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This Article is From Oct 24, 2011

भारतीय छात्र की हिरासत मनमाना कदम : मानवाधिकार आयोग

प्रशांत चेकरुपल्ली को पश्चिमी सिडनी की एक बेकरी में सही वीजा के बिना काम करने पर 2004 में गिरफ्तार किया गया था।
मेलबर्न: वीजा नियमों के उल्लंघन को लेकर वर्ष 2004 में ऑस्ट्रेलिया के आव्रजन एवं नागरिकता विभाग द्वारा हिरासत में लिए गए भारतीय छात्र को छह लाख डॉलर का मुआवजा दिए जाने की संभावना है। दरअसल, ऑस्ट्रेलिया के मानवाधिकार संगठन ने इस भारतीय छात्र की हिरासत को मनमाना कदम करार दिया है। प्रशांत चेकरुपल्ली को पश्चिमी सिडनी की एक बेकरी में सही वीजा के बिना काम करने पर 2004 में गिरफ्तार किया गया था। इंजीनियरिंग के परास्नातक के छात्र चेकरुपल्ली ने दक्षिण पश्चिमी सिडनी के विलावुड आव्रजन हिरासत केन्द्र में करीब 18 महीने गुजारे थे और उसे अप्रैल 2006 में रिहा किया गया। इस छात्र ने ऑस्ट्रेलियाई मानवाधिकार आयोग में मामला दर्ज करवाया था। आयोग ने इस महीने की शुरूआत में अपने निष्कर्ष सार्वजनिक किए। चेकरुपल्ली के वकील टोम मिथीएक्स ने कहा कि मानवाधिकार आयोग ने पाया है कि भारतीय छात्र को मनमाने तरीके से हिरासत में लिया गया और इससे आव्रजन अधिनियम का उल्लंघन हुआ। आयोग ने इसके बाद भारतीय छात्र को मुआवजा देने और उससे माफी मांगने की सिफारिशें की हैं। आयोग का मानना है कि इस छात्र को छह लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का मुआवजा दिया जाना चाहिए। चेकरुपल्ली अब भी वीजा पर ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है और उसके वकील का कहना है कि उसे स्थाई निवास की अनुमति दी जानी चाहिए।
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