विज्ञापन

बाढ़ में तबाह हुए नेपाल के त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल को फिर बनवाएगा भारत, राजदूत से मिले प्रिंसिपल

नुवाकोट के बिदुर में स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल को फिर से बनाने में मदद करेगा. इस स्कूल के प्रिसिंपल ने मंगलवार को भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात की. इसी के बाद भारतीय राजदूत ने यह घोषणा की.

काठमांडू:

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने त्रिशूली घाटी में स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल में  भारी तबाही मचाई थी.इस स्कूल के प्रिंसिपल ने सूझबूझ का परिचय देते हुए करीब साढे 16 सौ बच्चों, स्कूल कर्मचारियों और अध्यापकों की जान बचा ली थी. हालांकि एक अध्यापक को नहीं बचाया जा सका और वो बाढ़ के पानी में बह गए. बाढ़ ने इस विद्यालय की इमारतों को काफी नुकसान पहुंचाया था. अब भारत ने इस विद्यालय को फिर से बसाने में मदद करने का ऐलान किया है. यह घोषणा नेपाल में भारत के राजदूत ने की है. भारत ने इस विद्यालय को बनाने में पहले भी मदद की थी.

भारत के राजदूत ने क्या घोषणा की है

नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने इसकी घोषणा त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी से मुलाकात के बाद की. उन्होंने एक एक्स पोस्ट में लिखा, ''त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल, बिदुर, नुवाकोट के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी से मुलाकात हुई. रासुवा में आई भयंकर बाढ़ में स्कूल के बह जाने से ठीक पहले उन्होंने समय पर कार्रवाई करते हुए 1,600 से ज्यादा स्कूली बच्चों की जान बचाई.''

भारत के राजदूत ने लिखा, ''यह स्कूल 1950 के दशक में बनाया गया था. इसे एक भारतीय इंजीनियर ने डिजाइन किया था, जो त्रिशूली जलविद्युत परियोजना के निर्माण से भी जुड़े थे. स्कूल का निर्माण भारत की सहायता से किया गया था. स्कूल की नई इमारत 2022 में भारत सरकार की सहायता से HICDP कार्यक्रम के तहत बनाई गई थी.दवाड़ी को बताया गया कि नेपाल में भारतीय दूतावास भविष्य में स्कूल के पुनर्निर्माण में हरसंभव सहयोग करेगा.''

भारत की मदद से ही बना था स्कूल

त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल में 1600 बच्चे पढ़ते हैं. बुधवार को जब नेपाल में बाढ़ आई तो स्कूल खुला हुआ था. करीब 900 बच्चे स्कूल पहुंच चुके थे. इस दौरान दवाडी को उनके एक दोस्त ने मोबाइल पर फोन कर बाढ की जानकारी दी. दोस्त ने उन्हें बताया कि पानी ने ऊपर की तरफ बसे गांवों को भी अपनी चपेट में ले लिया है.

त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने भारतीय राजदूत से मिलकर उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया.

त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने भारतीय राजदूत से मिलकर उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया.
Photo Credit: Naveen Srivastava, Ambassador of India In Nepal X

इसके बाद दवाडी ने पता लगाया कि कितनी स्कूल बसें स्कूल आ चुकी हैं और कितनी रास्ते में हैं.उन्हें बताया गया कि अभी 700 बच्चे या तो पैदल या फिर स्कूल बस से स्कूल की तरफ आने बाकी हैं. इस पर उन्होंने बस ड्राइवरों को फोन कर बसों को स्कूल न लाकर वापस ले जाने का आदेश दिया.

स्कूल के प्रिंसिपल ने कैसे बचाई 1643 लोगों की जान

इसी दौरान एक और अभिभावक ने फोन कर बताया कि उन्हें बताया कि बाढ़ का पानी स्कूल की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है. एक स्कूल बस भी स्कूल की तरफ आती दिखी. प्रिंसिपल ने तत्काल बस को वापस ले जाने को कहा. बस चालक ने बस को मोड़ा और बस ने स्कूल के सामने के पुल को जैसे ही पार किया वो पुल बह गया. इसके बाद प्रिंसिपल ने सभी टीचर्स को बच्चों को लेकर पहाड़ी की ऊंचाई पर जाने को कहा.

भारत के मदद से बने त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल को बनाने में भारत ने मदद की थी. इसकी डिजाइन भी भारत के एक इंजीनियर ने बनाई थी.

भारत के मदद से बने त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल को बनाने में भारत ने मदद की थी. इसकी डिजाइन भी भारत के एक इंजीनियर ने बनाई थी.
Photo Credit: Naveen Srivastava, Ambassador of India In Nepal X

इस बीच एक बच्ची को पैनिक अटैक आ गया. तब प्रिंसिपल ने एक मोटरसाइकिल पर उसे बैठाया और बाकी बच्चों को पैदल पहाड़ी के ऊपर भेज दिया. सारे बच्चों को भेजने और स्कूल को दोबारा चेक करने के बाद वो भी पहाड़ी की तरफ चढ़ने लगे. इस तरह उन्होंने स्कूल के 1644 में से 1643 लोगों को बचा लिया गया. केवल सोशल हिस्ट्री के टीचर सैंटोस परियार को नहीं बचाया जा सका. बाढ़ में बहने से उनकी मौत हो गई. 

ये भी पढ़ें: नेपाल में कितनी तबाही, पहली बार आसमान से दिखा भयावह मंजर, NDTV पर वीडियो

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Nepal Flash Flood 2026, Nepal Flood, India Nepal Relations
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com