नई दिल्ली:
भारत ने डेनमार्क की उच्च न्यायालय की उस टिप्पणी पर कड़ा विरोध जताया है जो उसने पुरुलिया हथियार कांड के आरोपी किम डेवी के प्रत्यर्पण की याचिका खारिज करते हुए देश में मानवाधिकार स्थिति को लेकर टिप्पणी की है। भारत ने कहा है कि ऐसी टिप्पणियां पूरी तरह से अस्वीकार हैं। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने सोमवार को डेनमार्क के उपराजदूत को तलब किया और उनसे स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में मानवाधिकार के रिकॉर्ड और जेलों की स्थिति को लेकर टिप्पणी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उपराजदूत को बताया गया कि डेवी हथियार गिराये जाने के मामले में आरोपी है और वह भारतीय कानून के तहत वांछित है। केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने बुधवार को डेनमार्क के उच्च न्यायालय की टिप्पणी को निराशाजनक बताते हुए इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया था कि देश की जेलों में कैदियों को यातनाएं दी जाती हैं।