लगा है. जैसे ही इसका हैंडल घुमाया जाता है, अंदर लगा बेलोज सिस्टम (bellows) सक्रिय हो जाता है.जिससे बाघ की गुर्राहट और व्यक्ति की चीख जैसी आवाजें निकलती हैं.

Latest and Breaking News on NDTV

6. पदशाहनामा पांडुलिपि (Padshahnama Manuscript)

यह मौजूदा समय में रॉयल लाइब्रेरी, विंडसर कैसल, यूनाइटेड किंगडम में रखी है. यह एक बेहद सुंदर और चित्रों से सुसज्जित शाही पांडुलिपि है, जिसे मुगल बादशाह शाहजहां ने 1639 में बनवाया था. यह पांडुलिपि उनके शासन के पहले 10 वर्षों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है.इसमें युद्धों के दृश्य, दरबार के समारोह और शाही शादियों के बेहद बारीक और आकर्षक लघु चित्र (miniature paintings) शामिल हैं.यह पांडुलिपि 1799 में अवध के नवाब की ओर से किंग जॉर्ज III को भेंट की गई थी.

Latest and Breaking News on NDTV

7. कुलु वास (Kulu Vase)

यह भी ब्रिटिश म्यूजियम, लंदन में रखा है.यह एक दुर्लभ कांस्य (ब्रॉन्ज) से बना बर्तन है, जो हिमाचल प्रदेश की कुलु घाटी में मिला था.यह वास ईसा पूर्व पहली सदी (1st century BCE) का माना जाता है.इसकी खासियत यह है कि इस पर एक शाही जुलूस (royal procession) का बेहद बारीक और सुंदर चित्र उकेरा गया है. इस कलाकृति के माध्यम से हमें उस समय के कपड़े,संगीत और रथों के डिजाइन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है.

Latest and Breaking News on NDTV

8. अकोटा ब्रॉन्ज (चयनित मूर्तियां)

यह विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय (जिसमें न्यूयॉर्क का मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट भी शामिल है) में है. गुजरात में खोजे गए अकोटा खजाने (Akota hoard) में जैन धर्म से जुड़ी खूबसूरत कांस्य मूर्तियां शामिल हैं, जो 5वीं से 11वीं सदी ईस्वी के बीच की मानी जाती हैं. हालांकि इस संग्रह का एक बड़ा हिस्सा भारत में ही मौजूद है, लेकिन कुछ बेहद दुर्लभ और महत्वपूर्ण मूर्तियां  जो पश्चिमी भारत की खास कलात्मक शैली को दर्शाती हैं,20वीं सदी के दौरान विदेशी संग्रहालयों तक पहुंच गईं.

Latest and Breaking News on NDTV

9 इलाहाबाद का जेड कछुआ (Jade Terrapin of Allahabad)

इस वक्त यह ब्रिटिश म्यूजियम, लंदन में है.यह एक हरी जेड (कीमती पत्थर) से बना बेहद खूबसूरत और जीवंत कछुए का मॉडल है, जिसे 17वीं सदी की शुरुआत में एक ही पत्थर से तराशा गया था.यह कलाकृति इलाहाबाद (प्रयागराज) में एक प्राचीन जल संरचना (टैंक) के नीचे से खोजी गई थी. इसे मुगल काल की सबसे बड़ी और उत्कृष्ट जेड नक्काशी में से एक माना जाता है.

Latest and Breaking News on NDTV

10. कोणार्क की सूर्य प्रतिमा (Surya Sculpture of Konark)

वर्तमान स्थान ब्रिटिश म्यूजियम, लंदन है.यह प्रतिमा लगभग 1200 ईस्वी के आसपास हरे क्लोराइट पत्थर से तराशी गई एक बेहद बारीक और आकर्षक कलाकृति है. यह सूर्य देवता सूर्य को दर्शाती है और इसका मूल स्थान ओडिशा के प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर में था, जिसे राजा नरसिंहदेव प्रथम ने बनवाया था. इस प्रतिमा में सूर्य देव को शाही और दिव्य स्वरूप में दिखाया गया है, उनके साथ सहायक (attendants) भी दिखाई देते हैं, और आसपास ग्रहों (planets) के छोटे‑छोटे प्रतीक भी उकेरे गए हैं.

यह भी पढ़ें- ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात के बाद पहली बार आया ईरान का रिएक्शन, क्यों करने लगा ग्लोबल साउथ का जिक्र?

यह भी पढ़ें- लंदन में कहां और किस हालत में है भोजशाला की मां वाग्देवी की असली मूर्ति? NDTV को मिलीं Exclusive तस्वीरें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com